"लोकतन्त्र का हरण?"
आज
6 अप्रैल 2021 को माननीय समाज पार्टी
राज्य सभा सांसद श्रीमती जया बच्चन ने टोली गंजविधान सभा क्षेत्र के टीएमसी विधायक के पक्ष मे प्रचार किया। किया भी जाना
चाहिए ये उनका लोकतान्त्रिक अधिकार है कि वे किसके पक्ष मे अपने प्रभाव का
इस्तेमाल करें। माननीय जया जी के वक्तव्य की शुरुआत बिल्कुल फिल्मी अंदाज मे तमतमायेँ
चेहरे की भाव भंगिमा के साथ थी। जिसे मै हू-ब-हू रख रहा हूँ साथ ही हिन्दी रूपांतर
प्रस्तुत है:-
I want to say that Do not hijack my religion
from me. Do not! never. Do not hijack my
democracy and democratic right from me!! and when I say "me" , I represent all the people and that is why I am here. Because Mamta
Bainerji is fighting, struggling॰ A single lady to preserve the
democratic right of every individual of Bengal. Bengal thinks and does much before rest of the country and the world does॰ पूरा विडियो लिंक के माध्यम से देखा जा सकता है। (https://www.youtube.com/watch?v=ytR5EZBjWxU)॰
हिन्दी
रूपांतर- मै कहती हूँ कि मुझसे मेरे धर्म
का बलात हरण मत करों, कदापि नहीं!! कभी नहीं!! मेरे प्रजातन्त्र एवं मेरे प्रजातांत्रिक
अधिकारों का बलात हरण मुझसे मत करो!! और जब मै कहती हूँ "मेरे" अर्थात
सभी लोगो के जिनका मै प्रतिनिधित्व करती हूँ और इसीलिए मै यहाँ हूँ!! क्योंकि ममता
बैनर्जी, एक मात्र महिला, बंगाल के
प्रत्येक व्यक्ति के लोकतान्त्रिक
अधिकारों की रक्षा के लिये लड़ रही है, संघर्ष कर रही है। जब देश और दुनियाँ कुछ करने का विचार करती है, तब तक बंगाल, उनसे बहुत आगे सोच कर अंजाम तक पहुंचा
देता है।
शुरुआत
मे बंगाली भाषा मे बंगाल की उन्नति के लिए उनकी अपील ममता बैनर्जी के पक्ष मे थी, समझ आता
है। लेकिन हिन्दी सिने जगत का दुर्भाग्य
रहा कि हिन्दी के माध्यम से प्रसिद्धि और समृद्धि प्राप्त करने वाले अभिनेता और
अभिनेत्रियाँ जिनके प्रसंशक इनको अपने सिर आँखों पर बैठाते है। जब ये अपनी मातृ
भाषा मे बात करते है तो प्रशंसनीय है लेकिन प्रायः हिन्दी भाषा के उपर अँग्रेजी भाषा को संवाद
मे प्राथमिकता देना सरहनीय नहीं अपितु निंदनीय है। कुछ ऐसा ही व्यवहार एवं आचरण श्रीमती
जया जी द्वारा उनकी पत्रकार वार्ता मे देखने को मिला। श्रीमती जया बच्चन के तेवर उस वक्तव्य मे बड़े
तीखे थे जब उन्होने अपने बंगाली और अँग्रेजी मिश्रित वक्तव्य मे कहा जिसका हिन्दी
रूपांतर यूं था "मै ये कहना चाहती
हूँ कि "मुझ से मेरे धर्म का बलपूर्वक हरण मत करो"। एक महा नायिका ने
बिलकुल सही फरमाया, कौन मूढ़मति ऐसा दुस्साहस कर सकता है जो देश के जाने माने परिवार से उसका धर्म बलपूर्वक छीन
सके? कौन सा ऐसा धृष्ट/ढीठ होगा या जो अपना सत्यानाश कर
आत्मघात करने के लिए आमादा होगा जो अभिनय
के क्षेत्र के दिग्गज अभिनेत्री का धर्म
का हरण कर सके? आखिर इशारा किस व्यक्ति या राजनैतिक दल पर था? निश्चित तौर पर बंगाल पर शासित वर्तमान टीएमसी सरकार पर तो होगा ही नहीं क्योंकि वे तो ममता
बैनर्जी सरकार के समर्थन मे प्रचार करने
जो आई थी। लेकिन श्रीमती बच्चन शायद ये भूल गई कि जिस ममता दीदी के समर्थन मे आज
