"पूर्व प्रधानमंत्री के निधन पर राजनीति"
विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और भारत के
पूर्व प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह का 26 दिसम्बर 2024 को 92 वर्ष की उम्र मे
दिल्ली मे दुःखद निधन हो गया। वे 22 मई 2004 से
26 मई 2014 तक दो बार भारत के प्रधानमंत्री रहे। उन्हे स्व॰ पी व्ही नरसिम्हा
राव के प्रधानमंत्रित्व काल मे वित्त मंत्री के रूप मे किए गये आर्थिक उदारीकरण
एवं आर्थिक सुधारों के लिए भी श्रेय दिया
जाता हैं।
उनके निधन की इस दुःखद घड़ी मे कॉंग्रेस
अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे और कॉंग्रेस सांसद
राहुल गांधी उनके स्मारक हेतु जमीन आवंटन कर,
उस पर अंतिम संस्कार करने और यादगार स्मारक बनाने हेतु की गयी मांग पर हुई राजनीति ने इस संकट की घड़ी मे एक असहज और अप्रिय
स्थिति उत्पन्न कर दी!! सरकार द्वारा
दिवंगत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की याद मे स्मारक हेतु भूमि के आवंटन का आश्वासन
देने के साथ ही एक समिति के गठन की घोषणा के बावजूद राहुल गांधी का ये ब्यान
आश्चर्य और चिंताजनक था कि एक दशक तक प्रधानमंत्री रहे डॉ मनमोहन सिंह का निगम बोध
घाट पर अंतिम संस्कार करवा कर मोदी सरकार द्वारा उनका सरासर अपमान किया गया!! ये
समझ से परे है कि दशकों से जिस निगम बोध घाट दिल्ली मे देश के सैकड़ों गणमान्य
महापुरुषों, राजनैतिज्ञ हस्तियों
देशभक्त नागरिकों का अंतिम संस्कार किया गया तब अपमान की बात करने का क्या औचित्य?
ऐसी मान्यता हैं कि इस शमशान घाट के
स्थापना महाभारत काल मे पांडवों के सबसे बड़े भाई और इंद्रप्रस्थ के राजा युधिष्ठिर
ने की थी जहां पर हिन्दू रीति रिवाज से मृतकों का दाह संस्कार किया जाता है। दिल्ली
के सबसे पुराने, 1898 से स्थापित निगम
बोध घाट जहां पर जनसंघ के नेता दीन दयाल उपाध्याय,
पूर्व उपराष्ट्रपति कृष्णकांत, दिल्ली के
मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, अरुण जेटली जैसे दिग्गज नेताओं का अंतिम संस्कार किया गया,
तब वहाँ पर माननीय मनमोहन सिंह के अंतिम संस्कार से उनका सरासर अपमान कैसे?
जिस प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अध्यादेश को 2013 मे सार्वजनिक रूप से राहुल
गांधी ने फाड़ कर मनमोहन सिंह का अपमान
किया था, आज उनके सम्मान के
प्रति राहुल गांधी की व्याकुलता, बेचैनी और
बेकरारी देख कर देश के लोगो को निश्चित ही प्रसन्नता हुई होगी!!
डॉ मनमोहन सिंह जैसे विद्वान व्यक्ति जो भारतीय राजनीति मे निःसन्देह भारत के निर्विवाद प्रधानमंत्री थे,
के देहांत पर राजनीति करना अनावश्यक और अप्रिय है। जब सरकार ने उनके निधन पर उनके
स्मारक के लिये जमीन की सिद्धांतः
स्वीकारोक्ति प्रदान करने के
बावजूद राहुल गांधी की स्व॰ मनमोहन सिंह
के स्मारक के लिये भूमि की ये मांग कि,
सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों की गरिमा का आदर करते हुए उनके अंतिम संस्कार उनके
अधिकृत समाधि स्थलों पर किये गये.... चौंकाने वाली हैं?
राहुल गांधी आगे एक्स पर लिखते हैं कि सरकार
को देश के इस महान पुत्र और उनकी गौरवशाली कौम के प्रति आदर दिखाना चाहिये
था........!! इसमे कोई दो राय नहीं कि स्व॰ मनमोहन सिंह न केवल भारत के यशस्वी
प्रधानमंत्री रहे अपितु एक अर्थशास्त्री के रूप मे विश्व मे ख्याति अर्जित की जो
अतुलनीय है। लेकिन सिक्ख जैसी गौरशाली कौम के प्रति राहुल गांधी और कॉंग्रेस का
आदर उस समय कहाँ गया था जब 1984 मे इन्दिरा गांधी की हत्या के बाद पूरे देश मे
सिक्खों का नरसंहार किया गया था? ये तो उचित ही
है कि सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व॰
मनमोहन सिंह के भव्य स्मारक के लिये सिद्धांतः स्वीकृति प्रदान कर दी है और बक़ौल
गृह मंत्री अमित शाह कि स्मारक के संबंध मे
शीघ्र ही कार्यवाही आगे बढ़ेगी।
विदित हो कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व॰ पी
व्ही नरसिम्हा राव के निधन 23 दिसम्बर 2004 मे जब हुआ था तब इसी कॉंग्रेस पर आरोप
लगे थे कि उसने नरसिम्हा राव के अंतिम
संस्कार को दिल्ली मे नहीं करने दिया था और स्मारक हेतु कोई भूमि आवंटित नहीं की
गयी थी, यही नहीं उनके पार्थिव देह को कॉंग्रेस ने अपने
मुख्यालय मे अंतिम दर्शन हेतु भी रखने नहीं दिया था। अगर मान भी ले कि उनके परिवार
जन उनके शव को हैदराबाद ले जाना चाहते थे तब भी पूर्व प्रधानमंत्री स्व॰ नरसिम्हा राव
के स्मारक के लिये कॉंग्रेस ने कभी क्यों
मांग नहीं की? इसी तरह भारत के पूर्व
प्रधानमंत्रियों स्व॰ मोरारजी देसाई (24 मार्च 1977 से 28 जुलाई 1979) स्व॰ विश्वनाथ प्रताप सिंह (2 दिस॰ 1989 से 10
नव॰ 1990), स्व॰ चन्द्र शेखर (10
नव॰ 1990 से 21 जून 1991) के स्मारक क्यों नहीं दिल्ली मे बनवाये गये इसके विपरीत स्व॰ संजय गांधी के निधन के बाद उनका स्मारक
राजघाट और शांतिवन के नजदीक, किस हैसियत से
बनवाया गया? क्या कॉंग्रेस इस पर भी
कुछ प्रकाश डालेगी?
विजय सहगल



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