"चाण्यकपुरी
ऑफ ग्वालियर नॉट देल्ही"
एक दिन ऐसे ही प्रातः भ्रमण पर जब मैंने एक
नौजवान को जनवरी की कड़ाके की सर्दी मे एक कचरे के ढेर को फावड़े से साफ करते देखा।
मैंने पूंछने पर उस लड़के ने अपना नाम विक्की बताया था। जब मेरे सहित वहाँ से गुजर
रहे लोग सिर से पैर तलक कपड़ो मे ढके आ-जा रहे थे,
वह नौजवान पानी से सरावोर कचरे को फावड़े से इकट्ठा कर कचरा गाड़ी मे डाल रहा था।
मुझे स्वतः ही शांतिकुंज हरिद्वार मे पूज्य गुरुदेव प॰ श्री राम शर्मा,
आचार्या जी को वो संदेश याद हो आया कि
"आपकी पढ़ाई का कोई महत्व नहीं रह जाता है,
यदि आपके द्वारा फैका गया कचरा अगली सुबह कोई अनपढ़ व्यक्ति उठाता है"।
"शिक्षित है हम, तो समझदार भी
बने"।
जी हाँ मै चर्चा कर रहा हूँ चाण्यक्पुरी की
पर दिल्ली की नहीं ग्वालियर की। जहां एक तरफ दिल्ली के चाण्यक्पुरी देश की शानदार कॉलोनी मे
से एक है और जहां देश और दुनियाँ के कुशल
राजनयिक, कूटनैतिज्ञ निवासरत्
हैं पर ठीक इसके विपरीत ग्वालियर की इस चाण्यक्पुरी को सबसे निकृष्ट आवासी कॉलोनी
कहा जाए तो अतिरंजना न होगी। इस अतिशयोक्ति के लिए जिम्मेदार नगर निगम नहीं अपितु यहाँ के निवासी स्वयं है
जो घर घर कचरा एकत्र करने आने वाली गाड़ी आने के बावजूद कुछ लोग कचरा नाले और
स्वनिर्मित घूरे पर डालते है और अधिकांश लोग तटस्थ रह उनके कुकृत्य पर मौन रहते है।
इन कुछ अधम सोच के रहवासियों की वजह से इस कॉलोनी को नरक बनाने मे कोई कसर नहीं
छोड़ी। कचरे को सड़क और नालों मे डालने वाले इन निवासियों की मानसिक सोच एक शोध का
विषय हो सकती है। शासन को मनोवैज्ञानिकों से आग्रह कर इस पर वृहद विषय मे अनुसंधान
कराना चाहिये? इन तटस्थ और मौन रहने वालों
पर भी श्री रामधारी सिंह दिनकर की निम्न पंक्तियाँ बड़ी सटीक और सामयिकहै:-
"समर शेष है, नहीं पाप का भागी
केवल व्याध"
"जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके
भी अपराध"
दुर्भाग्य देखिये कि नगर निगम ग्वालियर
द्वारा जब घर घर से कचरा एकत्रित करने
वाली गाड़ी लोगो के दरबाजे पर भेजी जा रही है तब इस कॉलोनी के कुछ रहवासियों के
बारे मे क्या राय बनाई जानी चाहिये?
घर घर कचरा एकत्रित करने वाला वाहन आने के बावजूद ये हाल है तो बगैर कचरा एकत्रित
करने वाले समय क्या हाल रहता होगा। ये हाल तब है जब इस कॉलोनी मे अधिकांश रहवासी
उच्च विप्रकुल एवं धनसंपन्न समृद्धशाली दुग्ध उत्पादक खेतिहर है। अधिसंख्य रहवासी
धर्मपरायण होने के बावजूद देवालय के पास ही कचरा फेंकने मे नहीं झिझकते?
हमारे विचारों और अवधारणाओं मे इतना अद्धोपतन क्यों?
इस कॉलोनी के कुछ लोग
उनके घर के दरवाजे पर कचरा गाड़ी
आने के बावजूद कचरा जहाँ तहाँ,
नाले या स्वनिर्मित कचरा घर मे डालते है। इस कॉलोनी के धर्मपरायण निवासी बिना इस
बात की परवाह किए कि सड़क के पार कॉलोनी वासियों के श्रद्धा और आस्था का केंद्र एक
मंदिर भी है। भारतीय कूटनीति के पितामह जिन्होने कूटनीति का महान ग्रंथ,
"चाणक्य नीति" की रचना की,
उनके नाम से रखी इस कॉलोनी "चाणक्य पुरी ग्वालियर" को देख उनकी आत्मा भी
चित्कार कर कॉलोनी के हालात पर रो रही होगी। जब कॉलोनी के रहवासी सकारात्मक सोच के
साथ संगठित न हो एक दूसरे के विरुद्ध "कूट"
(छद्म) नीति रचते हो?