वो बंगाल मे प्रचार करने आयी थी उनके ही पिछले कार्यकाल मे इन्ही दीदी ने "सरस्वती
मूर्ति पूजन/विसर्जन" पर प्रतिबंध लगा भद्र बंगाली समुदाय के धर्म का बलात हरण कर प्रतिबंधित किया था!! वो
तो भला हो माननीय न्याय व्यवस्था का जिसके कारण माननीय कलकत्ता हाई कोर्ट के हस्तक्षेप से 21
सितम्बर 2017 को इस त्रुटि पूर्ण धर्म भेद करने वाले निर्णय को निरस्त किया गया था।
इसी कारण वे अपनी इस मनमानी और निरंकुश कारगुजारी
मे सफल न हो सकी थी। सही है मेडम बच्चन "बड़े आदमी का धर्म तो धर्म है और गरीब
असहाय के धर्म को कोई भी ऐरा गैरा नत्थू अपनी निरंकुशता का परिचय दे कभी भी
प्रतिबंध लगा दे? आदरणीय जया जी आज आप अपने धर्म के हरण के
लिये हैरान, परेशान है? क्या आपमे साहस
है कि गरीब, और असहाय के धर्म पालन हेतु आप ममता बैनर्जी से "सरस्वती पूजन पर लगाए प्रतिबंध
के वारे मे सवाल पूंछ सकें?
माननीय
सांसद जया बच्चन जी मुझे उम्मीद ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि आपकी सासु माँ
ने धर्म के रक्षार्थ गुरु तेग बहादुर जी के शीश बलिदान की कथा अवश्य बताई होगी या
आप स्वयं भी जानती होंगी। अपने लिये तो दुनियाँ लड़ती है लेकिन मै आपको गुरुवाणी की
वो पंक्तियाँ स्मरण कराना चाहता हूँ "सूरा सो पहचानिए, जो लरै
दीन के हेत, पुरजा-पुरजा कट मरै कबहू ना छाडे खेत" को
सच किया।
एक
बात और माननीय सांसद महोदय, अभिनय के क्षेत्र मे पारंगत और पराकाष्ठा प्राप्त व्यक्ति मानवता, देश और समाज पर
आये संकट के समय मर्सिडीज कार खरीद का भौड़ा प्रदर्शन नहीं करते अपितु अभिनय के महा
नायक तो सोनू सूद जैसे लोग है जो मानव
धर्म निभाने के लिये अपने धर्म हरण का छद्म
स्यापा न करते हुए मानव सेवा के लिये गरीब मजदूरों, श्रमिकों
और मेहनतकश लोगो की सेवा मे सड़कों पर खड़े रहते है।
अगली
कढ़ी के रूप मे माननीय जया जी ने अपने प्रजातंत्र एवं लोकतान्त्रिक अधिकारो के
बलपूर्वक हरण के विरुद्ध चेताया। एक जन प्रतिनिधि के नाते बंगाल के प्रत्येक
व्यक्ति के लोकतान्त्रिक अधिकारों की रक्षा के लिये ममता बैनर्जी के संघर्ष का समर्थन किया!! बहुत अच्छा लगा कि उनके
दल समाजवादी पार्टी की कितनी निष्ठा, समर्पण
एवं सम्मान लोकतन्त्र के लिये है। मेडम, आप को 2 जून 1995 के
लखनऊ गेस्ट-हाउस कांड का स्मरण तो होगा
ही। किन लोकतान्त्रिक मूल्यों के रक्षार्थ उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री
मायावती पर आपके दल की विचारधारा से पोषित समर्थकों और अनुयायियों ने हिंसक आक्रमण किया था? कौन से प्रजातान्त्रिक मूल्यों के संस्थापनार्थ आपके दल के समाजवादीयों
ने हिंसक अशोभनीय एवं निर्लज्ज आचरण कर "गेस्ट हाउस कांड" का प्रतिपादन
किया था। जिन लोकतान्त्रिक अधिकारों की आप बात कर रही है,
आपके समाजवादी दल ने प्रजातन्त्र की रक्षार्थ कौन सा उदाहरण प्रस्तुत किया था जिसे
आप लोकतन्त्र के इतिहास का उदाहरण बताएँगी? सुश्री मायावती भी एक महिला के नाते समाज के
दबे-कुचले वर्ग के लिए संघर्षरत थी। उनकी मान मर्यादा को आपके दल के लोगो ने किस तरह तार-तार किया, देश
आज भी उसे भूला नहीं है! क्या एक महिला और सांसद होने के
नाते एक बार भी आपके दिल मे अपने दल के सदस्यों के अमर्यादित आचरण के विरुद्ध आक्रोश नहीं आया?
