राष्ट्रपति मसूद
पेज़ेश्कियान - नये ईरान का आगाज़ ?
ये लिखते हुए अतिरंजना न होगी कि ईरान की जनता ने
6 जुलाई को देश के राष्ट्रपति के रूप मे एक उदारवादी नेता मसूद
पेज़ेश्कियान को राष्ट्रपति के रूप मे चुन कर एक इतिहास रचने
का साहस किया। ईरान के 9वें राष्ट्रपति के निर्वाचन का ये
चुनाव ईरान के पूर्व कट्टरपंथी राष्ट्रपति
इब्राहिम रईसी की संदिग्ध परिस्थितियों मे हेलिकोप्टर दुर्घटना मे मौत के बाद किया
गया। "नए ईरान" को हिजाब की
बाध्यता से मुक्ति के आश्वासन और आवाहन का
ईरानी जनता ने सुधारवादी नेता और पेशे से हृदय रोग विशेषज्ञ मसूद
पेज़ेश्कियान को जहां एक ओर ईरान के राष्ट्रपति के रूप मे अपना
भरपूर समर्थन देकर चुना वहीं दूसरी ओर उनके प्रतिद्वंदी सईद जलीली को दूसरे चरण की
वोटिंग मे 30 लाख से भी अधिक मतों के अंतर से परास्त किया। ईरान की चुनाव प्रणाली की इस व्यवस्था का के अंतर्गत यदि
किसी प्रत्याशी को 50 प्रतिशत से कम मत प्राप्त होते हैं तो शीर्ष दो प्रत्याशियों
के बीच द्व्तिय चरण के चुनाव मे विजेता का निर्णय किया जाता हैं न कि पहले चरण के
चुनाव मे बहुमत प्राप्त प्रत्याशी को?
मसूद पेज़ेश्कियान ने अपने चुनावी
अभियान मे ईरान के अनिवार्य हिजाब कानून मे ढील देने और अमेरिका सहित पश्चिमी
देशों से संबंध बेहतर बनाने का वादा किया था। विदित हो कि 13 सितम्बर 2022 को ईरानी मॉरल पुलिस द्वारा 22
वर्षीय ईरानी युवती महसा अमिनी की पीट पीट
कर इसलिए हत्या कर दी थी क्योंकि उसने ईरान मे महिलाओं के अनिवार्य हिजाब कानून का
उल्लंघन किया था। महसा अमिनी की हत्या पर ईरान सहित दुनियाँ मे हिजाब के विरोध मे
तीव्र आंदोलन हुए थे। ईरान मे देश के नागरिकों ने और महिलाओं ने अपने बाल कटवा कर
हिजाब का विरोध किया था, हिजाब के विरुद्ध इस आंदोलन को
ईरान की कुख्यात मॉरल पुलिस द्वारा सैकड़ो लोगो की गिरफ्तारी, हत्या और फांसी की सजा दे कर कुचलने के इस मानवाधिकार विरोधी, कट्टरपंथी प्रयास का ईरान सहित दुनियाँ मे कडा विरोध किया गया था। यहीं
कारण था कि कट्टरवादी सोच के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की संधिग्ध हैलिकोप्टर दुर्घटना मे मौत पर, धार्मिक रूप से कट्टरवादी सोच के बावजूद अनेकों जगह पर फटाके फोड़ कर और
आतिशबाज़ी चला कर खुशी प्रकट की गयी
थी।
मसूद पेज़ेश्कियान का ईरान के
राष्ट्रपति चुने जाने पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई देते हुए ईरान
और भारत के लोगों और क्षेत्र के लाभ के लिए मधुर और दीर्घकालिक, द्विपक्षीय सम्बन्धों को मजबूत करने के लिए साथ मिलकर काम करने की आशा जतलाई। भारत और
ईरान के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण
चाबहार बन्दरगाह पर ध्यानाकर्षण रहेगा।
भारत ने चाबहार बन्दरगाह के विकास के लिए 12 करोड़ डॉलर देने का वादा किया हैं।
जहां एक ओर साउदी अरब प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने ईरानी
राष्ट्रपति को बधाई दी हैं वहीं इसके विपरीत अमेरिका ने ईरानी राष्ट्रपति के