गाय जैसे पवित्र पशु को माता के रूप मे पूजने वाले हम गायों को श्रद्धा
सम्मान की दृष्टि से देखते और पूजते है पर वास्तविक आचरण मे हम कितने निष्ठुर और
अदयालु है कि सब्जी, फल और बचे हुए भोजन को भी प्लास्टिक की थैलियों मे भरकर सड़क या कचरे घरों
मे फेंक देते है और उसमे भी ऐसी ध्रुव गांठ बांधेंगे जिसे जानवर तो क्या आदमी भी
सहजता से नहीं खोल सकता। खाने की लालच मे गाय इन प्लास्टिक की थैलियों से भोजन
निकालने के निरर्थक प्रयास मे असफल होने के बाद प्लास्टिक की थैली सहित ही उस खाने
को खा कर अकाल ही मौत के मुंह मे चली जाती है। प्लास्टिक की थैली मे खाने की वस्तुओं
को गांठ बांध फेंकने की इस सर्वदर्शी समस्या
से ये कॉलोनी भी बुरी तरह पीढ़ित है। क्या हम इतना भी नहीं कर सकते कि बचे हुए भोजन, सब्जी, फल जैसे पदार्थों को प्लास्टिक की थैली से
मुक्त कर एक स्थान पर डाल दे ताकि गाय उन भोज्य पदार्थों को सरलता और सहजता से खा
सके? इस संबंध मे दिनांक 21 मई 2021 को मेरे ब्लॉग "संकरन" पर भी आप दृष्टिपात कर सकते है। (https://sahgalvk.blogspot.com/2021/05/blog-post_29.html
)॰
पिछले दिनों 18 जनवरी 2022 को नगर निगम के
कमिश्नर सहित शासन के उच्च अधिकारियों ने प्रदेश मे शहरों की सफाई रैंकिंग मे
पिछड़ने पर चर्चा की। जब गाड़ी पर तैनात सफाई कर्मी "विक्की" ने कहा कि
हमारे अधिकारि ऐसे लोगो के विरुद्ध कार्यवाही नहीं करते जो कचरा,
गाड़ी मे न डाल यहाँ वहाँ फेंकते है। मैंने ऐसे कुछ नागरिकों से कचरा,
गाड़ी मे न डालने का कारण पूंछा तो उनके उत्तर सुन आश्चर्य मिश्रित आक्रोश भी हुआ
जब उन्होने कहा कि हम सुबह गाड़ी आने के पूर्व स्नान कर लेते अतः फिर कचरे को कैसे
छू सकते है? इसलिए कचरा घूरे,
सड़क या नाले मे डाल देते है। मेरा मानना है कि यदि नगर निगम,
ग्वालियर के कमिश्नर महोदय हर घर के सामने एक सफाई कर्मी भी खड़ा कर दे तो
ग्वालियर की रैंकिंग सफाई के मामले मे अच्छी नहीं हो सकती जब तक कि ऐसे नागरिकों
के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही न करे जो
कचरा गाड़ी आने के बावजूद कचरा सड़कों और नालों मे डालते है। न जाने क्यों हम अंग्रेजों
की लाठी डंडे की नीति के बिना कानून के पालन मे विश्वास नहीं करते?
अस्सी प्रतिशत सकारात्मक सोच के रहवासियों पर बीस प्रतिशत नकारात्मक सोच के
व्यक्ति हावी हो इस गंदगी फैलाने के लिए उत्तरदायी है जो सरकार की स्मार्ट सिटी योजना
मे पलीता लगा रहे है। अतः इन नकारात्मक और "स्नान" के बाद गाड़ी आने
जैसे दक़ियानूसी कुतर्क की आड़ लेकर गंदगी
फैलाने वाले नागरिकों के विरुद्ध जब तक दंडात्मक कार्यवाही नहीं की जाएगी तब तक
ग्वालियर की सफाई रैंकिंग मे सुधार और विकास संभव न हो सकेगा।
ऐसा नहीं की चाण्यक्पुरी मे सब तरफ
नकारात्मक सोच के नागरिकों का ही प्रादुर्भाव है,
चाण्यक्पुरी के निश्चयात्मक सोच के लोग अपनी तरह से प्रयास तो कर रहे है पर प्रोत्साहन
एवं संगठित न होने के आभाव मे प्रभावशाली
भूमिका नहीं निभा पा रहे है। यदि शासन
उन्हे पृष्टभूमि मे थोड़ी सी ऊर्जा प्रदान कर उन्हे वाढवा दे तो इस समस्या का
समाधान संभव है।
चाण्यक्पुरीपुरी से चंद कदम की दूरी पर
स्थित न्यू दर्पण कॉलोनी के निवासी जब वहाँ के
बच्चों को सफाई आदि के लिये प्रोत्साहित करते है तो उसके सुंदर परिणाम
देखने को मिलते है। इस कॉलोनी के बच्चों और महिलाओं ने 26 जनवरी 2022
"गणतन्त्र दिवस" के राष्ट्रीय पावन पर्व पर मिलकर कॉलोनी मे स्थित
कमांडेंट यू॰ एस॰ रावत पार्क को स्वयं
अपने हाथों से झाड़ू लगाकर सफाई का काम किया जो एक प्रसंशनीय कार्य है इसका जितना भी अभिनंदन और अभिवादन किया जाये कम है। इन
बच्चों और महिलाओं ने, न केवल पूरे
मैदान का कचरा साफ किया बल्कि कचरे को थैलियों मे एकत्रित कर अगले दिन कचरा गाड़ी
मे डाल कर एक आदर्श द्रष्टांत प्रस्तुत किया। यहाँ के बच्चों के पार्क की सफाई का एक आदर्श उदाहरण क्या चाण्यक्पुरी के उन चंद नकारात्मक सोच के निवासियों के लिये
प्रेरणा का स्त्रोत नहीं बन सकता?
विजय सहगल