14
अप्रैल 2019 को आप ही के दल के सांसद मोहम्मद आज़म खान की रामपुर मे जयप्रदा पर की
गई वो निर्लज्ज, शर्मनाक
और आपत्ति जनक टिप्पड़ी तो याद होगी ही जिसका उल्लेख करने मे भी मुझे घिन आती है!
क्या विचार रखती है आज़म खान और उनकी जयप्रदा पर की गई टिप्पड़ी के वारे मे? अदरणीय जया बच्चन जी आप माने या न माने, वास्तव मे ये
दोनों ही घटनाएँ लोकतन्त्र के नाम पर कलंक और काला धब्बा थी। लोकतन्त्र ही नहीं
महिलाओं की मान मर्यादा पर लगातार चोट!! जैसे अनेकों दृष्टांत, मिसाल और नमूने आपके दल मे भरे पड़े है जिनका आप सांसद होने के नाते
प्रतिनिधित्व करती है।
जिस
लोकतन्त्र की बलात हरण की और उसके रक्षण
की दुहाई आप दे रही है पिछले दस बरस से
बंगाल मे उसके चीर हरण, देश सहित सारी दुनियाँ ने देखा और विशेष कर बंगाल के भद्र जनों ने महसूस
किया है। पूर्व मे जिन वामपंथियों द्वारा जो कमीशन खोरी,
चंदा बसूली, चिट फंड घोटालेवजी का अभियान, अपने संगठित गुंडा गिरोह के माध्यम से दशकों तक पश्चिमी बंगाल मे किया
जाता रहा, विश्वास था कि ममता दीदी के आने से उससे आम जनों
को राहत मिलेगी। लेकिन हा!! दुर्भाग्य पिछले दस वर्षों मे कट मनी, टोलाबाजी, गुंडा बसूली पश्चिमी बंगाल मे अब तक बदस्तूर जारी है। किस तरह लोकतान्त्रिक अधिकारों का बलपूर्वक हनन
किया जा रहा है! राजनैतिक मत भिन्नता मे आये दिन हिंसा आम बात है, लोकतान्त्रिक अधिकारों से मिले मताधिकार के प्रयोग पर टीएमसी के गुंडा
तत्व हत्या करने पर भी नहीं चूकते जिसके अनेकों जीते जागते उदाहरण पश्चिमी बंगाल के पिछले दौर के मतदान के दृश्य, समाचार पत्रों और "दृश्य माध्यम" के माध्यम से सर्वविदित है। वर्तमान पदस्थ मुख्यमंत्री किस तरह
सुरक्षा बालों के विरुद्ध संघर्ष के लिये लोगो को भड़का रही है ये आज दिनांक 10 अप्रैल
2021 की घटनाओं से जग जाहिर है। देश और दुनियाँ मे अपनी सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, और बुद्धिजीविक पहचान बनाने वाले
बंगाली भद्रजनों के विरुद्ध जो अभद्र व्यवहार बंगाल मे हो रहा है, राजनैतिक पर्यटन पर पश्चिमी बंगाल पधारे आप जैसे "शुभद्र जन"
उसे क्या जाने??
ऐसा
प्रतीत होता है कि महात्मा गांधी ने जो संदेश तीन बंदरों के माध्यम से हम सब को
दिया था उसमे आपने अपनी सुविधा और सहूलियत अनुसार आवश्यक संशोधनों कर अंगीकार कर
लिया है। जिसके अनुसार "बुरा देख कर भी मौन रहने",
"बुरा सुन कर भी मौन रहने", बुरा बोल कर भी मौन रहने"!! की नीति और रीति अपना
ली हो। लेकिन कदाचित ही कोई सच्चा समाजवादी ममता दीदी के समर्थन और तथाकथित
समाजवादीयों के साथ खड़े होने मे अपने आप को गौरवान्वित महसूस करता हो!!
विजय सहगल