मध्य
प्रदेश- डॉ मोहन यादव के शासन का एक वर्ष?
13 दिसम्बर 2024 को मध्य प्रदेश मे डॉ॰ मोहन यादव के
मुख्यमंत्रित्व काल का एक वर्ष पूरा हो गया। पिछले वर्ष 2023 मे मध्य प्रदेश मे
हुए राज्य के चुनावों मे पूर्व मुख्य मंत्री शिवराज सिंह के नेतृत्व मे मिले
स्पष्ट बहुमत के बावजूद राज्य सरकार की
कमान डॉ मोहन सिंह यादव को दी गयी थी। मध्य प्रदेश मे लोक सभा चुनाव 2024 मे भी भाजपा को मिली अभूतपूर्व सफलता का श्रेय
भी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और डॉ मोहन सिंह यादव को देने की होड़ लगी रही थी,
लेकिन राज्य और केंद्र के लिये हुए इन दोनों ही चुनावों मे भाजपा को मिले बेमिसाल
बहुमत को, राजनैतिक पंडित जानते हैं कि,
भाजपा को ये जीत शिवराज सिंह या डॉ मोहन सिंह के प्रयासों से नहीं मिली अपितु प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी की विकसोन्मुख नीतियों,
कार्यक्रमों और इन सबसे बढ के उनकी ईमानदार छवि के कारण मिली। यही कारण है
कि मध्य प्रदेश के निम्न,
मध्यम और उच्च मध्यम वर्गीय आबादी द्वारा,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी निष्ठा और प्यार का इज़हार उनको बहुमत से चुनाव जिता कर दिया। नरेंद्र
मोदी का देश और देश के लोगों के प्रति
प्यार, समर्पण,
देश के साधारण मानवी के विकास के लिये अपनी वचन बद्धता,
इस बात का परिचायक है, जो उन्हे उनकी
ही पार्टी के लोगो से अलग रखती है।
क्या कारण है कि मध्य प्रदेश के पूर्व
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह अपने लगभग 15 वर्ष के कार्य काल मे अपनी वो छवि या पहचान नहीं बना पाये जैसे नरेंद्र मोदी ने
गुजरात के मुख्य मंत्री रहते हुए अर्जित की थी और बाद मे प्रधानमंत्री के अपने एक
दशक के कार्यकाल मे उपार्जित की हैं। भाजपा
शासित राज्यों मे सिर्फ उत्तर प्रदेश मे योगी ही एक मात्र ऐसे मुख्यमंत्री है जो अपनी
ईमानदारी और कर्मठ मुख्यमंत्री की छवि बनाने मे कामयाब हो सके जैसे कि प्रधानमंत्री मोदी की है। वेशक मध्य प्रदेश की
सड़क परिवहन, आधारभूत अधोसंरचना,
कृषि और सिंचाई, समाज के पिछड़े और वंचित लोगो के उत्थान आदि मे केंद्र सरकार के सहयोग से शिवराज सरकार
ने कार्य किए हों पर सालों साल व्यापम जैसे बड़े घोटाले ने प्रदेश के लाखों युवकों और बेरोजगार नौजवानों के
जीवन से खिलवाड़ किया। आम जनता के जीवन से जुड़े विभागों जैसे नगर पालिका या नगर
निगमों, पंचायतों,
जमीन और कृषि भूमि से जुड़े तहसील कार्यालयों,
शिक्षा विभाग, पंजीयन कार्यालयों,
क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों, शहर विकास
प्राधिकारणों, मध्य प्रदेश गृह
निर्माण मंडलों के कार्यालयों मे
व्याप्त लाला फीताशाही,
बेईमानी, भ्रष्टाचार पर कोई
अंकुश कदाचित ही लगा पाये। मध्य प्रदेश के
इन कार्यालयों मे जन साधारण को दिन
प्रतिदिन के कार्यों जैसे खसरा खतौनी,
मकान निर्माण के लिये नक्शों की अनुमति,
नामांतरण, लीज पंजीकरण,
लीज़ नवीनीकरण, वाहन पंजीकरण,
ड्राइविंग लाइसेन्स बनवाने या नवीनीकरण,
मकान की खरीद बिक्री का पंजीकरण आदि कराने
जैसे कार्यों के लिये अच्छी ख़ासी रकम रिश्वत के रूप मे देनी पड़ती है। कहने
के आशय यह है कि शिवराज सिंह चौहान,
अपने कार्यकाल मे सालों से पदस्थ इन बाबुओं और अफसरों के काकश पर लगाम नहीं लगा
पाये। इन विभागों के अधिकारी कर्मचारी भ्रष्टाचार और रिश्वत को अपना जन्मसिद्ध
अधिकार मान कर चलते हैं। ईमानदारी से अपने कार्यों को संपादित कराने वाले नागरिकों
को ये बाबू और अधिकारी परेशान और प्रताड़ित
करते हैं। मध्य प्रदेश मे भ्रष्टाचार के इस सबूत को हाल ही मे परिवहन विभाग मे साधारण कॉन्स्टेबल रहे सौरभ शर्मा के घर मे
पड़ी रेड से देखा जा सकता है जिसमे देश के अब तक की सबसे बड़ी सोने,
चाँदी और नगदी की बरामदगी है। उसकी एक गाड़ी मे ही 54 किलो सोना और 11 करोड़ नगदी की
बरामदगी है। आये दिन समाचार पत्रों मे छोटे-छोटे कर्मचारियों के घर से करोड़ो रूपये
की बरामदगी के समाचार आते रहते हैं।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 13
दिसम्बर 2023 मे राज्य शासन की बागडोर डॉ
मोहन सिंह यादव के हाथ मे सौंपे जाने पर ऐसा लगता था कि इन विभागों के कार्य
प्रणाली मे अमूल चूल परिवर्तन नज़र आएंगे?
