शुक्रवार, 29 अगस्त 2025

"ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025, राजस्व के नुकसान के बावजूद ये सौदा सस्ता है।"

 

"ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025, राजस्व के नुकसान के बावजूद ये सौदा सस्ता है।"







पुरातन समय से वर्तमान समय तक सभ्य समाज मे जूएँ को हमेशा नफरत और हिकारत की दृष्टि से देखा जाता रहा है। महाभारत मे कौरवों द्वारा मामा शकुनि के नेतृत्व मे आयोजित ध्युत क्रीडा मे षड्यंत्र पूर्वक युधिष्ठिर द्वारा सबकुछ हार जाना और पांडवों को छल पूर्वक, द्रौपदी को दांव पर लगा कर हारने के प्रसंग से कौन परिचित नहीं होगा? भगवान श्रीकृष्ण ने   श्रीमद्भगवत गीता के अध्याय 10 के  श्लोक संख्या 36 मे भी  छल करने वालों मे जुआँ (ध्युत) का उल्लेख किया हैं। जूएँ के इस कृत को हर देश, हर काल मे निषेध किया है। हमारे यहाँ तो कहावत है कि "जुआँ किसी का न हुआ"। आधुनिक युग मे मुंबई के रतन खत्री के मटके अर्थात सट्टा को कौन नहीं जनता। मुलायम सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल मे राज्य सरकार द्वारा हर घंटे खुलने वाली  लाटरियों मे युवाओं की लत को लोग भूले नहीं होंगे? दिवाली या सहज भले मे ताश के पत्तों की तीन पत्ती या इस तरह के अन्य जूएँ के खेलों मे धन की संलिप्तता के समचर आये दिन मिलते रहते हैं। कर्नाटक के एक विधायक के सी वीरेंद्र, पप्पी की गिरफ्तारी से, सट्टेबाजी और जूएँ से होने वाली कमाई की चका चौंध की बानगी 23 अगस्त 2025 को देखने को मिली। जब  प्रवर्तन निदेशालय ने उनके आवास पर 12 करोड़ रुयपे नगद, 6 करोड़ रुपए के सोने के आभूषण, 10 किलो चाँदी के सामान और महंगी गाड़ियों के साथ अन्य विलासता की वस्तुएं बरामद की।      

लेकिन 21 अगस्त 2025 को मोदी सरकार ने लोकसभा मे ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन विधेयक 2025 को लाकर समाज के प्रबुद्ध वर्ग और गणमान्य नागरिकों की एक बड़ी मांग और चिंता को सांझा करते हुए इस पर प्रतिबंध के शुरुआत कर दी। ऑनलाइन गेमिंग  से पीढ़ित और प्रभावित सामान्य नागरिकों की कष्ट और परेशानी के शीघ्र समाधान हेतु सरकार की उत्कंठा, व्यग्रता और संवेदन शीलता   को  इस बात से समझा जा सकता है कि इस विधेयक पर संसद मे विपक्षी दलों द्वारा संसदीय कार्य मे चल रहे व्यवधान और  तकरार के बावजूद, सरकार ने इसे लोकसभा और राज्यसभा मे शोर-शराबे के बीच पास करा ही लिया। माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को ऑनलाइन गेमिंग (प्रमोशन एवं रेग्युलेशन) बिल 2025 पर  हस्ताक्षर कर अपनी स्वीकृति दे दी। इस कानून के बन जाने पर अब उन पीढ़ितों और भुक्तभोगियों और उनके परिवारों  को राहत मिलेगी जो इस जूएँ के चंगुल मे फंस कर अपनी करोड़ो की संपत्ति लुटा कर बर्वाद हो चुके थे। कहीं कहीं तो इस ऑनलाइन गेमिंग के शिकार लोगो ने अपनी धन संपत्ति हार कर अत्महत्या जैसे निर्दयी, निर्मम और निष्ठुर कदम तक उठाए जो काफी दुःखद और वेदनाशील हैं।

इस अध्यादेश मे भी जुआँ खेलने वाले को अपराधी नहीं बनाते हुए जुआँ खिलाने वालों पर जुर्माना और सजा का प्रावधान किया हैं, क्योंकि पैसे और धनराशि से खेले जाने वाले इस ऑनलाइन गेमिंग मे जुआँ खिलाने वाले  पैसे का हेरफेर कर अनजान व्यक्तियों और लोगों को लूट कर अन्याय पूर्वक धन कमाते हैं। ऑनलाइन गेमिंग कानून 2025 मे जुआँ खिलाने वाले व्यक्ति को 3 साल तक की सजा और 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना या दोनों सजा हो सकती हैं। इस ऑनलाइन गेमिंग के प्रचार प्रसार का विज्ञापन करने वालों को 2 साल तक की सजा और 50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता हैं। एम एस धोनी, विराट  कोहली, रोहित शर्मा, सूर्य कुमार यादव, सुरेश रैना जैसे क्रिकेट के सितारों को देश के लोगों ने भगवान का दर्जा देकर सिर आँखों पर बैठाया था। लेकिन अफसोस, क्रिकेट के इन दिग्गज खिलाड़ियों ने भी येन केन प्रकारेण धन कमाने की लिप्सा और लालसा के चलते अपनी नैतिकताओं और मर्यादाओं को ताक पर रख, देश के भोले भाले नागरिकों को धोखा देने से बाज नहीं आये। अब ऐसे धन लोलुप, लालची और लोभी लोगों से भी छुटकारा मिलेगा जो अपनी चकाचौंध और प्रभाव का इस्तेमाल देश के साधारण लोगो को जूएँ जैसी लत लगा कर अपने चंगुल मे फंसा कर उनकी गढ़ी कमाई को लूटने मे सहभागी रहे थे।

सस्ते इंटरनेट और किफ़ायती और आम सुलभ मोबाइल फोन के चलते जहां एक ओर भारत ने डिजिटल युग मे बड़े तेजी से उन्नति की वहीं रुपए-पैसों का  ऑनलाइन गेमिंग जैसी बुराई भी तेजी से बढ़ने लगी।  रमी, लूडो, कैरम, पजल, साँप सीढ़ी, पोक्कर फैन्टेसी क्रिकेट जैसे अनेकों खेलों को ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर खिलाया  जा रहा था। इन ऑनलाइन खेलों को बनाने वाली आईटी कंपनियां जैसे एस2थ्री, रमी सर्कल,   ड्रीम11, नज़ारा टेकनोलोजी जैसी कंपनियों ने कानूनी की खामियों का फायदा उठाते हुए देश के नागरिकों को जूएँ की लत लगा कर उनके मेहनत और ईमानदारी के पैसे की लूट की। लेकिन इस कानून के लागू होते  ही इन कंपनियों के शेयरों की कीमत शेयर  मार्केट मे 20-25 प्रतिशत से भी नीचे आ गये। हाँ इस कानून के लागू होने का एक दुःखद पहलू, इन कंपनियों मे कार्यरत युवाओं के रोजगार पर संकट के बादल जरूर छा गये। लेकिन इन युवाओं के ज्ञान और कौशल का सकारात्मक उपयोग भी अन्य कंपनियों द्वारा उठाया जाएगा इस मे कोई शंका नहीं।          

