"ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025, राजस्व के नुकसान के बावजूद ये सौदा सस्ता है।"
पुरातन समय से वर्तमान समय तक सभ्य समाज मे
जूएँ को हमेशा नफरत और हिकारत की दृष्टि से देखा जाता रहा है। महाभारत मे कौरवों
द्वारा मामा शकुनि के नेतृत्व मे आयोजित ध्युत क्रीडा मे षड्यंत्र पूर्वक
युधिष्ठिर द्वारा सबकुछ हार जाना और पांडवों को छल पूर्वक,
द्रौपदी को दांव पर लगा कर हारने के प्रसंग से कौन परिचित नहीं होगा?
भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवत गीता के
अध्याय 10 के श्लोक संख्या 36 मे भी छल करने वालों मे जुआँ (ध्युत) का उल्लेख किया
हैं। जूएँ के इस कृत को हर देश, हर काल मे निषेध
किया है। हमारे यहाँ तो कहावत है कि "जुआँ किसी का न हुआ"। आधुनिक युग
मे मुंबई के रतन खत्री के मटके अर्थात सट्टा को कौन नहीं जनता। मुलायम सिंह के
मुख्यमंत्रित्व काल मे राज्य सरकार द्वारा हर घंटे खुलने वाली लाटरियों मे युवाओं की लत को लोग भूले नहीं
होंगे? दिवाली या सहज भले मे ताश के पत्तों की तीन
पत्ती या इस तरह के अन्य जूएँ के खेलों मे धन की संलिप्तता के समचर आये दिन मिलते
रहते हैं। कर्नाटक के एक विधायक के सी वीरेंद्र,
पप्पी की गिरफ्तारी से, सट्टेबाजी और
जूएँ से होने वाली कमाई की चका चौंध की बानगी 23 अगस्त 2025 को देखने को मिली। जब प्रवर्तन निदेशालय ने उनके आवास पर 12 करोड़
रुयपे नगद, 6 करोड़ रुपए के सोने के
आभूषण, 10 किलो चाँदी के सामान और महंगी गाड़ियों
के साथ अन्य विलासता की वस्तुएं बरामद की।
लेकिन 21 अगस्त 2025 को मोदी सरकार ने
लोकसभा मे ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन विधेयक 2025 को लाकर समाज के
प्रबुद्ध वर्ग और गणमान्य नागरिकों की एक बड़ी मांग और चिंता को सांझा करते हुए इस
पर प्रतिबंध के शुरुआत कर दी। ऑनलाइन गेमिंग
से पीढ़ित और प्रभावित सामान्य नागरिकों की कष्ट और परेशानी के शीघ्र समाधान
हेतु सरकार की उत्कंठा, व्यग्रता और
संवेदन शीलता को इस
बात से समझा जा सकता है कि इस विधेयक पर संसद मे विपक्षी दलों द्वारा संसदीय कार्य
मे चल रहे व्यवधान और तकरार के बावजूद,
सरकार ने इसे लोकसभा और राज्यसभा मे शोर-शराबे के बीच पास करा ही लिया। माननीय राष्ट्रपति
श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को ऑनलाइन गेमिंग (प्रमोशन एवं रेग्युलेशन)
बिल 2025 पर हस्ताक्षर कर अपनी स्वीकृति
दे दी। इस कानून के बन जाने पर अब उन पीढ़ितों और भुक्तभोगियों और उनके परिवारों को राहत मिलेगी जो इस जूएँ के चंगुल मे फंस कर
अपनी करोड़ो की संपत्ति लुटा कर बर्वाद हो चुके थे। कहीं कहीं तो इस ऑनलाइन गेमिंग
के शिकार लोगो ने अपनी धन संपत्ति हार कर अत्महत्या जैसे निर्दयी,
निर्मम और निष्ठुर कदम तक उठाए जो काफी दुःखद और वेदनाशील हैं।
इस अध्यादेश मे भी जुआँ खेलने वाले को
अपराधी नहीं बनाते हुए जुआँ खिलाने वालों पर जुर्माना और सजा का प्रावधान किया हैं,
क्योंकि पैसे और धनराशि से खेले जाने वाले इस ऑनलाइन गेमिंग मे जुआँ खिलाने
वाले पैसे का हेरफेर कर अनजान व्यक्तियों
और लोगों को लूट कर अन्याय पूर्वक धन कमाते हैं।
ऑनलाइन गेमिंग कानून 2025 मे जुआँ खिलाने वाले
व्यक्ति को 3 साल तक की सजा और 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना या दोनों सजा हो सकती
