मंगलवार, 24 फ़रवरी 2026

एआई-समिट 2026, राह मे रोड़े अटकाने की नाकाम कोशिश

 

"एआई-समिट 2026, राह मे रोड़े अटकाने की नाकाम कोशिश"










इंडिया एआई इंपेक्ट एक्स्पो 2026 का इन दिनों 16 से 21 फरवरी तक वृहद आयोजन भारत मंडपम नई दिल्ली मे  किया गया, जिसका उद्घाटन प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने किया।  विश्वस्तरीय इस सम्मेलन मे 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। विश्व स्तरीय इस समिट के महत्व को इस बात से भी समझा जा सकता है कि फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन,  संयुक्त राष्ट्र संगठन के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस सहित दुनियाँ के 20  देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं  सूचना प्रौध्योगिकी की विश्वविख्यात कंपनियों के सीईओ, यथा गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के चेयरमैन मुकेश अंबानी, ओपन एआई के सैम, स्केल एआई के एलेक्सजेंडर वांग, एन्थ्रोपिक के अमोदेई, भारत एयरटेल के भारती मित्तल सहित अनेकों स्टार्ट अप भाग ले रहे है।  इस एक्स्पो मे 300 से अधिक प्रदर्शनी मंडप लाइव प्रदर्शन किया। इन दिग्गज कंपनियों के प्रमुखों ने 250 अरब डॉलर का निवेश कर एआई प्रोजेक्टों को भारत मे स्थापित करने का आश्वासन दिया है जो आने वाले समय मे देश के आर्थिक विकास और रोजगार के नए आयाम खोलेगा।      

दिल्ली मे चल रही इंडिया एआई समिट मे कल 19 फरवरी 2026 का दिन एक यादगार दिन के, वे गौरवशाली पल थे जब सबसे कम उम्र के वक्ता 8 वर्षीय रणवीर सचदेवा ने एआई सबमिट को संबोधित किया।  पाँच साल की उम्र से ही  अपनी एआई योग्यता, प्रतिभा और कौशल दिखाने वाले रणवीर सचदेवा,  बच्चों के नज़रिये से एक बुक भी लिख चुके हैं जिसकी प्रशंसा संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी कर चुके है। हमारे यहाँ एक हिन्दी लोकोक्ति  है कि, "होनहार बिरवान के होत चीकने पात" जिसका अर्थ है प्रतिभावान व्यक्ति के गुण, बचपन से ही दिखाई देने लगते हैं जो रणवीर जैसे होनहार बच्चे पर सटीक बैठती है।

जहाँ एक ओर तो इस प्रतिभाशाली, होनहार बालक ने देश का मस्तक, अपने ज्ञान और कौशल से ऊंचा किया वहीं दूसरी ओर गलगोटिया यूनिवर्सिटी की प्रौढ़ महिला प्रोफेसर नेहा सिंह ने   अपने  झूठ, फ़रेब और कपट पूर्ण वक्तव्य से देश का मान सम्मान को शर्मसार कर दिया। गलगोटिया यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा की इस प्रोफेसर ने अपने संस्थान के स्टाल पर, चीन मे निर्मित और आयातित एक एआई रोबोट डॉग को अपनी गलगोटिया यूनिवर्सिटी मे विकसित और विनिर्मित बता कर प्रदर्शित कर झूठी, वाहवाही बटोरी। इंडिया एआई सबमिट 2026 को संबोधित करने वाले एक आठ साल के  बालक रणवीर को तो इस बात की समझ थी कि हमे मिथ्या खोज और शोध को प्रदर्शित नहीं करना है पर बेहद अफसोस, विश्वविध्यालय की प्रोफेसर को दूसरे देश की खोज को बेहूदा,  धूर्ततता धृष्टता   पूर्वक अपने संस्थान की खोज बताने मे  तनिक भी शर्म  और लज्जा नहीं आई। चोरी और सीनाजोरी की पराकाष्ठा देखिये कि मीडिया द्वारा गलगोटिया यूनिवर्सिटी के रोबोट के झूठे दावे की पोल खुल जाने के बावजूद उस प्रोफेसर ने अपने आप को सही ठहराते हुए कुतर्क देकर, गलती का ठीकरा मीडिया के सिर पर फोड़ते हुए कहा कि मै इसे ठीक से समझा नहीं पायी या इसे ठीक से समझा नहीं गया। बड़बोलापन यहीं नहीं रुका उन्होने गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा एआई पर 350 करोड़ के रूपये के निवेश का भी दावा कर दिया पर इसके शीर्षवार निवेश को स्पष्ट नहीं कर सकी। इस मामले को सामने आने पर सरकार ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टाल को तुरंत बंद करा कर, एआई समिट से बाहर कर दिया और स्टाल की लाइट भी काट दी। मामले के तूल पकड़ने पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी के प्रबंधन ने प्रोफेसर नेहा सिंह के कृत के लिये माफी मांगते हुए कहा कि हमारे प्रतिनिधि को सही जानकारी नहीं थी। उन्होने कैमरे पर आने के अतिउत्साह के कारण गलत बयानी की वास्तव मे उन्हे प्रेस से बातचीत के लिये अधिकृत भी नहीं किया गया था। एक महिला प्रोफेसर की मीडिया के सामने प्रसिद्धि पाने के अतिउत्साह और महत्वाकांक्षा ने अपने और अपने संस्थान का अहित तो किया ही देश और दुनियाँ के सामने भारत की एआई समिट के सफल आयोजन पर बट्टा लगाने का कार्य किया जिसकी जितनी भर्त्स्ना की जाय कम है। सच का गला घोंटती गलगोटिया यूनिवर्सिटी का नाम गलघोंटिया यूनिवर्सिटी कर देना चाहिये?  