ऑनलाइन गेमिंग के मायाजाल को इन आंकड़ों से समझा जा सकता है कि इस जूएँ के कारोबार की वर्तमान राशि दो खरब रुपए हैं। जूएँ के इस उध्योग से वित्त वर्ष 2025 मे सरकार को 30 हजार करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ था जिसमे  20 हज़ार करोड़ से अधिक के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों की प्राप्ति शामिल है। 28% वस्तु और सेवाकर की दर (जीएसटी) के बावजूद इस व्यवसाय मे कहीं कोई कमी नहीं हुई। एक अनुमान के अनुसार 2027 तक इस जूएँ के कारोबार 7.24 खरब  रुपए तक पहुँचने की उम्मीद है। एक अनुमान के अनुसार इस पेशे मे शामिल लोगो की संख्या जहां 2023 मे 50 करोड़ थी वहीं 2025 मे इस धंधे मे पीढ़ित और प्रभावित लोगों की संख्या 58 करोड़ के पार हो चुकी है। वर्तमान मे ऑनलाइन गेमिंग मे 1100 से अधिक कंपनियाँ कार्यरत हैं जिसमे 400 से अधिक स्टार्ट अप कंपनियाँ हैं, जो शायद इस विधेयक के बाद संकट मे आने वाली हैं। 25 हजार करोड़ रुपए से अधिक के  प्रत्यक्ष विदेशी  निवेश और  इतनी बड़ी धनराशि के राजस्व हानि के बावजूद इस क्रूर और अमानवीय धंधे को कानून बनाकर बंद करने के सरकार के प्रयास की सराहना की जानी चाहिए। क्योंकि आम नागरिकों के धन की बर्बादी  और अत्महत्या जैसे कदम उठा कर अपने जीवन से खिलवाड़ करने की  शर्त पर, सरकार को होने वाला राजस्व के नुकसान के बावजूद ये सौदा सस्ता है।

 

विजय सहगल

बुधवार, 27 अगस्त 2025

श्री अष्टविनायक - महागणपती मंदिर, रंजनगाँव (पूना)

 

"श्री अष्टविनायक - महागणपती मंदिर, रंजनगाँव (पूना)"









पूना से 13 जुलाई को प्रस्थान करते समय हमारे पारवारिक मित्र श्याम टंडन एवं श्रीमती आशा टंडन ने राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 75 पर पूना से लगभग 50 किमी॰ दूर रंजनगाँव गणपति मंदिर के दर्शन कर ही आगे बढ़ने का आग्रह किया। उन्होने बताया कि रंजनगाँव मे स्थित गणपति मंदिर उन अष्ट विनायक मंदिरों मे से एक है जिसकी पूना सहित पूरे महाराष्ट्र मे बड़ी मान्यता और महत्व है। महाराष्ट्र सहित देश के श्रद्धालु अष्ट विनायकों के दर्शन हेतु आते हैं, यह मंदिर भगवान गणेश, को समर्पित इस क्षेत्र के  आठ मंदिरों से एक है। मंदिर का वास्तु निर्माण इस तरह किया गया है कि  सूर्य के दक्षिणायान के समय, सूर्य की किरणे सीधे गणेश प्रतिमा पर पड़ती हैं।  भक्तजन पूरी श्रद्धा, प्रतिष्ठा और सम्मान से इस क्षेत्र मे स्थित इन आठों विनायक मंदिरों के दर्शन करना अपनी धार्मिक प्रतिबद्धता और वचनबद्धता मानते हैं। ग्रामीण  अपने परिवार और अन्य ग्रामीण भाई बहिनों के साथ समूह मे अष्ट विनायक के दर्शन हेतु निकलते हैं। रंजनगाँव स्थित गणेश मंदिर के दर्शन का, हमारे मित्र का आग्रह हमारे लिए, एक अनमोल पारितोषिक बन, एक अविस्मरणीय अनुभव रहा।

9वीं और 10वीं शताब्दी के मध्य निर्मित इस मंदिर का निर्माण गाँव के ही एक सुनार परिवार खोल्लम ने कराया था। पूर्वमुखी, भव्य और आकर्षक मुख्य प्रवेश द्वार पेशवा वास्तु शैली मे बनाया प्रतीत होता हैं क्योंकि द्वार के उपर नगरखाना (नगाड़  खाना) बनाया गया है। नगाड  खाना वह स्थान होता है जहां पर बैठ कर संगीतकर मंगल बाद्ध्य अर्थात  नगाढ़े और शहनाई बजाकर मंगल ध्वनि उत्पन्न करते  हैं। बचपन मे मैंने झाँसी स्थित मुरलीमनोहर मंदिर स्थित मंदिर मे महाराष्ट्रीयन सांस्कृति और रीतिरिवाज की पालन करती इस परंपरा मे मंदिर के बाहर शहनाई और नगाड़े को बजते देखा है। ऐसी किवदंती है कि इस मंदिर मे स्थित भगवान विनायक की दस सूंड और 20 भुजाएँ है। इस मंदिर के संबंध मे पुराणों मे एक कहानी प्रचलित हैं जिसके अनुसार ऋषि गृत्समद का पुत्र त्रिपुरासुर जिसे भगवान गणेश के बरदान के फलस्वरूप शक्तिशाली होने और केवल भगवान शिव के द्वारा मोक्ष प्राप्त करने का बरदान था। असुर,  त्रिपुरासुर के उत्पात और अत्याचार पर सभी देवताओं ने दुखी होकर शिव की आराधना की। शिवजी ने अपने ही पुत्र की स्तुति के पश्चात इस त्रिपुरासुर का वध कर उसे मोक्ष प्रदान किया। रंजनगाँव वहीं स्थान है जहां भगवान शिव ने स्वयं गणेश का आशीर्वाद पा कर असुर त्रिपुरासुर का वध किया था।

