बुधवार, 21 जून 2023

अम्माँ नईं रईं

" अम्माँ नईं रईं "






पिछले एक माह पूर्व से मैंने अपनी 87 वर्षीय अम्माँ को बीमारी के बावजूद  लाचार और बेवश होते  नहीं देखा। 12 मई 2023 को जब उनका चेहरा सहित पूरा शरीर पीला पड़ा तो पीलिया की बीमारी की आशंका तो निश्चित थी पर हम सभी इसे साधारण पीलिया ही मान रहे थे जो प्रायः पानी की स्वच्छता या खाने की कारण संभव था। पर खून की जांच मे जब पीलिया का स्तर साधारणतः 1 के विरुद्ध 16-17 पाये जाने की पुष्टि हुई तो आशंका हुई कि ये पीलिया के असामान्य लक्षण हो सकते है?  सीटी सकेन की गहन जांच मे आशंका सच साबित हुई, उनके लिवर (यकृत)  के रास्ते मे ट्यूमर की  रुकावट के कारण पीलिया ने इतना गहन रूप ले लिया था। इसके बावजूद भी उस दिन तक  अम्माँ की हिम्मत और  हौसलों मे कोई कमी नहीं थी। परिवार के सभी सदस्यों ने चिकित्सकों की सलाह पर दिल्ली स्थित लिवर और पित्त शोध संस्थान मे ले जाने का निर्णय लिया।

उनकी इक्छा शक्ति की प्रशंसा करनी होगी कि उस दिन भी तिमंजिला मकान से अपने आप सीढ़ियाँ उतर कर ट्रेन के रात के सफर के बाद जब 16 मई 2023 को उन्हे बसंत कुंज, दिल्ली स्थित लिवर शोध संस्थान ले गये तो स्वयं पैदल चल डॉक्टर को चेक कराया। उस दिन तक भी उनकी ज़िंदादिली और सरल स्वभाव का ये हाल था कि चलते-चलते एक महिला जिसकी शक्ल मेरी सास से मिलती थी, को रोक कर कहा, "बहिन जी आप अन्यथा न लें तो एक बात पूंछे? महिला की स्वीकरोति पर, उन्होने कहा।   "आपकी शक्ल मेरी समधिन से मिलती है," "लेकिन मै हैरान हूँ  कि जब मेरा बेटा और बहू तो मेरे साथ है", "आप अस्पताल मे यहाँ कैसे?"। महिला भी जिंदा दिल और हाजिर जबाब थी, हंस कर बोली, हाँ बहिन जी उम्र के इस पढ़ाव ऐसा भ्रम हो जाता है!!

अस्पताल मे भर्ती होने के बंधन से उन्हे उलझन थी।  यूं भी उन्होने अपने जीवन मे कुरूतियों और अंध विश्वास के विरुद्ध सदैव अपना नकारात्मक  रवैया अपनाया फिर चाहे घर मे पर्दा प्रथा, दहेज प्रथा या छुआ छूत की प्रथा (जिसका उल्लेख मैंने अपने 21 सितम्बर 2019 के  ब्लॉग मे "विनियाँ बाई" के रूप मे किया था https://sahgalvk.blogspot.com/2019/09/blog-post_21.html)॰ सात दिन के  अस्पतालीकरण के दौरान भी जब उनके पेट के बाएँ एवं दायें तरफ  दोनों थैली लगी रही जिनमे यकृत से निकलने वाले अपशिष्ट दृव्य एकत्रित हो रहे थे,  जिनकी मात्रा 800 मिली॰ से 1 लीटर तक प्रतिदिन थी। तब भी उन्हेने अपने बुलंद इरादे और दृढ़ संकल्प शक्ति का परिचय मे एक दिन की भी चूक नहीं की। शारीरिक दुर्बलता के बावजूद अपनी दिनचर्या, दीर्घ और लघु शंका का  निवारण, सहारा लेकर टॉयलेट मे स्वयं किया। इस तरह लगभग 23 दिन तक अस्पताल और घर पर दवाओं, इंजेक्शन, विभिन्न खून की जाँचों और धमनियों के माध्यम से शरीर मे पहुंचाने वाले द्रव्यों से संघर्ष करते हुए अंततः 8 जून 2023 को  लिवर मे मेटेलिक स्टंट्स सेम्स (self expended metelic stunt) का सफल पृत्यारोपड़ कराया।

