"अपहरण -2 "
मैंने
अपने ब्लॉग 13 जून 2021 मे एक अपहरण की घटना का जिक्र किया था (https://sahgalvk.blogspot.com/2021/06/blog-post_13.html) और
उसमे एक अन्य अपहरण की घटना लिखने का जिक्र किया था। आज अपहरण की उस दूसरी घटना का विवरण पर ब्लॉग लिख रहा हूँ। डबरा मे पदस्थपना की वो घटना मुझे आज भी ताज़ा
है। 2008 या 09 की बात है। शाखा मे लंच के बाद का समय था। अचानक हमारे एक स्टाफ
सदस्य के घर से फोन आया कि उनका बेटा जो उनके घर के नीचे की गली मे खेल रहा था, कुछ लोग उसे मोटरसाइकल पर बैठा कर ले गये। सूचना गंभीर थी। हमारे स्टाफ
सदस्य तुरंत घर की ओर दौड़े। घटना की पूर्ण जानकारी अप्राप्त थी अतः मैंने
अपने दो साथियों को भी पीछे पीछे उनके घर
रवाना किया। उनको हिदायत थी कि घटना की जो भी जानकारी हों मुझे भी तुरंत अवगत
कराये। एक अस्थाई सबस्टाफ के साथ मै ही शाखा मे शेष था। कुछ देर बाद ही एक अन्य स्टाफ
सदस्य जो पीढ़ित साथी के घर पर पहुँच गये थे, ने फोन कर सूचित
किया कि बच्चा मकान के नीचे गली मे अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। अचानक
मोटरसाइकल पर सवार दो लोगो मे से एक ने बच्चे को गोद मे उठा मोटरसाइकल पर बैठाया
और वहाँ से फरार हो गये। साथ मे खेल रहे बच्चों ने तुरंत ही घटना की खबर बच्चे की
माँ को दी। हमारे स्टाफ की श्रीमती जी ने तुरंत ही फोन पर अपने पति को शाखा मे फोन
कर घटना से अवगत कराया। सूचना पा कर हमारे साथी तो तुरंत ही घर निकल गये पर घटना
की खबर से शाखा मे सन्नाटा छा गया।
कुछ
सूझ नहीं रहा था क्या करे। किम कर्तव्य विमूढ़ की स्थिति थी। हमारे स्टाफ जिनका
बेटे को जो असामाजिक तत्व ले के गये क्या बीत रही होगी इसकी कल्पना ही की जा सकती
है। अचानक मैंने अपने आपको नियंत्रित कर घटना की जानकारी अपने प्रादेशिक कार्यालय
को दी और अनुरोध किया कि अपने स्तर पर आपको जो भी उचित जान पड़े कीजिये तब तक मै
अन्यन्त्र फोन करता हूँ। अब तो जैसे मुझे राह सूंझ गई मैंने अपने संगठन के साथियों
को फोन पर इस आपात घटना की खबर कर कहा कि कानून व्यवस्था से जुड़े शासन-प्रशासन के
उच्च अधिकारियों को घटना से अवगत करा पुलिस प्रशासन का सहयोग ले।
हमारी
शाखा परिसर के स्वामी श्री हरी बाबू शिवहरे जो डबरा के गणमान्य नागरिक भी है को भी
फोन कर बच्चे के अपहरण की घटना से अवगत करा अपने प्रभाव का इस्तेमाल पुलिस प्रशासन
से त्वरित सहयोग लेने का अनुरोध किया ताकि बदमाश जो शहर के आसपास ही होंगे
घेराबंदी हो सके। हमारे बैंक परिसर के
मालिक के भाई श्री आर के शिवहरे जो उन
दिनों इंदौर मे डीआईजी पदस्थ थे एवं मेरे अच्छे परिचित भी थे उन्हे भी फोन कर घटना
की जानकारी दे मदद की अपील की। चूंकि डबरा जिला ग्वालियर के अंतेर्गत होने के कारण
ग्वालियर की शाखाओं मे पदस्थ साथी मैनेजरों को भी तुरंत फोन कर उक्त सनसनीखेज घटना
से अवगत करा अनुरोध किया कि 4-5 लोग एकत्रित होकर ग्वालियर स्थित जिला पुलिस
अधीक्षक से संपर्क कर घटना मे अविलंब कार्यवाही के लिये कहे। हमारी शाखा के ही एक
सम्मानित ग्राहक जो डबरा के आगे ही दतिया राष्ट्रीय राजमार्ग पर थाना इंचार्ज थे
से भी सतर्कता के लिये कार्यवाही का अनुरोध किया। उस समय मुझे जो जिस किसी भीव्यक्ति
का स्मरण आया जो इस घटना मे मेरी सहायता कर सकता था उसे मैंने फोन कर सहायता की अपील
की जिसमे मेरी शाखा के एक मीडिया कर्मी भी शामिल थे।