ऊंचे चबूतरे पर बने मंदिर के आकर्षक प्रवेश द्वार के दोनों ओर सुदर हथिकद मूर्तियाँ मंदिर के प्रवेश द्वार की सुंदरता की भव्यता को और आकर्षक बनाती हैं। मुख्य प्रवेश द्वार के बाद एक अन्य द्वार से मंदिर परिसर मे प्रवेश करते ही सामने मंदिर का सुंदर लकड़ी के नक्काशीदार स्तंभो से निर्मित  आयताकार रंग मंडप दिखाई दिया। प्रातः का समय था श्रद्धालुओं की संख्या ज्यादा नहीं थी। 10-15 मिनिट मे ही हम लोग उस रंग मंडप के द्वार पर पहुँच गए। मार्बल के चमकदार फर्श और उसके उपर लकड़ी के स्तंभों के  उपर चमकदार पोलिश और लकड़ी ही की ही चमकदार छत्त मंदिर के आकर्षण को दिव्य बना रही थी। प्रातः का समय होने के कारण  मंदिर के सेवादार कहीं कहीं मंदिर की सफाई मे रत थे। मंदिर एकदम साफ सुथरा दिखलाई पड़ रहा था। स्टील रेलिंग द्वारा बनाये पथ पर आगे बढ़ते हुए अब हम गर्भ गृह मे थे।

गर्भ गृह मे अष्टविनायक भगवान श्री महागणपती के दर्शन अद्भुद और अविषमरणीय थे। सिंदूरी रंग मे अपने आसन पर विराजित प्रतिमा बड़ी नयनाभिराम और सुखदायक थी। श्री गणेश के सिर पर स्वर्ण जड़ित मुकुट भगवान के साक्षात रूप के दर्शन करा रहा था। आसपास मंदिर की पृष्ठभूमि मे चाँदी के पत्रों पर नक्काशीदार लता पुष्प उकेरे गए थे। सनातन परंपरा के अनुसार मध्य मे सोने का छत्र मुकुट के उपर सुशोभित था। प्रतिमा के दोनों ओर चाँदी के स्तम्भ बने थे जिनको अर्ध बलयाकार ने,  दोनों स्तंभो से जोड़ कर सिंहासन का रूप दिया गया था। कुछ क्षण महागणपती के एकटक दर्शन कर, प्रसाद लिया और उनको प्रणाम कर आगे बढ़े। मुख्य मंदिर परिसर के चारों ओर खुला आँगन था। खुला क्षेत्र  जो मंदिर के दाहिनी तरफ ज्यादा और बाएँ तरफ कम था। खुले रास्ते के दूसरी तरफ लंबे बरमादे बने थे, जहां पर दूर क्षेत्रों से आई हुई टोलियाँ महागणपती की स्तुति करती हुई भजन गा रही थीं।  जबकि विपरीत दिशा मे मंदिर के कार्यालय और अन्य कमरे थे जहां से दान आदि देने और प्रसाद ग्रहण करने की व्यवस्था थी। मंदिर के पीछे विशाल हाल बनाया गया था जहां शायद प्रवचन या अन्य धार्मिक समारोह करने की व्यवस्था थी। पीछे ही एक पानी की अत्यंत प्राचीन  बावड़ी थी जिसका जल श्रद्धालुओं द्वारा उपयोग मे लाया जा रहा था। सभा कक्ष मे एक तरफ पूना के आसपास बने अष्टविनायक  के आठों मंदिर का सड़क मानचित्र भी एक बड़े से सूचना पटल पर लगाया गया था जिसमे अष्टविनायक  मंदिरों की एक दूसरे से दूरी और अन्य सूचनाएँ दर्शाई गई थी।                  

मंदिर की प्रदक्षिणा कर  पीछे बने निकासी द्वार से होकर जब हम निकले तो निकासी पथ के दोनों ओर ग्रामीण परिवेश की झाँकियाँ यथा किसान बैल गाड़ी, हल जोतता किसान, गौ पालन आदि की जागृत प्रतिमाएँ बनाई गयी थी और साथ साथ सुंदर फूल पौधों की फुलवारी बनायी गयी थी। प्रायः प्रसाधन सुविधा के आभाव के विपरीत यहाँ यह सुविधा और शीतल जल की  उपलब्धता  थी। कुछ समय स्वल्पाहार, चाय आदि ग्रहण कर हम अगले पढ़ाव की ओर बढ़ चले।

गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनायें, जय श्री गणेश!!, जय श्री अष्ट विनायक!!  

विजय सहगल  

         

शनिवार, 23 अगस्त 2025

पाकिस्तान का फ़ेल फील्ड मार्शल, ज़ालिम जनरल

 

"पाकिस्तान का फ़ेल फील्ड मार्शल, ज़ालिम जनरल आसिम मुनीर"






22 अप्रैल 2025 को पहलगाम मे पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा पर्यटकों के नरसंहार के बाद भारत की बहादुर सेना और सुरक्षाबलों द्वारा 6-7 मई 2025 को किये गये ऑपरेशन सिंदूर के अंतर्गत पाकिस्तान के अंदर घुस कर नौ आतंकवादी अड्डों को मिट्टी मे मिलाकर नेस्तनाबूद कर दिया। यही नहीं भारतीय जांबाज वायु सेना ने पाकिस्तान के 13 हवाई अड्डों को भी तवाह कर पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र को तहस-नहस कर दुनियाँ को अपनी सैन्य ताकत और तकनीकी शक्ति का लोहा मनवाया। इस घोर पराजय के बावजूद भी पाकिस्तान का दुर्भाग्य देखिये कि इस फ़ेल और असफल जनरल ने पाकिस्तानी सरकार पर दबाव बनाकर  स्वयं को  प्रोन्नति दिलवा,  फील्ड मार्शल घोषित करवा दिया। पाकिस्तान के इस स्वयं भू फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की हीन भावना और तुच्छ मानसिकता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान मे आज भी लाखों हिन्दू नागरिकों के बावजूद, देश का सेना प्रमुख, जनरल मुनीर देश के सार्वजनिक मंच से देश के  नागरिकों के बीच भेद भाव भरे वक्तव्य देता हैं। 17 अप्रैल 2025 को इस्लामाबाद मे प्रवासी पाकिस्तानियों की ओवरसीज कन्वेंशन 2025 को संबोधित करते हुए उसने अकारण ही हिंदुओं से श्रेष्ठता का बखान करते हुए कहा कि, "हम हर संभव क्षेत्र मे हिंदुओं से अलग है, हमारा धर्म अलग है, हमारे रीति रिवाज़ अलग हैं, हमारी संस्कृति अलग है और हमारी सोच अलग है, हमारी महत्वाकांक्षाएं अलग है। यह दो राष्ट्रों की नींव  थे।" विदित हो कि जिन्ना और  इस विक्षिप्त चित्त फील्ड मार्शल के दो राष्ट्र का सिद्धान्त कितना असफल और अव्यवहरिक थी कि 1971 मे अपने ही बहुसंख्यक इस्लामी जनसंख्या  के बावजूद पूर्वी पाकिस्तान, बांग्लादेश के रूप मे क्यों अलगा होता? इसका कारण स्पष्ट है कि इस फील्ड मार्शल की सोच, कथनी-करनी  और इस्लाम की शिक्षाओं मे जमीन आसमान का अंतर है। कोई बड़ी बात नहीं मुल्ला मुनीर की यही स्वेच्छाचारिता, सनकी और सिरफिरापन, बलूचिस्तान प्रांत को बांग्लादेश की राह पर अग्रसर कर शीघ्र, पाकिस्तान से अलग करेगा। जब  देश के सेना प्रमुख होते हुए भी अपने ही देश के दूसरे धर्मावलंबि हिन्दुओ, सिक्खों, बौद्धो और इसाइर्यों के प्रति इतना पूर्वाग्रह, ईर्ष्या, डाह  और जलनभरी सोच हो तो उस सेनाप्रमुख आसिम मुनीर की  अधम, नीच और घृणास्पद सोच का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। अपने ही देश के नागरिकों के प्रति ऐसी घटिया मानसिकता और घिनौनी सोच रखने वाले राष्ट्र प्रमुख के चलते कोई राष्ट्र कैसे उन्नति, प्रगति और विकास के पथ पर आगे बढ़  सकता है? यही कारण है कि पाकिस्तान के धर्मांध राष्ट्र नेताओं के कारण ही आज पाकिस्तान दाने-दाने को मुंहताज है और भुखमरी के कगार पर खड़ा है। जब सेना प्रमुख की ऐसी मूढ़ सोच हो उस देश की  शिक्षा, आधुनिक विज्ञान, उन्नति और औध्यगिक विकास का क्या हाल होगा, इसको वर्तमान पाकिस्तान को देख कर भलीभाँति समझा जा सकता है। ऐसी सोच और मानसिकता, आसिम मुनीर की कुंठा, हीन भावना, निराशा और हताशा को दर्शाती  है।