लेकिन पीलिया के सफल इलाज़ के बावजूद उन्हे जब बुखार के कारण दोबारा लिवर हॉस्पिटल मे दाखला कराया तो उनकी हिम्मत, मनोबल और दृढ़ सकल्प को मैंने पहली बार टूटते देखा और महसूस किया। प्रवास, नौकरी और व्यवसाय मे समय की सीमित उपलब्धता के बावजूद हम भाइयों ने अपनी अपनी तरह से उनकी सेवा शुश्रूषा मे कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी, पर बेटियों को अम्माँ से मिली  शिक्षा और संस्कार ने हमारी दोनों बहिनों, भांजी-भांजों और अर्धांगिनी ने पूरे दिल्ली प्रवास के दौरान माँ के खान-पान, दवा, रहन-सहन साफ-सफाई के अतिरिक्त उनके मल-मूत्र के निस्तारण के माध्यम से जो सेवा की उससे हम कभी उऋण नहीं हो सकते।  

हैवि एंटि बाइओटिक दवाइयों के अतिरिक्त प्रभाव के चलते उन्होने खाना पीना कुछ कम कर दिया था। परिवार के लोग कुछ प्यार और दवाब के चलते बारी-बारी से उन्हे कुछ न कुछ खिलाने का अनुनय विनय करते लेकिन उनका एक ही जवाब होता, "हमे नहीं खाना"।  भांजे भाँजियों के प्रयास मे वे ज्यादा कड़ी प्रितिक्रिया न करती पर जब मेरी पत्नी कुछ खिलाने को लाती तो तुरंत कहती, "लो ये जाने कौन सी माया लियाई"। हॉस्पिटल की दाल, खिचड़ी या दलिया उन्हे कतई पसंद न आता। लेकिन जब उन्हे यह कह कर खिलाने के प्रयास करते कि डॉक्टर साहब ने कहा है कि यदि नहीं खाओगी तो हॉस्पिटल से छुट्टी नहीं करेंगे? तब निडरता पूर्वक कह देती, "भाड़ मे गये डॉक्टर, हमे नईं खाने"। तब उनसे विनती करनी पड़ती, "अम्माँ थोड़ा धीरे बोलो", "बदनामी होगी", सब सुन रहे हैं, पर उनकी निश्चल निर्भीकता ताउम्र यूं ही बनी रही।         

सांसरिक माया मोह के चलते जीवन से  अनासक्त विरक्ति कठिन है। अम्मां भी इसका अपवाद न थीं। पिछले कुछ दिनों से सोते-जागते या अचानक नींद से जागते उनके निकट उपस्थित परिवार के सदस्य का हाथ अपने हाथ मे ले  कर भगवान का स्मरण करती। मेरा हाथ अपने हाथ मे लेकर भींच लेती। अंतिम समय मे अपने  दारुण और उदास आंखो से अपनी बीमारी से बचने की विवेचना करती! कातर दृष्टि और दर्द, वेदना के भाव भरे चेहरे से,  कहती, "विजय, हम कैसे ठीक होंगे?, कैसे बचेंगे, मुझे बचा लो?" मैंने उन्हे लगातार दिलासा दिला कर  कहा अम्माँ तुम बेफ़िक्र, सो जाओ? तुम्हें कुछ नहीं होगा! मै हूँ न!,  मै  जाग रहा हूँ!! तुम निश्चिंत हो आराम करो!!, फिर भी वे  एक अदृश्य भय से ग्रसित थीं! इस सब के बावजूद मैंने  उन्हे निश्चिंत हो ईश्वर के अभय की दिलासा दी। जीवन की इस अंतिम संध्या वेला के सत्य से वे भी वाकिफ थी और सत्य से मै भी अवगत था, वश फर्क इतना था कि माँ सच बोल रही थी और मै झूठ बोल उन्हे अभय की झूठी दिलासा दे रहा था। मै आत्मग्लानि और छल वंचना से ग्रसित हो मन ही मन चीत्कार कर रहा था!! अम्माँ, मै इतना निरीह और लाचार था कि तुम्हारे अंतिम समय मे भी तुम्हारी इक्छा पूर्ति करने मे विवश और असहाय  था।

लेकिन होनी टल न सकी, 18 जून 2023 को प्रातः आठ बजे के आसपास "अम्माँ का निधन हो गया।