पर दुर्भाग्य से डॉ मोहन यादव के एक वर्ष के कार्यकाल मे रंच मात्र भी परिवर्तन नज़र
नहीं आता? जब केंद्र सरकार के आयकर,
रेल विभाग और अन्य विभागों मे कम्प्युटर की
सहायता से भ्रष्टाचार समाप्त किया जा सकता है तो उसी सूचना प्रौध्योगिकी के उपयोग से
मध्य प्रदेश राज्य सरकार के इन विभागों से
बेईमानी और भ्रष्टाचार क्यों समाप्त नहीं किया जा सकता?
राज्य के सामान्य मानवी को मध्य प्रदेश के इन विभागों के दीर्घ सूत्री और भ्रष्ट
बाबुओं और अफसरों के अत्याचारों से
छुटकारा कब मिलेगा, भगवान जाने!! छोटे छोटे
कार्यों के लिये, जन साधारण को बेईमान
बाबुओं और अधिकारियों से कब निजात मिलेगी?,
ऊपर वाला जाने!! परंतु दुर्भाग्य से ये दस्तूर आज भी जारी हैं। कॉंग्रेस शासन से
चली आ रही भ्रष्ट कार्य प्रणाली,
बदस्तूर आज भी जारी हैं। राज्य शासन द्वारा अपने विभागों मे आधा अधूरा कम्प्युटरिकरण प्रदेश के नागरिकों का न केवल आर्थिक शोषण कर रहा है अपितु छोटे छोटे कामों पर अनावश्यक बिलंब कर रहा है। ई-रजिस्ट्री इस बात का जीवंत उदाहरण
हैं। किसी भी दस्तावेज़ का पंजीकरण कराने के लिये सेवा प्रदाताओं अर्थात दलालों के
रूप मे नियुक्ति को पंजीकरण कार्यालयों मे
चारों ओर देखा जा सकता हैं। किसी भी कार्यालय मे बगैर दलालों के कोई भी कार्य
असंभव हैं। क्यों नहीं राज्य शासन के मंत्रीगण आम नागरिकों द्वारा इन विभागों मे
होने वाले भ्रष्टाचार से अनिभिज्ञ हैं। क्यों ऐसे कदम राज्य सरकार नहीं उठाती ताकि
सामान्य नागरिकों के जीवन मे भ्रष्टाचार रहित जीवन जिया जा सके।
इन आम चुनावों मे सनातन के नाम से भी राज्य
और केंद्र सरकार ने, सबका साथ सबका विकास का
नारा दिया। बटेंगे-तो कटेंगे, एक हैं तो सेफ
हैं जैसे नारों ने सरकार मे नई ऊर्जा और स्फूर्ति दी परन्तु खेद और अफसोस हैं कि
राज्य के उपर्युक्त विभागों मे पदस्थ सनातनी बाबुओं और सनातनी अफसरों ने ही प्रदेश
के सीधे-सच्चे सनातनी नागरिकों ही,
भ्रष्टाचार और बेईमानी के रूप मे रिश्वत और
घूस से पीढ़ित हैं!! इन भ्रष्ट बाबुओं और
अफसरों के दिल मे क्यों सरकार सनातनी भाव,
भ्रातृत्व पैदा नहीं कर सकी? ये घूसखोर,
विधर्मी सनातनी बाबू और अधिकारी प्रदेश के
सनातनियों को बंटेंगे तो कटेंगे की तर्ज़ पर,
कूट भी रहे और लूट भी रहे!! आखिर कब डॉ मोहन
सिंह यादव प्रदेश के बाबुओं और अधिकारियों के भ्रष्टाचार,
कदाचार और अनाचार पर अंकुश लगाएगी?
कब तक राज्य सरकार मोदी के नाम की कमाई खाएँगी?
एक न एक दिन तो उन्हे अपनी पहचान बनानी ही
पड़ेगी? अन्यथा किसी शायर ने सच ही लिखा हैं:-
न
समझोगे तो मिट जाओगे ऐ हिन्दोस्ताँ वालो
तुम्हारी
दास्ताँ तक भी न होगी दास्तानों में
विजय सहगल



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