अभी हाल ही मे पिछले दिनों 10 अगस्त 2025 को इसी अस्थिरचित्त मार्शल मुनीर ने अमेरिका के फ्लॉरिडा मे अमेरिका मे रह रहे पाकिस्तानी प्रवासियों को संबोधित  करते हुए बहुत ही गैरजिम्मेदारना वक्तव्य दिया। इस कार्यक्रम मे उसने भारत को परमाणु युद्ध की खुली धमकी दी। मुनीर ने कहा, "हम परमाणु शक्ति सम्पन्न देश हैं। अगर हमे लगा कि हम डूब रहे हैं, तो आधी दुनियाँ को अपने साथ ले डूबेंगे। इस तानशाह जनरल ने पहली बार अमेरिका की धरती से किसी तीसरे देश को दी है! जनरल मुनीर के मन मे चल रहे असुरक्षा, अंतर्विरोध, और  उसकी कायराना, बुजदिल और उन्माद से भरी  धमकी को  इसी बात से समझा जा सकता है कि उसने कार्यक्रम मे शामिल होने आये  सभी आगंतुकों के  मोबाइल फोन या ऐसे  किसी भी यंत्र और उपकरण को सभा कक्ष के बाहर जमा करवा लिया था, ताकि उसके वक्तव्य की  ऑडियो या  वीडियो रेकोर्डिंग न हो सकें!!

श्रीमद्भगवत गीता मे आसुरी स्वभाव वाले व्यक्तियों के दुराचरण का वर्णन करते हुए भगवान श्री कृष्ण कहते हैं:-

एतां दृष्टिमवष्टभ्य नष्टात्मानोऽल्पबुद्धयः।
प्रभवन्त्युग्रकर्माणः क्षयाय जगतोऽहिताः।।अध्याय 16 श्लोक 9।। अर्थात

इस मिथ्या ज्ञान को अवलंबन करके जिनका स्वभाव नष्ट हो गया है, तथा जिनकी बुद्धि मंद है, वे सबका अपकार करने वाले क्रूरकर्मी मनुष्य, केवल जगत के नाश के लिये ही तत्पर होते है। जो जनरल मुनीर पर पूरी तरह लागू होती हैं। 

ऑपरेशन सिंदूर मे जो कायर पाकिस्तानी    सेना प्रमुख आसिम मुनीर अपने देश के  हवाई अड्डों, आतंकी ठिकानों और युद्धक विमानों की रक्षा न कर सका हो वो भारत जैसे देश को, सिंधु जल संधि पर अपनी मिसाइलों से उड़ाने की धमकी दे रहा हैं। लेकिन भारत के विदेश मंत्रालय ने मुल्ला मुनीर की इन गीदड़ भावकियों का समुचित जबाव देते हुए ठीक ही कहा कि भारत किसी न्यूक्लियर ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा। मंत्रालय ने ये भी कहा कि जिस देश मे सेना, आतंकवादी  समूहों के साथ मिली हो, वहाँ परमाणु कमांड और कंट्रोल की विश्वसनीयता पर संदेह होना स्वाभिक है।

लेकिन जिस  परमाणु सम्पन्न राष्ट्र पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष द्वारा अमेरिका की धरती से खुलेआम परमाणु युद्ध की धमकी देना, एक गंभीर विषय है। जनरल मुनीर की एटोमिक युद्ध की धमकी, भारत के इन  आरोपों की  पुष्टि करते है कि पाकिस्तान के पास एटोमिक शक्ति होना पूरी दुनियाँ के लिये खतरा है। पेंटागन के एक पूर्व सुरक्षा अधिकारी माइकल रूबिन ने, जनरल मुनीर की इस तरह खुले आम परमाणु युद्ध की धमकी पर पाकिस्तान को, एक गैरजिम्मेदार और  दुष्ट देश निरूपित करते हुए जनरल  मुनीर की आलोचना की है। उन्होने मुनीर के बयानों की तुलना आइसिस और ओसामा बिन लादेन से की है। उन्होने जनरल मुनीर को सूट पहने विश्व के सबसे घृणित आतंकवादी ओसामा बिन लादेन की संज्ञा दी।  विदित हो कि मुनीर ने  इस समय अमेरिका की उस धरती से, परमाणु युद्ध की धमकी दी है, जहां दुनियाँ के सबसे जघन्य 9/11 सहित अनेक आतंकी हमलों  मे, पाँच हजार से ज्यादा अमेरीकन नागरिक मारे जा चुके है। ये दुनियाँ सहित अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रूम्प को भी खुली चुनौती है जिनके बुलावे पर जनरल मुनीर इन दिनों अमरीका प्रवास पर हैं।

