"चोरी
का हेलमेट" (कहानी)
अनवर अली आज एक बहुत बड़े राजनैतिक हैसियत
वाले व्यक्ति है। अपने क्षेत्र से विधायक और राज्य सरकार मे मंत्री भी है। राज्य सरकार
मे कैबिनेट मंत्री का पद प्राप्त होना उनकी हैसियत और रसूख को दिखलाता है। राजधानी
मे बहुत बड़ा बंगला, कार नौकर चाकर के अलावा
उनके दैनिक कार्यक्रमों का लेखा जोखा रखने के लिये सरकार ने उनको एक निजी सचिव भी
दे रक्खा है। ज़ेड श्रेणी की सुरक्षा ने उनकी शान मे चार चाँद लगा दिये है। आज उसके रुतवे और लोकप्रियता से शहर का हरेक
आदमी परिचित है। बदलती हैसियत ने उनके मिज़ाज को भी बदल दिया। अब अन्नु मियां,
श्रीमान अनवर अली हो गए है। घर के बच्चे जो कल तक गली के नुक्कड़ वाले की चाट खाने
के पैसों के लिये अन्नु मियां के निहोरें करते थे आज पाँच सितारा होटलों मे पीज़ा
पार्टी आयोजित करते है।
पर आज से 2-3 तीन साल पहले तक ऐसा नहीं था। अनवर
उर्फ अन्नु मियाँ सत्ता के गलियारों मे पोस्टिंग ट्रांसफर के दलाली करते खूमते
फिरते और खुरचन से मिले माल से अपनी घर गृहस्थी चलाते थे और शहर मे राजनीति के छुट
भैये नेता थे। सभा और जलूस जलसों मे फर्श बिछाना कुर्सी लगाना ही इनका मुख्य काम
था। इनकी एक विशेषता और थी ये किसी एक खूटे से कभी नहीं बंधे। आधुनिक भारत की
राजनीति के गुणों मे सर्व गुण सम्पन्न
अन्नु मियाँ ने मौका परस्ती से कभी कोई परहेज
न करने के कारण उन्हे राजनैतिक दलों मे
मौके दर मौके मिलते रहे, जिसका उदाहरण आज
वे सफलता की सीढ़ी चढ़ते हुए सरकार के मंत्री
जैसे पद पर आसीन हो लंबे लंबे भाषण और उपदेश राज्य के नागरिकों को पिलाते है।
यातायात सुरक्षा सप्ताह मे उनके दिये गये भाषण ने श्रोताओं की बड़ी तालियाँ बटोरी
और उनके आम नागरिकों की जान माल के बचाने की सोच की खूब तारीफ की जब उन्होने कहा
हर दो पहिये वाहन चालकों को हेलमेट पहने
बिना वाहन नहीं चलाना चाहिये। हेलमेट के बिना वाहन चलाना जान जोखिम मे डालने जैसा
है। भले ही हेलमेट चोरी करना पड़े पर हमे
हेलमेट के बिना वाहन नहीं चलाना है!! आप को अन्नु मियाँ की हेलमेट चोरी की बात
अजीब लग सकती है, सुनकर मुझे भी अन्नु
मियाँ की बात विचित्र और हास्यास्पद लगी थी!!
लोगो ने जब अनवर अली की उस बात के पीछे छुपी
सच्चाई को बताया तो हमे कोई आश्चर्य नहीं हुआ। दरअसल अन्नु मियाँ राजनीति के
शुरुआती दिनों मे अपने एक मित्र खालिद के साथ अपने अपने वाहनों से एक कार्यक्रम मे गये
हुए थे। कार्यक्रम की बापसी मे जैसे ही उन्होने अपनी मोटरसाइकल स्टार्ट की तो
यातायात के सिपाहियों द्वारा हेलमेट के बिना वाहनों का चालान बनाते देख चुपके से
खालिद का हेलमेट लेकर चालान से बच के तो निकल गये,
पर जब खालिद ने जैसे ही अपनी बाइक चलाने के लिये उठाई तो अपना हेलमेट न पाकर यहाँ
वहाँ तलाशने की कोशिश की पर आसपास कहीं उसका हेलमेट नहीं दिखाई दिया। थक हार कर अब
खालिद ने बिना हेलमेट के ही घर की ओर रवानगी डाल दी। शायद उस दिन दुर्भाग्य खालिद
का पीछा कर रहा था। एक चौराहे पर एक
अनियंत्रित ट्रक ने खालिद को ज़ोर दार टक्कर मार दी। हेलमेट न पहने होने के कारण
खालिद के सिर मे गंभीर चोटे आयी,
उसे अस्पताल मे भर्ती कराया गया पर तमाम कोशिशों के बावजूद उसे बचाया न जा सका।
पुलिस और डॉक्टर का कहना था कि यदि खालिद उस दिन हेलमेट पहने होता तो पूरी संभावना
थी कि दुर्घटना मे उसकी जान न जाती। खालिद के घर वालों ने इस बात को ज़ोर देकर
प्रशासन को कहा कि खालिद ने कभी भी हेलमेट
के बिना बाइक नहीं चलाई और उस दिन भी वह हेलमेट लेकर ही घर से निकला था। लगता है
किसी नीच, घिनौने और चोर मानसिकता
के व्यक्ति ने उसका हेलमेट चोरी कर लिया और जिसके कारण खालिद की असामयिक मौत हो
गयी। पुलिस ने गुमनाम व्यक्ति के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज़ कर मामला कायम कर लिया। पर
उस हेलमेट की चोरी के सबूत कभी न मिल पाने के कारण चोरी की रिपोर्ट बंद कर दी गयी।
पर खालिद की मौत की सच्चाई अन्नु मियाँ को
हुई तो वह आत्मग्लानि से ग्रसित हो गये। वे देश की अदालत से तो बच गये पर अपनी
आत्मा की अदालत से अब तक न बच पाये। उनकी आत्मा उन्हे खालिद की मौत के अपराध से उनको
मुक्त न कर सकी, और एका एक आज उनके मुँह
हेलमेट पहन कर वाहन चलाने की बात कही,
"भले ही हेलमेट चोरी का क्यों न हो"!!
विजय सहगल
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