इसी बीच त्वरित गति से ग्वालियर के साथी प्रबन्धकों ने श्री सूर्यवंशी जी, जिला पुलिस अधीक्षक ग्वालियर से मुलाक़ात की। श्रीमान पुलिस अधीक्षक महोदय को तब तक इस अपहरण की जानकारी मिल चुकी थी। उन्होने हमारे साथियों को अवगत कराया कि घटना मे अवशयक कार्यवाही शुरू हो चुकी है। अब तक घटना की जानकारी स्थानीय स्तर से लेकर प्रादेशिक स्तर पर कानून व्यवस्था से संबन्धित विभागों को पहुँच चुकी थी।
घटना
के बमुश्किल 20-25 मिनिट मे जिन जिन महनुभावों, मित्रों,
शुभचिंतकों को फोन कर अपहरण की घटना मे सहयोग की अपकेक्षा की थी, परिणाम भी आने लगे। डबरा पुलिस ने त्वरित कार्यवाही कर शहर के सभी नाकों
पर गश्त बड़ा दी। शहर से जाने वाली सड़कों पर विपरीत दिशा से आ रहे लोगो से अपहृत
बच्चे की जानकारी ली तो ज्ञात हुआ कि भितरवार रोड पर दो मोटर साइकल सवारों के बीच
एक बच्चे को देखा गया है। अब डबरा पुलिस की गाड़ियों का रुख भितरवार रोड पर भितरवार कस्बे की ओर था।
वही भितरवार पुलिस को सूचना दी गई कि वो डबरा जाने वाली सड़क की तरफ कूँच करे। इस सम्पूर्ण
कार्यवाही को डबरा के तत्कालीन एसडीओपी श्री चौबे जी (पूरा नाम याद नहीं) स्वयं
अंजाम दे रहे थे।
मध्य
प्रदेश पुलिस की द्रुत और तेज कार्यवाही के कारण भितरवार शहर की प्रवेश सीमा पर ही
अपहरणकर्ताओं और पुलिस का सामना हो गया। डबरा से भितरवार की दूरी लगभग 40 किमी॰
रही होगी एसडीओपी महोदय पीछा करते हुए अपराधियों के नजदीक जा पहुंचे। आगे और पीछे
से पुलिस की दविश को देख अपहरणकर्ता चौंक गये। उन्हे अंदेशा नहीं था कि उनके इस
कुत्सित कृत पर पुलिस तीव्र और त्वरित गति
से बदमशों के पीछे लगी है। इस आपाधापी मे अपहरणकर्ता
बच्चे को छोड़ एक स्थानीय सूखी नदी पर बने पल की ओर मोटर साइकल छोड़ कर भागे। पुलिस
ने तेजी से भाग कर पहले बच्चे को अपने
कब्जे मे सुरक्षित लिया ताकि गुंडे-बदमाश उसे किसी भी हिंसा आदि से क्षति न पहुंचा
सके। अन्य पुलिस बल उन उन्हे दबोचने हेतु उनके पीछे दौड़ा। बाद मे जैसा कि पुलिस अधियाकरी
महोदय ने अवगत कराया कि बदमाश बच्चे को छोड़ भितरवार कस्बे के बाहर नदी पर बने पुल पर
पुलिस के घेरे मे फंस गये जिसमे एक बदमाश ने पुलिस से बचने की चेष्टा मे नदी पर बने
पुल से छलांग लगा दी! नदी सूखी थी रेत मे ऊंचाई से कूदने के कारण उसकी मौत हो गयी।
कुछ लोगो की कानाफूसी मे जानकारी लगी कि उक्त बदमाश को पुलिस ने मुठभेड़ मे मार गिराया।
हालांकि इस मुठभेड़ की कार्यवाही की स्पष्टता की पुष्टि अब तक भी सुनिश्चित नहीं है।
हमारे
ग्वालियर शाखा के स्टाफ विजय गुप्ता, यशवीर सिंह, राजेंद्र
सिंह आदि पुलिस अधीक्षक महोदय ग्वालियर से मिलकर उनके कार्यालय से बापस बाहर निकले
ही थे कि पुलिस अधीक्षक महोदय ने उन सबको बापस
बुलवाकर सूचना दी की अपहृत बच्चे को सकुशल बरामद कर एक बदमाश को गिरफ्तार कर लिया गया
है जबकि दूसरा बदमाश पुलिस से बचने के चक्कर मे नदी के पुल से कूदने के कारण मारा गया।
बाद
मे ग्वालियर पुलिस अधीक्षक महोदय के डबरा प्रवास पर हम बैंक के स्टाफ के लोग उनसे मिले
और पुलिस स्टाफ एवं विशेषकर एसडीओपी श्री चौबे की इस अपहरण की घटना मे त्वरित, शीघ्र एवं तीव्र कार्यवाही पर अनेकानेक
आभार एवं धन्यवाद ज्ञपित किया जिसकी जितनी भी प्रशंसा की जाये कम थी साथ ही इस घटना
मे हमारे बैंक के कुछ सम्मानीय ग्राहकों, मित्रों, बैंक के बरिष्ठ अधिकारियों साथियों ने पुलिस प्रशासन के समक्ष घटना को लाकर
जो अप्रत्यक्ष सहयोग किया वह भी कम नहीं था। जिसके के कारण एक अनहोनी घटना होने से
बच गयी।
विजय
सहगल
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