मुनीर की बाते जितनी लापरवाह, अनुत्तरदायी और गैर जिम्मेदाराना हैं उतनी ही चिंता और परेशानी पैदा करने वाली हैं। पाकिस्तान की वर्तमान व्यवस्था मे भले ही  चुनी हुई शरीफ सरकार है पर सारे फैसले, सेना प्रमुख द्वारा लिये जाते है। परमाणु धमकी का उदाहरण इस बात की पुष्टि से ही परिलक्षित हो रहा है कि परमाणु युद्ध का बटन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के हाथ मे न होकर सेना प्रमुख मुनीर के हाथ मे है जो गंभीर चिंता और परेशानी का कारण है।

भारत, अमेरिका, यूरोपियन देशों सहित दुनियाँ के अन्य  देशो को आगे आकार पाकिस्तान और उसकी सेना के जनरल मुनीर के परमाणु युद्ध की धमकी भरे इस गैरजिम्मेदारना वक्तव्य को गंभीरता से लेते हुए पाकिस्तान को उसकी परमाणु शक्ति संपन्नता से वंचित करने का प्रयास करना चाहिये ताकि दुनियाँ को फिर एक बार परमाणु युद्ध के कगार पर जाने से बचाया जाय।

विजय सहगल  

मंगलवार, 19 अगस्त 2025

राहुल के आरोपों पर सर्वोच्च सवाल?

 

"राहुल के आरोपों पर सर्वोच्च सवाल?"




संसद मे विपक्ष के नेता राहुल गांधी एक बार फिर विवादों के घेरे मे हैं। 4 अगस्त 2025 को देश की सर्वोच्च नयायालय की पीठ ने राहुल गांधी को भारतीय सेना पर अपमान जनक टिप्पड़ी और चीन द्वारा भारत की  भूमि पर कब्जे के उनके गैरजिम्मेदाराना बयान के लिये जहां एक तरफ लताड़ लगाई वही दूसरी ओर सीमा सड़क संगठन के पूर्व निदेशक  उमाशंकर श्रीवास्तव द्वारा उनके विरुद्ध मानहानि के एक लंबित आपराधिक वाद मे लखनऊ  और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा कर राहत भी दे दी है। विदित हो कि अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान  राहुल गांधी ने 25 अगस्त  2022 को कारगिल की एक सभा को संबोधित  करते हुए उन्होने, गलवान घाटी संघर्ष पर टिप्पड़ी करते हुए आरोप लगाया था कि चीन ने भारत की 2000 वर्ग किमी॰ भूमि पर कब्जा कर लिया। इस संघर्ष मे भारत के 20 सैनिक शहीद हुए थे। उन्होने यह भी आरोप लगाया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल मे हमारे सैनिकों की पिटाई कर रहे है!! राहुल गांधी के ये ब्यान न केवल काफी मर्मांतक, वेदना और आहत करने वाला था अपितु उन सैनिकों का अपमान था जिन्होने वीरता पूर्वक देश के लिये लड़ते हुए अपना आत्मबलिदान कर प्राणों की आहुति दे दी। उस वीडियो को देश के करोड़ों करोड़ देशवासियों ने स्वयं देखा।

देश की सर्वोच्च न्यायालय ने राहुल गांधी के कानूनी सलहकर अभिषेक मनु सिंघवी से तीखे सवाल करते हुए बड़ी आधारभूत टिप्पणी की, कि राहुल गांधी को कैसे पता कि चीन ने भारत की 2000 वर्ग किमी॰ जमीन पर कब्जा कर लिया? चीन द्वारा जमीन कब्जाने का आधार क्या है? चीनी सेना द्वारा भारतीय सैनिकों की पिटाई जैसे आरोपों पर माननीय न्यायालय ने राहुल गांधी के भारतीय होने पर तीखी और सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जब सीमा पर पड़ौसी  देश के साथ युद्ध की स्थिति और तनाव हो तो  कोई सच्चा भारतीय कैसे सेना का अपमान कर ऐसे वक्तव्य दे सकता है? माननीय न्यायाधीशों ने अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर कुछ भी कहने और बोलने पर आपत्ति की। संसद मे विपक्षी दल के मुखिया जैसे संवैधानिक पद रहते हुए, सरकार से सवाल पूंछने  के अपने अधिकार का प्रयोग न कर सोश्ल मीडिया पर सवाल पूंछ सनसनी फैलाना अनुचित और असंगत है। उच्चतम न्यायालय द्वारा उक्त आशय के सवाल पर न केवल राहुल गांधी अपितु सभी राजनैतिक पदों पर बैठे महत्वपूर्ण व्यक्तियों के लिये भी एक संदेश हैं कि "बोलने की आज़ादी के नाम पर बगैर किसी प्रमाण और आधार के आरोप-प्रत्यारोप अनुचित, असंगत और अन्यायपूर्ण है।

चीन द्वारा भारत की भूमि पर कब्जा करने के आरोपों पर राहुल गांधी की गंभीरता को इस बात से समझा जा सकता है कि अक्टूबर 2020 राहुल गांधी ने चीन द्वारा भारत की 1200 वर्ग किमी॰ जमीन कब्जाने का आरोप लगाया, वहीं दिसंबर 2022 मे 2000 वर्ग किमी॰  और अप्रैल 2025 मे 4000 वर्ग किमी भारतीय जमीन को चीन द्वारा कब्जाने का आरोप लगाया। कहने का तात्पर्य यह है कि राहुल गांधी किसी भी आरोप पर संजीदा नहीं रहते। वे बड़े चलताऊ ढंग से स्वयं ही  मामले को उठा कर उसकी विश्वसनीयता पर स्वयं ही प्रश्न चिन्ह खड़ा कर देते हैं जो उचित प्रतीत नहीं होता।     

लेकिन दक्ष और सक्रिय राजनैतिक पंडितों को, माननीय उच्चतम न्यायालय की राहुल गांधी के  विरुद्ध तीखी फटकार और टिप्पणियों पर कोई आश्चर्य नहीं हुआ होगा, क्योंकि ये कोई पहला मौका नहीं था जब, माननीय न्यायालय द्वारा उनके वक्तव्यों  और कथनों पर उनके विरुद्ध सख्त और अप्रिय टिप्पणी या कठोर निर्णय न लिये गए  हों। राहुल गांधी द्वारा पहले भी बिना किसी आधार और सबूतों  के व्यक्तियों, समुदायों और अपने विरोधियों पर  असहज, अशोभिनीय और अपमानजनक टिप्पणियाँ न की हों। राहुल गांधी के इन कृत्यों पर विभिन्न न्यायालयों द्वारा  समय समय पर डांट और फटकार कर माफी मांगने, चेतावनी देने और सजा देने के निर्णय दिये हैं। माननीय पाठकों को स्मरण होगा कि मई 2019 मे "चौकीदार चोर है" पर अदालत को गलत ढंग से उद्धृत करने के लिये सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी थी।