चुनावों की आलोचना करते हुए इन चुनावों को न तो स्वतंत्र और न ही निष्पक्ष बताया।
अमेरिका ने दावा किया कि मसूद पेज़ेश्कियान को राष्ट्रपति चुनने मे इस्लामी गणराज्य का मानवाधिकारों के रुख मे कोई बदलाब नहीं
आयेगा।
पिछले कट्टरपंथी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी या
अन्य पिछली सरकारों के कट्टरपंथिय राष्ट्र प्रमुखों का शासन इस बात का घ्योतक हैं कि ईरान मे शिया
शासन प्रणाली और देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की किंचितमात्र अनदेखी कर, ईरान
मे सरकार और शासन की कल्पना असंभव है। इस बात को नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मसूद
पेज़ेश्कियान के इस वक्तव्य से भली भांति समझा जा सकता हैं
जिसमे उन्होने अपने चुनावी प्रचार के दौरान जहां एक ओर हिजाब की अनिवार्यता मे ढील, देश के आर्थिक विकास के लिए पश्चिमी देशों से अपने
सम्बन्धों मे सुधार के साथ, शिया शासन प्रणाली मे बिना किसी
मौलिक परिवर्तन के वादे के साथ ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को
देश के सभी नीतिगत मामलों मे अंतिम निर्णायक मानने का वचन दिया हैं। एक बड़े ही
मार्मिक और हृदयस्पर्शी संदेश मे मसूद पेज़ेश्कियान ने देश की जनता से आवाहन किया कि सुधारवादी सोच का ये कठिन रास्ता आपके
सहयोग के बिना आसान नहीं होगा। मै वचन देता हूँ कि मै कभी आपको इस रास्ते पर अकेला
नहीं छोड़ूँगा पर आप भी मुझे अकेला मत छोड़िएगा!! ऐसे वादे इस बात की ओर इंगित करते हैं कि नए राष्ट्रपति मसूद
पेज़ेश्कियान की सुधारवादी,
उदारवादी और विकसवादी राह इस्लामिक ईरान
मे इतनी आसान न होगी, फिर भी उम्मीद की जानी चाहिये कि मसूद
पेज़ेश्कियान के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद ईरान मे
स्थायित्व और उदरवादी सरकार अपने पूर्ववर्तिय कट्टरवादी शासकों के विपरीत एक
सर्वसमावेशी और सर्वसम्मत नीतियों को लागू कर सकेगी जहां कट्टरपंथ, रूढ़िवाद, दक़ियानुसी और अनुदार सोच का कोई स्थान नहीं होगा। पर ईरानी
राजनीति के जानकारों का मानना हैं कि ईरान मे सारी नीतियाँ और शक्तियाँ देश
के राष्ट्रपति के पास अंतर्निहित नहीं हैं
अपितु सर्वोच्च शिया धार्मिक नेता एवं उनके नियंत्रिण वाली शक्तिशाली संस्थाओं के
पास निहित हैं। अतः नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान
की हिजाब सहित घरेलू या विदेशी उदारवादी नीतियों को सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की सहमति
के बिना लागू करना कदाचित ही संभव होगा?
विजय सहगल
4 टिप्पणियां:
आपका यह लेख बहुत ही अच्छा लगा। हिजाब से मुक्ति पाना मुश्किल लगता है। फिर भी ईरान में यदि हिजाब पहनने में छूट मिलेगी तो यह पूरी दुनिया में एक अच्छा संदेश जाएगा।
शंकर भट्टाचार्य।
बहुत सुंदर विश्लेषण एवं सटीक टिप्पणी ।
धन्यवाद दादा
सावित्री को सावित्री बाई फूले
माला को महिलाए
पढ़ा जाय
केके गौतम
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