शनिवार, 18 अक्टूबर 2025

मुरुदेश्वर महादेव मंदिर, कर्नाटक

 

"मुरुदेश्वर महादेव मंदिर, कर्नाटक"











8 जुलाई 2025 को बेंगलुरु से बापसी का आज दूसरा  दिन था। उत्तर कन्नड जिले के भटकल नगर तालुका मे स्थित मुरुदेश्वर महादेव पश्चिमी अरब सागर तट पर स्थित, एक ऐतिहासिक स्थल है जिसका वर्णन पौराणिक ग्रन्थों मे मिलता है। कर्नाटक की कंडुका पहाड़ी पर स्थित, इस स्थल पर देश मे सर्वाधिक ऊंची पद्मासन मे विराजित शिव की प्रतिमा बनी है जिसकी ऊंचाई 123 फुट है। शिव प्रतिमा के सामने ही शिव के वाहन नंदी की भी भव्य प्रतिमा परंपरागत तरीके से बनाई गयी है। मंदिर के खुले क्षेत्र और मैदानों मे हरीघास के मैदान बने है जिन का रखरखाब की भी उत्तम व्यवस्था की गयी है।  इस प्रतिमा का निर्माण 2006 मे व्यवसायी और धर्मपरायण समाज सेवी, आर.एन. शेट्टी नामक व्यक्ति ने करवाया  था। पूर्वोन्मुख इस प्रतिमा पर  प्रातः काल की सूर्य रश्मियां जब इस शिव प्रतिमा पर पड़ती हैं तो तीन ओर से अरब सागर से घिरी प्रतिमा की भव्यता और दिव्यता देखते ही बनती है। दूर अनंत मे ऐसा प्रतीत होता है मानों समुद्र और आसमान एकाकार हो गायें हों और मंदिर के  प्रवेश द्वार पर समस्त सृष्टि के स्वामी, स्वयं देवाधिदेव श्री महादेव अपने भक्तों की अगवानी कर रहें हों। एक पौराणिक कथा के अनुसार जब लंकाधिपति राक्षस राजा रावण ने कठिन तपस्या के बाद लंका मे स्थापित करने के लिए शिव से आत्मलिंग प्राप्त किया तो देवताओं ने इस स्थापना को रोकने के लिए छल पूर्वक गणेश जी के बालक रूप मे प्रकट कर संध्या वंदन के दौरान आत्मलिंग को गणेश जी द्वारा धारण करने के लिये दिया लेकिन रावण के पीछे मुड़ने के पूर्व ही गणेश जी ने इसे भूमि पर रख आत्मलिंग को अचल कर दिया। रावण के आत्मलिंग को पुनः उखाड़ने के निष्फल प्रयास के कारण एक टुकड़ा इसी कंडुका पहाड़ी पर गिरा। जो मुरुदेश्वर महादेव के रूप मे एक महत्वपूर्ण देवस्थान बन गया।

मंदिर के पूर्व ही मंदिर का 20 मंज़िला विशाल प्रवेश द्वार या गोपुरम है जिस पर लिफ्ट की सहायता से ऊपर तक जया जा सकता है। इस गोपुरम के दोनों ओर दो हाथी कद विशाल हाथी बने हैं। ऐसी मान्यता है कि ये हाथी गोपुरम की पहरेदारी करते हैं। गोपुरम की इस सर्वोच्च मंजिल से भगवान शिव की प्रतिमा, समुद्र और नगर का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है। गोपुरम की इस मंजिल से भगवान शिव के भव्य दर्शन के साथ समुद्र की विशाल लहरों के अति सूक्ष्म दर्शन मन मे बड़ा रोमांच और कौतूहल उत्पन्न करते हैं। दूर दूर तक समुद्र की लहरे से पैदा हुईं पल पल बदलती  अनेकानेक  ज्योमिति के बदलते आकार प्रकार के दर्शन होते हैं। मंदिर के अंदर की हरियाली प्रकृति के विभिन्न रंगों का सतरंगी इंद्रधनुष उत्पन्न करती हैं जिसे शब्दों मे ब्याँ करना कठिन है। मंदिर के गोपुरम से चारों दिशाओं के दर्शन ऐसे प्रतीत हो रहे थे मानों हम किसी वायुयान मे बैठ कर समुद्र और भगवान शिव की प्रतिमा के साथ पूरे मंदिर परिसर के हवाई दर्शन कर रहे हों। कर्नाटक स्थित भगवान  शिव के पाँच पवित्र और पूजनीय स्थलों यथा धर्मस्थला, नंजनगुड,  गोकर्ण और धारेश्वर मे से मुरुदेश्वर भी एक है। मुख्य मंदिर प्रांगण मे भूकैलासा गुफा भी हैं जिसमे विभिन्न मूर्तियों और प्रतिमाओं के माध्यम से रावण और आत्मलिंग की कहानी को प्रदर्शित किया गया है। यहाँ पर शिवरात्रि का उत्सव बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर हजारों की संख्या मे तीर्थयात्री इस पर्व मे शामिल होकर अपने धार्मिक कर्तव्यों, का निर्वहन कर पूजा अनुष्ठान, कर्नाटक की लोकसांस्कृति और आतिशबाज़ी का आनंद उठाते हैं।                      

मंदिर परिसर मे आकाश से अवतरित गंगा को शिव द्वारा अपनी जटाओं मे उतारने का चित्रण भी एक विशाल प्रतिमा के माध्यम से दर्शाया गया हैं। प्रतिमा के दूसरी ओर कुछ सीढ़ियाँ चढ़ कर एक मंदिर परिसर मे पहुंचा जा सकता है। जिसमे भगवान शिव के अतिरिक्त अन्य देवी देवताओं के मंदिर भी इस परिसर मे हैं। 

मंदिर परिसर मे शीतल जल और स्वल्पाहार के स्टाल भी जगह जगह बनाए गए हैं जहां से आप वस्तुओं को क्रय कर सकते हैं। चूंकि मुर्देश्वर मे  मेरी यात्रा का समय भरी दोपहरी मे थी, फिर भी समुद्र से आने वाली ठंडी हवाएँ मन और शरीर  को शीतलता प्रदान करने वाली थी। सूरज ढलने के बाद के दृश्य तो निश्चित ही अति सुंदर और मनभावन रहते होंगे। मंदिर परिसर मे  प्रसाधन की भी उत्तम व्यवस्था है। दो पहिया वाहन एवं कार आदि रखने के लिए भी निशुल्क पार्किंग की अच्छी व्यवस्था है। यध्यपि मंदिर परिसर के अंदर भी बहुमंजिला इमारत मे ठहरने की व्यवस्था भी होगी फिर भी छोटे से नगर मे समुद्र तट के चारों ओर खाने पीने के रेस्टोरेन्ट बड़ी संख्या मे दिखलाई दिये। कोंकड़ रेल पर बसे इस कस्बे मे मुर्देश्वर नाम का स्टेशन भी हैं।  होटल आदि भी दिखलाई पड़ रहे थे जहां पर ठहरने की पर्याप्त व्यवस्था है। 

इस तरह कर्नाटक के इस छोटे लेकिंग धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से अति महात्व्पूर्ण कस्बे मुर्देश्वर के दर्शन एक विलक्षण अनुभव था।

 

विजय सहगल  

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