माँ, मै जानता हूँ कि गोलोक वास से तुम मेरे झूठ और मिथ्याभिमान पर मुझे धिक्कार रही होगी, लेकिन मै  सत्य संभाषण कर रहा हूँ अम्माँ, क्योंकि मै तुम्हें किसी भी कीमत पर खुश और प्रसन्न देखना चाहता था। अम्माँ तुम मेरे होने मे लज्जित महसूस मत होना,  मै जन्म-जन्मांतर से तेरी कोख से जन्म लेना चाहता हूँ क्योंकि मै तुम्हें प्यार करता हूँ, तुम्हें याद करता हूँ।

जैसा कि श्रीमद्भगवत गीता मे भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते है :-

तमेव शरणं गच्छ सर्वभावेन भारत।
तत्प्रसादात्परां शान्तिं स्थानं प्राप्स्यसि शाश्वतम् (अध्याय 18 श्लोक 62)  अर्थात

हे! अर्जुन, तू सब प्रकार से उस परमेश्वर की ही शरण मे जा। उस परमात्मा की कृपा से ही तू परम शांति को तथा सनातन परम धाम को प्राप्त होगा।

मै ऐसे परम परमात्मा भगवान श्री कृष्ण से प्रार्थना करूंगा कि वह मेरी पूज्यनीय माँ को अपने श्री चरणों मे स्थान प्रदान करें। माँ तेरे चरणों मे नमन, बारंबार नमन।

ॐ शांति, ॐ शांति॰   

विजय सहगल   

       

 


9 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

बहुत दुखद समाचार स्वर्गीय माता जी की आत्मा को ईश्वर अपने चरणों में स्थान दें और उन्हें शांति प्रदान करें मैं आपकी वेदना को समझता हूं यह प्राकृतिक सत्य है इसे बदला नहीं जा सकता आपने स्वर्गीय माता जी के अंतिम समय सेवाकर अपने दायित्व में कोई कमी नहीं छोड़ी होगी 🙏

बेनामी ने कहा…

माताजी को शत् शत् नमन। आप सभी ने जिस तरह से माताजी की सेवा की, अनुकरणीय है। उनके जैसा जीवट एवं जीजिविषा कम ही लोगों में होती है। पुनः आप सभी को नमन।

बेनामी ने कहा…

Your description is very nice about your mother and your feelings.
Om Shanti.

बेनामी ने कहा…

अत्यंत दुखद । माता जी की पुण्यात्मा को प्रभु अपने श्रीचरणो में स्थान दे । आप व परिवार के सभी सदस्यों को इस असीम दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें ।

बेनामी ने कहा…

Om shanti

Deepti Datta ने कहा…

I can totally co-relate your feelings with our situation sir. Same way we lost our maa last year in May and still feel with her every moment. This is a loss which is irreparable forever. May Almighty bless her to be in His Lotus feet and enough strength to you and whole family..Om Shanti..

बेनामी ने कहा…

Extending my warmest energy, positive thoughts, and prayers to you and your loved family .”.
- Hemu & Family

बेनामी ने कहा…

Om shanti 🙏

बेनामी ने कहा…

*"लाई हयात आई कज़ा ले चली चले, अपनी ख़ुशी न आए न अपनी ख़ुशी चले।"*
*हम सभी इस पृथ्वी पर सैर के लिए आते है और हमारा प्रथम परिचय "माँ" से होता है जो प्रकृति की सर्वोत्तम भेंट है।उसके आँचल की छाँव में हमारा संपूर्ण बचपन व्यतीत होता है जो जीवन का सर्वश्रेष्ठ समय होता है।"माँ" केवल एक अक्षर नहीं है वो ममता का पर्याय है।उसकी तो डाँट और मार में भी भरपूर प्यार होता है।पिता के क्रोध से बचाने वाली ढ़ाल है माँ।"माँ"का सदैव के लिए दुनिया से विदा होना अपूरणीय क्षति है।इस असहनीय आघात को सहना हम सब की नियति है।ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दे और आप व आपके परिवार को इस सदमे से बाहर आने का संबल प्रदान करे।*
*🙏🌹🙏ऊँ शाँति।*🙏🌹🙏
सुरेन्द्र सिंह कुशवाह ग्वालियर