13 अप्रैल 2019 को कर्नाटक के कोलार मे एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि "सभी चोरों के सरनेम मोदी क्यों?" इस  आरोप के विरुद्ध मानहानि के  केस मे सूरत के एक न्यायालय ने 23 मार्च 2023 को राहुल गांधी  को दोषी ठहराते हुए  दो साल की सजा सुनाई  जिसके कारण उनकी संसद सदस्यता समाप्त हो गयी थी पर,  उच्चतम न्यायालय द्वारा रोक के बाद अभी मामला कोर्ट मे लंबित है।

14 दिसम्बर 2018 मे  राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद पर राहुल गांधी द्वारा बेबुनियाद, निरधार और तथ्यहीन आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय मे किसी भी तरह की अनियमिताओं और भ्रष्टाचार से इंकार किया। 14 नवंबर 2019 को अपने निर्णय पर पुनर्विचार की याचिका को खारिज करते हुए अपने निर्णय को कायम रक्खा। इस तरह राहुल गांधी के झूठे आरोपों की हवा निकाल दी। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय पर सरकार ने  इसी बात का संज्ञान लेते हुए राहुल गांधी को संसद के भीतर और बाहर जनता से माफी मांगने की मांग की थी। आरएसएस पर आरोप, स्वतन्त्रता सेनानी वीर सावरकर पर अशिष्ट टिप्पड़ी, अमित शाह को मर्डर अभियुक्त जैसे  अनेक मामले हैं, जब राहुल गांधी ने आरोप लगा कर सनसनी फैला कर वाहवाही लूटी पर कभी कोई प्रमाण आदि नहीं दिये। राहुल का ये स्वभाव है,  लोकतन्त्र मे बोलने की आज़ादी के नाम पर आरोप लगाओ और भाग जाओ।                  

राहुल गांधी जैसे जिम्मेदार नेता चीनी सेना के सैनिकों द्वारा भारतीय "सैनिकों की पिटाई" जैसे गली छाप, ओछे  शब्दो का उपयोग कैसे कर सकते है? बड़ा खेद और अफसोस है नेहरू-गांधी जैसे देश के सबसे बड़े प्रभावशाली राजनैतिक परिवार के सदस्य होने के नाते राहुल गांधी, क्या  अपने आप को देश के कानून और संविधान से उपर समझते हैं? लेकिन लोकतन्त्र का तक़ाज़ा हैं कि राहुल गांधी को संवैधानिक संस्थाओं, लोगों, समूहों के स्वाभिमान और  सम्मान को ठेस पहुंचाये बिना, उनके विरुद्ध अनर्गल, आधारहीन और ओछे आरोप लगाने से बचना चाहिये। माननीय सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी राहुल गांधी सहित उन सभी नेताओं को चेतावनी है कि बिना किसी आधार और प्रमाण के गैरजिम्मेदाराना टिप्पणी से बचें।

विजय सहगल

शुक्रवार, 15 अगस्त 2025

मेंगलुरु-दक्षिण कर्नाटक का एक महत्वपूर्ण समुद्र तटीय शहर

"मेंगलुरु-दक्षिण कर्नाटक का एक महत्वपूर्ण समुद्र तटीय शहर"










7 जुलाई 2025 को बेंगलुरु से चल कर  वाया श्रवनवेलगोला, भ्रमण के पश्चात 362 किमी॰ दूर मेंगलुरु पहुँचते पहुंचते शाम के लगभग 6 बज चुके था। लंबी यात्रा और श्रवनवेलगोला मे भगवान बहुवली के दर्शन के लिए पहाड़ की 650 सीढ़ियाँ चढ़ने-उतरने की थकावट तो हो ही  रही थी।  पर फिर ये सोच कर कि विश्राम तो रात मे हो जायेगा क्यों ने अभी शाम को ही मेंगलुरु के प्रसिद्ध भगवान शिव को समर्पित "कादरी मंजूनाथ मंदिर" के दर्शन के साथ "श्री वेंकट रमन मंदिर" के दर्शन के लक्ष्य को हांसिल करने का प्रयास किया जाय। होटल मे सामान आदि, रखने और कुछ ही देर मे पुनः तरोताजा हो कादरी मंजूनाथ मंदिर की ओर प्रस्थान किया। शहर अजनबी था मंदिर कुछ किमी॰ ही दूर था, लेकिन व्यवस्थाएं अच्छी थी। घनी भीड़-भाड़ से होते हुए, पार्किंग मे कार को खड़ा कर तुरंत ही मंदिर परिसर मे थे। हल्के आसमानी रंग मे रंगा प्रवेश द्वार की सीढ़ियाँ इस बात का अहसास करा रहीं थीं कि मंदिर किसी छोटी पहाड़ी पर स्थित है।   विशाल प्रांगण के मध्य मे सफ़ेद रंग मे रंगा आयताकार, मुख्य मंदिर बड़ा ही भव्य और आकर्षक था। मंदिर के चारों ओर बना बरामदा और मंदिर,  कर्नाटक के समुद्र तटीय वास्तु शैली मे बनाया गया जो पारंपरिक दक्षिण भारतीय शैली से अलग था। मेंगलुरु जिला कर्नाटक राज्य के दक्षिण मे स्थित एक समुद्र तटीय क्षेत्र है लेकिन यहाँ की जीवन शैली मे कन्नड के साथ तुलु और कोकणी भाषा भी बोली जाती हैं इसिलिये इस समुद्रतटीय इलाके का रहन सहन, खान पान और परिधान भी शेष कर्नाटक से कुछ अलग हैं। लोग बड़े सरल, सहज, मिलनसार और सहयोगात्मक मिजाज के    हैं। यहाँ के मंदिरों का वास्तु भी दक्षिण भारतीय मंदिर से कुछ अलग है जिसे विजयनगरी वास्तु शैली कहा जाता है।  कादरी  मंजूनाथ मंदिर की तरह ही मंदिर के विशाल आँगन के बीच मुख्य मंदिर आयताकार या वर्गाकार मे बनाये गए हैं। मेंगलुरु कर्नाटक राज्य का एक अति महत्वपूर्ण समुद्र तटीय जिला हैं जिसकी सीमाएं जहां एक ओर दक्षिण मे  केरल और उत्तर मे  गोवा के कोकंकण क्षेत्र  और महाराष्ट्र से लगती हैं।