हैं। इस ऑनलाइन गेमिंग के प्रचार प्रसार का विज्ञापन करने वालों को 2 साल तक की
सजा और 50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता हैं। एम एस धोनी,
विराट कोहली,
रोहित शर्मा, सूर्य कुमार यादव,
सुरेश रैना जैसे क्रिकेट के सितारों को देश के लोगों ने भगवान का दर्जा देकर सिर
आँखों पर बैठाया था। लेकिन अफसोस, क्रिकेट के इन
दिग्गज खिलाड़ियों ने भी येन केन प्रकारेण धन कमाने की लिप्सा और लालसा के चलते
अपनी नैतिकताओं और मर्यादाओं को ताक पर रख,
देश के भोले भाले नागरिकों को धोखा देने से बाज नहीं आये। अब ऐसे धन लोलुप,
लालची और लोभी लोगों से भी छुटकारा मिलेगा जो अपनी चकाचौंध और प्रभाव का इस्तेमाल
देश के साधारण लोगो को जूएँ जैसी लत लगा कर अपने चंगुल मे फंसा कर उनकी गढ़ी कमाई
को लूटने मे सहभागी रहे थे।
सस्ते इंटरनेट और किफ़ायती और आम सुलभ मोबाइल
फोन के चलते जहां एक ओर भारत ने डिजिटल युग मे बड़े तेजी से उन्नति की वहीं
रुपए-पैसों का ऑनलाइन गेमिंग जैसी बुराई
भी तेजी से बढ़ने लगी। रमी,
लूडो, कैरम,
पजल, साँप सीढ़ी,
पोक्कर फैन्टेसी क्रिकेट जैसे अनेकों खेलों को ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर खिलाया
जा रहा था। इन ऑनलाइन खेलों को बनाने वाली
आईटी कंपनियां जैसे एस2थ्री, रमी सर्कल,
ड्रीम11,
नज़ारा टेकनोलोजी जैसी कंपनियों ने कानूनी की खामियों का फायदा उठाते हुए देश के
नागरिकों को जूएँ की लत लगा कर उनके मेहनत और ईमानदारी के पैसे की लूट की। लेकिन
इस कानून के लागू होते ही इन कंपनियों के शेयरों
की कीमत शेयर मार्केट मे 20-25 प्रतिशत से
भी नीचे आ गये। हाँ इस कानून के लागू होने का एक दुःखद पहलू,
इन कंपनियों मे कार्यरत युवाओं के रोजगार पर संकट के बादल जरूर छा गये। लेकिन इन
युवाओं के ज्ञान और कौशल का सकारात्मक उपयोग भी अन्य कंपनियों द्वारा उठाया जाएगा
इस मे कोई शंका नहीं।
ऑनलाइन गेमिंग के मायाजाल को इन आंकड़ों से
समझा जा सकता है कि इस जूएँ के कारोबार की वर्तमान राशि दो खरब रुपए हैं। जूएँ के
इस उध्योग से वित्त वर्ष 2025 मे सरकार को 30 हजार करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ था जिसमे
20 हज़ार करोड़ से अधिक के प्रत्यक्ष और
अप्रत्यक्ष करों की प्राप्ति शामिल है। 28% वस्तु और सेवाकर की दर (जीएसटी) के बावजूद
इस व्यवसाय मे कहीं कोई कमी नहीं हुई। एक अनुमान के अनुसार 2027 तक इस जूएँ के
कारोबार 7.24 खरब रुपए तक पहुँचने की
उम्मीद है। एक अनुमान के अनुसार इस पेशे मे शामिल लोगो की संख्या जहां 2023 मे 50
करोड़ थी वहीं 2025 मे इस धंधे मे पीढ़ित और प्रभावित लोगों की संख्या 58 करोड़ के
पार हो चुकी है। वर्तमान मे ऑनलाइन गेमिंग मे 1100 से अधिक कंपनियाँ कार्यरत हैं
जिसमे 400 से अधिक स्टार्ट अप कंपनियाँ हैं,
जो शायद इस विधेयक के बाद संकट मे आने वाली हैं। 25 हजार करोड़ रुपए से अधिक
के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और इतनी बड़ी धनराशि के राजस्व हानि के बावजूद इस
क्रूर और अमानवीय धंधे को कानून बनाकर बंद करने के सरकार के प्रयास की सराहना की
जानी चाहिए। क्योंकि आम नागरिकों के धन की बर्बादी और अत्महत्या जैसे कदम उठा कर अपने जीवन से
खिलवाड़ करने की शर्त पर,
सरकार को होने वाला राजस्व के नुकसान के बावजूद ये सौदा सस्ता है।
विजय सहगल





























