"ईरानी
राष्ट्रपति के हेलिकोप्टर की दुर्घटना या षड्यंत्र?"
दुनियाँ को इस खबर ने चौंका दिया कि 19 मई
की रविवार की शाम ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी एक हेलिकोप्टर हादसे का शिकार हो गये,
जब वे अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के साथ ईरान-अजरबैजान की सीमा पर
स्थित एक बांध का उदघाटन कर बापस लौट रहे
थे। रईसी के साथ ईरान के विदेश मंत्री होसैन अमीरब्दुल्लाहियन और ईरान सरकार के
कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी साथ थे, वे सब भी हादसे
का शिकार हो गये। तीन हेलिकोप्टरों के काफिले मे दो हेलिकोप्टर तो सुरकक्षित,
सकुशल बापस पहुँच गये पर तीसरा हेलिकोप्टर जिसमे ईरान के राष्ट्रपति एवं विदेश
मंत्री सहित अन्य महत्वपूर्ण व्यक्ति सवार थे लापता हो गया। ऐसा बताया गया कि खराब मौसम और कोहरे के कारण
राष्ट्रपति के हेलिकोप्टर को पहाड़ी इलाके और पेड़ों से आच्छादित जंगल मे आपातकालीन लेंडिंग कराने
के लिये बाध्य होना पड़ा। देर रात तक उनके हेलिकोप्टर की खोज जारी रही। भारत के
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सहित दुनियाँ के तमाम देशों के राष्ट्रप्रमुखों ने
चिंता करते हुए उनकी सलामती के लिये प्रार्थना की। ईरान मे भी इस दौरान वहाँ के
नागरिकों ने राष्ट्रपति रईसी के कुशलक्षेम के लिये प्रार्थनाएँ की। रविवार-सोमवार
की दरमियानी रात मे बचाव कार्य जारी रहा पर दुर्भाग्यवश 20
मई सोमवार को तुरकिये के बचाव दल के ड्रोन ने इलाके
की सटीक लोकेशन के माध्यम से खबर दी कि इस दुर्घटना मे हेलिकोप्टर मे सवार सभी लोग
मारे जा चुके हैं। हो सकता है हेलिकोप्टर
दुर्घटना मे इस तरह ईरानी राष्ट्रपति का मारा जाना वास्तव मे कोई तकनीकि या बिगड़े
मौसम का कारण हो पर कहीं न कहीं लोगो के
मन मे शंका और अंदेशा है कि इस दुर्घटना के
पीछे इस्राइल की खुफिया एजन्सि मोसाद या अमेरिका की खुफिया एजन्सि सीआईए का
हाथ तो नहीं? ईरानी नागरिकों द्वारा
जहां एक ओर राष्ट्रपति रईसी के सकुशल होने की प्रार्थनाएँ की जा रही थी वही एक
नज़ारा चौकाने वाला था कि कुछ घरों के ऊपर आतिशबाज़ी और पटाके भी चलते देखे गये। ये
इस बात का संकेत था कि ईरान के कुछ लोगो ने राष्ट्रपति रईसी की मौत पर खुशियाँ
मनाई क्योंकि राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी
ईरान के सुप्रीम कट्टरपंथी लीडर अली
खामनेई के करीबी और विश्वस्त थे। 1988 मे रईसी ने अपने लगभग पाँच हज़ार राजनैतिक विरोधियों को शरिया कानून के तहत मौत की सजा
सुना कर फांसी पर लटका दिया था। इसके साथ ही रईसी के शासन काल मे ही हजारों ईरानी महिलाओं
पर हिजाब थोपने और प्रताड़ित कर सजाएँ दी गयी थी। 2022 मे हिजाब के विरोध मे महसा
अमिनी की हिरासत मे मौत पर सारी दुनियाँ मे ईरान के विरोध मे प्रदर्शन हुए थे और
संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी इस हत्या के लिये ईरान को दोषी ठहराया था। अभी इस बारे
मे कयाश ही लगाये जा रहे हैं? जांच के बाद ही
स्पष्ट होगा कि ये हादसा था या साजिशन उनकी हत्या की गयी और यदि ऐसा है तो हत्या
मे कहीं ईरान की आंतरिक राजनीति का भी तो कहीं इस षड्यंत्र मे कोई हाथ तो नहीं?
ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की एक
हैलिकोपटर दुर्घटना मे मारे जाने की खबर से एक बार फिर मिडिल ईस्ट मे खतरे के बादल
छा जाने का अंदेशा दुनियाँ को सताने लगा है। विदित हो कि 13 अप्रैल 2024 को ईरान
के राष्ट्रपति रईसी ने इस्राइल पर 300 से भी अधिक ड्रोन मिसाइल से हमला कर सीरिया मे उनके दूतावास पर हुए हमले जिसमे
ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के दो जनरल मारे गये थे,
का बदला लिया था। कुछ वर्ष पूर्व इस्राइल ने ईरानी सेना कम्मांडर सुलेमानी तथा
ईरान के एक परमाणु वैज्ञानिक को भी
इस्राइल ने इसी तरह मिसाइल हमले मे मौत के
घाट उतार दिया था। अमेरिका और ब्रिटेन की स्पष्ट चेतावनी के बावजूद ईरान के इस
दुस्साहस की, अमेरिका और यूरोपियन
देशों ने निंदा की और ईरान पर अनेक प्रतिबंध भी लगाये। तब से ये कयास लगाया जा रहा
था कि इस्राइल भी ईरान के इस ड्रोन मिसाइल हमले पर प्रतिक्रिया कर बदला
अवश्य लेगा। ठीक एक हफ्ते बाद इस्राइल ने ईरान ही नहीं इराक और सीरिया पर भी हमला किया लेकिन उस समय राष्ट्रपति रईसी पाकिस्तान
मे साही मेहवाननवाजी का आनंद उठा रहे थे। ऐसा लगता थे कि इस्राइल ने बदले की
कार्यवाही पूरी कर ली, पर ईरान के
राष्ट्रपति का इस तरह हेलिकोप्टर दुर्घटना
मे अचानक से मारा जाना तमाम शंकाओं-कुशंकाओं
की ओर इशारा करता है? अब तक का इतिहास
रहा है जब जब इस्राइल पर जिस किसी ने भी हमला किया है इस्राइली खुफिया एजन्सि मोसाद
ने अपने दुश्मनों को साम-दाम-दंड-भेद से चाहे वे दुनियाँ के किसी भी क्षेत्र मे
छुपे हों, हमला कर अपने दुश्मनों
को नेस्तनाबूद कर दिया। विदित हो कि ईरानी राष्ट्रपति रईसी जिस टाइप 412
हेलिकोप्टर मे यात्रा कर रहे थे वह कभी अमेरिका से खरीदा गया था,
जब ईरान के संबंध अमेरिका से अच्छे थे। ईरान द्वारा अमेरिका की चेतावनी के बावजूद,
इस्राइल पर इस दुस्साहसिक हमले को भी इस
हेलिकोप्टर दुर्घटना मे, सीआईए के हाथ
होने के शंका जताई जा रही हैं, क्योंकि ये
हेलिकोप्टर अमेरीकन यंत्रों और तकनीकि से सुसज्जित था। ईरान ने इस्राइल पर हमला कर
दुनियाँ को ये जतलाने का प्रयास किया था कि वह इस्राइल सहित अमेरिका की भी परवाह
किये बिना बेखौफ हो इस्राइल पर हमला कर सकता है।
फिलिस्तीन,
सीरिया, ईरान या इराक पर हुए
आक्रमण इस बात को दर्शाती हैं कि अमेरिका की अनदेखी कर कोई भी देश अब भी दुनियाँ
मे अमेरिका के वर्चस्व को चुनौती नहीं दे
सकता। ईरानी राष्ट्रपति के हेलिकोप्टर दुर्घटना मे हुई मौत से यदि ये सिद्ध हो
जाता हैं कि इस घटना मे इस्राइली खुफिया एजेंसी मोसाद या अमेरीकन खुफिया एजेंसी सीआईए
संलिप्त है तो मिडिल ईस्ट के खड़ी देशों के जबर्दस्त प्रीतिक्रिया संभावित होगी और
इसके दुनियाँ पर क्या दुष्परिणाम होंगे कहना कठिन है?
लेकिन ये निश्चित है कि दुनियाँ अभी उक्रेन-रूस युद्ध और इस्राइल-फिलिस्तीन युद्ध
से उबर भी नहीं पायी थी जो मध्य पूर्व के
देश इस्राइल -ईरान के बीच इस नयी चुनौती से जूझने मे अपनी शक्ति और ऊर्जा व्यय
करेगा। विश्व राजनीति मे इस्राइल-ईरान सहित दुनियाँ के अन्य देश भी,
कहीं प्रतिशोध, प्रतिहिंसा की आग मे
सुलग कर दुनियाँ को अपनी चपेट मे न ले लें,
इस आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
विजय सहगल

1 टिप्पणी:
No doubt, Iran is targetting Israel through its proxies such as Hamas, hijubullah and others. But it cannot be guessed that Israel is behind the death of Iranian president. However, the involvement of USA cannot be ruled out. The reason being that Israel will gain nothing by doing this. USA may get advantage because he was very much close to make Uran a nuclear nation. Whatever be the reason, Iran is nowadays centre of geopolitical.. Iran must stop it's proxy war against Israel.
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