हल्के आसमानी रंग मे रंगे कादरी मंजूनाथ मंदिर एक छोटी, ऊंची पहाड़ी पर स्थित है जिन्हे  कदरी पहाड़ियाँ कहा जाता है। मेंगलुरु स्थित इस मंदिर का निर्माण  10-11 वी शताब्दी मे अलोप राजवंश के राजा कुंडवर्मा ने कराया था। मंदिर के प्रवेश द्वार पर ही आदमक़द भगवान शिव की दोनों और स्वर्ण रंग मे त्रिशूल, गदा और शंख लिए रक्खी गयी थी। ऐसा कहा जाता है कि भगवान परशुराम ने क्षत्रियों का वध करने के पश्चात, अपने फरसे को समुद्र मे फेंक कर समस्त भूमि मुनि कश्यप को दान कर दी और रहने के लिए एक स्थान के लिये  भगवान शिव से प्रार्थना की। इन कदरी की पहाड़ियों मे तपस्या करते हुए भगवान शिव और पार्वती  ने मंजूनाथ के रूप मे  परशुराम को दर्शन दिये। इसलिए ही इसे कदरी मंजूनाथ मंदिर के रूप मे प्रसिद्धि मिली। इस मंदिर मे मकर संक्रांति पर नौ दिवसीय वार्षिक महोत्सव और विशाल भंडारे का योजन किया जाता है। मुख्य मंदिर की प्रदक्षिणा कर मंदिर मे भगवान मंजूनाथ के अद्भुद दर्शन कर अपने को कृतार्थ किया। हिन्दू और बौद्ध धर्म की संयुक्त  संस्कृति के इस मंदिर मे अन्य देवी देवताओं के दर्शन कर हम बीच शहर मे स्थित एक अन्य महत्वपूर्ण मंदिर श्री वेंकटरमना मंदिर की ओर बढ़े।

श्री वेंकटरमना मंदिर शहर के बीचों बीच रेल्वे स्टेशन के करीब हैं। अपने चौपहिया वाहन से चलने के कुछ फायदे और कुछ नुकसान भी हैं। पार्किंग की समस्या तो थी लेकिन कुछ वाहनों से रिक्त हुई जगह मे अपनी कार को पार्क कर दर्शन हेतु मंदिर मे प्रवेश किया। घनी भीड़ और यातायात के वाहनों के बीच मंदिर मे प्रवेश किया। बाहर से तो मंदिर का भवन साधारण लेकिन अंदर प्रवेश करते ही मंदिर के अद्भुद छटा देख कर मन प्रसन्न हो गया। मंदिर की वस्तु शैली भी कदरी मंजूनाथ मंदिर की तरह ही थी पर गलियारे के बीच मे बने मंदिर भवन के चारों ओर लकड़ी की छोटी-छोटी फ़्रामों से मंदिर का आयताकार संरचना बनायी गयी थी। लकड़ी के हर फ्रेम पर पुरानों, महाभारत और रामचरित मानस के प्रसंगों की तस्वीर उकेरी गई थी। हर फ्रेम पर उस प्रसंग का संक्षित विवरण भी कन्नड और हिन्दी मे  लिखा था। हर पट्टिका पर उकेरी गया धार्मिक प्रसंग अपनी सुंदर कलात्मक शैली और के लिये जाना जाएगा। इन पट्टिकाओं मे शबरी का प्रसंग, कृष्ण सुदामा प्रसंग, रामवन गमन प्रसंग, कृष्ण कथाओं के अनेक प्रसंग भी उकेरे गए हैं। भगवान वेंकट रमण की चाँदी की प्रतिमा अप्रीतिम और नयनाभिराम थी। सुंदर गहोनों और फूलों की सजावट ने पूरे दृश्य को अविषमरणीय बना दिया था। मंदिर के बाहर दीप स्तम्भ सहित पूरे मंदिर परिसर मे दीपों की श्रंखला बनायी गयी थी जो शायद विशेष अवसरों पर प्रकाशित की जाती होगी। प्रत्येक आगंतुक श्रद्धालु के सिर पर चाँदी के मुकुट को रक्ख पुरोहित  ईश्वर आशीर्वाद को प्रदान कर रहे थे जो प्रायः दक्षिण भारत, विशेषकर आंध्रा, तेलंगाना और कर्नाटक राज्य के मंदिरों मे यह पृक्रिया अपनाई जाती है। यूं तो मंगलुरु मे कुछ चर्च और मंदिर शेष थे, लेकिन समय आभाव के कारण न जा सका। चूंकि मेरी काफी लंबी यात्रा समुद्र तट से होकर होनी थी इसलिये मेंगलुरु के समुद्र बीचों की भी अनदेखी हुई।   

मंदिर परिसर की प्रदक्षिणा पश्चात अब समय था कुछ पेट पूजा करने का। हमारे एक मित्र ने मेंगलुरु की पब्बास आइस क्रीम का सेवन की सलाह भी दी थी जो ठीक ठाक ही थी। भोजन और आइस क्रीम के बाद रात के दस बज चुके थे। कल सुबह आगे की यात्रा भी शुरू करनी थी इसलिए अपने होटल मे रात्री विश्राम हेतु रवाना हो गए।

विजय सहगल       

               

 

 


शुक्रवार, 8 अगस्त 2025

राहुल गांधी का चुनावी एटम बॉम्ब

 

"राहुल गांधी का चुनावी एटम बॉम्ब"






जब से भारत के चुनाव आयोग ने बिहार चुनाव के पूर्व, चुनाव सूची मे विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य आरंभ किया है, देश के सभी विपक्षी दलों की तोपों के मुंह चुनाव आयोग की तरफ मुड़  गये। कॉंग्रेस के युवा नेता ने तो एक कदम आगे बढ़ 1 अगस्त को चुनाव आयोग पर सरकार के पक्ष मे वोट चोरी का आरोप लगा कर, चुनाव आयोग को खुल्लम खुल्ला  धमकाते हुए इस चोरी के पुख्ता प्रमाण, सबूत और साक्ष्य रूपी एटम बॉम्ब फोड़ने की चेतावनी दी। उन्होने वर्तमान मे हिंदुस्तान मे चुनाव आयोग नाम की कोई चीज के अस्तित्व को नकारते हुए, आगाह किया कि उनके धमाके के बाद तो चुनाव आयोग के अस्तित्व ही नज़र नहीं आयेगा। राहुल गांधी पूर्व मे भी इस तरह के सनसनी खेज वक्तव्य देते रहे हैं। विदित हो कि 8 नवंबर 2016 मे मोदी सरकार द्वारा लागू की गयी नोट बंदी पर भी राहुल गांधी ने 9 दिसम्बर  2016 मे  अपने उत्तेजक वक्तव्य मे, लोक सभा मे बोलने के मौका देने पर भूकंप आने की चेतावनी दी थी और जब वे लोक सभा मे बोले तो, अपने वक्तव्यों के भूकंप से धरती तो दूर, एक तिनका भी नहीं हिला सके। उनके  सनसनी खेज "एटम बॉम्ब" के वक्तव्य पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चुटकी लेते हुए सही ही कहा कि यदि राहुल गांधी के पास सौ प्रतिशत पुख्ता सबूतों का "एटम बम" हैं तो उसका परीक्षण तुरंत करिए और सारे प्रमाण देश के सामने रखिये। लेकिन सच्चाई यह हैं कि न तो उनके पास कोई तथ्य हैं, न सबूत। सनसनी फैलाना उनकी पुरानी आदत रही है।           

राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के अधिकारियों को डराते और धमकाते हुए कुछ उसी लहजे मे कहा जैसे नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तानी आतंकवादियों को चेताते हुए कहा था। उन्होने चुनाव आयोग के अधिकारियों से कहा, जो भी ये काम कर रहे है, टॉप से बॉटम तक, याद रखिये हम आपको छोड़ेंगे नहीं! ये देश के खिलाफ साजिश है। उन्होने कहा कि आप रिटायार्ड हों या कहीं भी हों, हम आपको ढूंढकर निकाल लेंगे! देश की सबसे पुराने दल कॉंग्रेस के नेता द्वारा, देश की संवैधानिक संस्था के अधिकारियों के विरुद्ध इस तरह की भाषा का प्रयोग करना  करना उचित है? वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग ने कहा, कि राहुल गांधी चुनाव आयोग पर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। आयोग के कर्मचारियों को धमकाने वाली ये भाषा निंदनीय है। आयोग ने कहा कि वह ऐसे गैर जिम्मेदाराना बयानों को नज़र अंदाज़ करता है और निष्पक्ष व पारदर्शी रूप से अपना काम सतत रूप से करता रहेगा। आयोग ने इस बात का भी उल्लेख किया कि उसके द्वारा 12 जून को भेजा  गया मेल और पत्र के प्रतिउत्तर अब तक अप्राप्त है। कॉंग्रेस या राहुल गांधी  द्वारा आयोग को कभी कोई शिकायत नहीं की गयी।

तीन-तीन प्रधानमंत्रियों के घर चाँदी की चम्मच ले कर पैदा हुए माननीय राहुल गांधी  अब तक भारतीय लोकतन्त्र और भारतीय मतदाताओं की ताकत और मिजाज को शायद नहीं समझ पाये? इसलिये ही राहुल गांधी ने राजधानी दिल्ली मे कॉंग्रेस के वार्षिक कानूनी सम्मेलन को संबोधित करते हुए चुनाव आयोग पर 2014 के गुजरात विधान  चुनाव पर  सवाल उठाते हुए कहा कि, किसी एक पार्टी (भाजपा) की भारी मतों से विजय का रुझान शक पैदा करता हैं। शायद उन्हे स्मरण नहीं कि आपात काल के बाद जिस कॉंग्रेस की 1977 लोक सभा चुनाव मे सदस्यों की संख्या 350 से घट कर 153 रह गयी थी उन्ही  श्रीमती इंद्रा गांधी   को 1980 मे मतदाताओं ने भारतीय नागरिकों पर, आपातकाल मे किए गये  तानाशाही पूर्ण रवैये को भुला कर उन्हे फिर सत्ता सौंपी। ठीक इसी तरह भारत के ये मतदाता ही थे जिन्होने,  श्रीमती इन्दिरा गांधी की नृशंस हत्या के बाद राजीव गांधी से सहानभूति रखते हुए  उनकी सरकार को  दो तिहाई से भी अधिक सीटें (404) देकर कॉंग्रेस को सत्ता सौंपी। तब किसी नेता या दल ने कॉंग्रेस की विजय पर कोई शक, संशय या संदेह व्यक्त नहीं किया, आज राहुल गांधी गुजरात और अन्य प्रदेश के उन्ही मतदाताओं पर शक व्यक्त कर सवाल उठाते हैं जो न्यायोचित प्रतीत नहीं होता।

चुनाव आयोग पर मिथ्या आरोप लगाने मे कॉंग्रेस ही नहीं बिहार की राजद के नेता तेजस्वी यादव भी पीछे  नहीं रहे। शनिवार, 2 अगस्त को जब चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित की तो उन्होने एक सार्वजनिक कार्यक्रम मे चुनाव आयोग पर वोटर लिस्ट मे अपना नाम न होने का गंभीर आरोप लगाते हुए सवाल किया कि अब वे कैसे चुनाव लड़ेंगे? जब लिस्ट से राजद के मुख्यमंत्री दल के प्रत्याशी का नाम हटाया जा सकता है तो जनसमान्य के साथ क्या होगा? लेकिन कुछ ही समय बाद ही  चुनाव आयोग ने तेजस्वी यादव के मिथ्या आरोप के दावे का खंडन करते हुए मतदाता सूची क्रमांक 416 मे उनके नाम होने की पुष्टि की। तेजस्वी यादव ने  प्रेस कॉन्फ्रेंस मे जिस एपेक संख्या दर्ज़ कर, चुनाव आयोग पर अपना नाम मतदाता सूची मे न होने का आरोप लगाया था उस एपेक संख्या के आधार पर राजनैतिक विरोधियों ने उन पर दो मतपत्र रखने के आरोप लगाते हुए जांच की मांग कर दी और तेजस्वी यादव पर "होम करते हाथ जलना" वाली   कहावत को चरितार्थ कर दिया।  विदित हो कि दो मतदातापत्र रखना कानूनन अपराध है।   

चुनाव के दौरान राजनैतिक दलों द्वारा एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाना स्वाभाविक हैं लेकिन देश की चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर निरर्थक, बेबुनियाद और मिथ्या आरोप लगाना उचित नहीं। चुनाव आयोग जैसी संस्था की ये कानूनी और नैतिक ज़िम्मेदारी हैं कि वो देश मे स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी  चुनाव कराना सुनिशिचित करे। इस हेतु चुनाव आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य करने पर सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी सहमति प्रदान कर दी ताकि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव की प्रक्रिया सम्पन्न की जा सके। इसलिये ये देश के सभी नागरिकों और राजनैतिक दलों की भी ज़िम्मेदारी है कि वे चुनाव आयोग को इस हेतु अपना सहयोग प्रदान करें।

विजय सहगल