एक और शर्मनाक घटना इंडिया एआई समिट मे देखने को मिली जब 20 फरवरी 2026 को दोपहर मे  यूथ कॉंग्रेस के 15-20 सदस्यों ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध मे प्रदर्शन किया। हाथों मे नरेंद्र मोदी की फोटो वाली टीशर्ट लिए, पीएम कॉम्प्रोमाइज्ड के नारे लगाये। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगाते हुए एक पूर्वनियोजित षड्यंत्र के तहत अर्धनग्न हो कर प्रदर्शन कर, समिट मे आये हुए देश विदेश के अथितियों के सामने एक बार फिर भारत की शाख को शर्मसार किया। दिल्ली पुलिस ने इस घटना मे शामिल चार लोगो को गिरफ्तार कर जाँच शुरु कर दी गयी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस प्रदर्शन को वैश्विक मंच पर भारत की छवि को धूमिल करने की कोशिश बताया है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन सहित अन्य पदाधिकारियों ने युवक कॉंग्रेस के लोगो के इस अधम कृत की कड़ी निंदा करते हुए राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग की है। वहीं कॉंग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन बता कर देश की कोई बदनामी नहीं बतलाई।

राजनैतिक दलों के बीच आपसी मतभेद और वर्चस्व की लड़ाई स्वाभाविक है पर कल जिस तरह युवक कॉंग्रेस के कुछ लोगो ने अर्धनग्न प्रदर्शन कर इंडिया एआई समिट मे देश के मान सम्मान को शर्मसार किया वह अत्यंत ही निंदनीय और आपत्तिजनक है। इंडिया एआई समिट का भारत-अमेरिका व्यापारिक समझौते से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं था। यदि विरोध प्रदर्शन करना ही था तो समय और स्थान इस विरोध के लिए कतई उपयुक्त नहीं था। ये प्रदर्शन यूथ काँग्रेस के इन सिरफिरे लोगो द्वारा सस्ती लोकप्रियता हांसिल करने और अपने शीर्ष नेताओं की नज़रों मे आने की चाहत ही मूल उद्देश्य था। बेशक ऐसे द्रोही लोग अपने निजी स्वार्थ और  अपवित्र उद्देश्य मे भले ही कामयाब हो गए हों लेकिन उन्होने दुनियाँ के सामने देश की आत्मसम्मान का जितना नुकसान किया है वह किसी देश द्रोह से कम नहीं है।             

विजय सहगल            

रविवार, 22 फ़रवरी 2026

अमेरिका - भारत टैरिफ डील

 

"अमेरिका - भारत टैरिफ डील"







2-3 फरवरी, सोमवार की देर रात अमेरिका और भारत के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते  की   अंततः घोषणा हो गयी। अमेरिकन राष्ट्रपति डॉनाल्ड ट्रम्प ने इस व्यापार समझौते की घोषणा करते हुए तत्काल प्रभाव से अमेरिकन टैरिफ 18% होने की घोषणा की। अमेरिका ने अनेकों हथकंडे और दबाव की नीति के तहत भारत पर रूस से तेल खरीदने पर 25% की पेनल्टी एवं 25% अमेरिकन टैरिफ इस तरह कुल 50% का टैरिफ लगाया था। अमेरिका को उम्मीद थी कि भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिका सरकार से, इस टैरिफ को कम करने के लिए अमेरिका से अनुनय-विनय कर याचना करेंगे परंतु उनकी अपेक्षा के विपरीत भारत ने उनकी धमकी और दबाव के विरुद्ध उनकी घुड़कियों को नज़रअंदाज़ करने की नीति पर अमल किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कनाडा मे 16-17 जून 2025 को जी7 शिखर सम्मेलन की बापसी के दौरान  ट्रम्प के मिलने के आमंत्रण को ठुकरा दिया क्योंकि उन्हे उड़ीशा मे पवित्र महाप्रभु की भूमि की पूर्वनियोजित यात्रा करनी थी। यहाँ तक कि प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ अवसरों पर ट्रम्प के टेलिफोन कॉल को भी अटेंड करना आवश्यक नहीं समझा। बड़बोले ट्रम्प की हर बात पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त न करने की प्रधानमंत्री मोदी की  नीति ने आखिरकार ट्रम्प को मजबूरन भारत के  अपने स्वाभिमानी निर्णयों पर अडिग रहकर अमेरिका को घुटनों पर ला दिया और पूर्व मे अपनी 50% टैरिफ को 18% पर ला दिया।

प्रधानमंत्री मोदी के, पूर्व प्रधानमंत्री स्व॰ मनमोहन सिंह से कितने भी मत-मतानंतर रहे हों, लेकिन  स्व॰ मनमोहन सिंह ने  27 अगस्त 2012 को संसद भवन के बाहर एक प्रसिद्ध शेर कहा था जो कि इस अमेरिका और भारत के बीच हुए इस व्यापारिक समझौते पर पूरी तरह से फिट बैठती है:- हजारों जवाबों से अच्छी है मेरी खामोशी, न जाने कितने सवालों की आबरू रखी"। अमेरिका के राष्ट्रपति के हर डींग हाँकने और बड़बोलेपन पर प्रधानमंत्री मोदी की खामोशी ने अमेरिका को भारत से समझौते के लिए मजबूर करना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।   पिछले एक वर्ष से अमेरिकन राष्ट्रपति द्वारा अपने टैरिफ आतंक से दुनियाँ भर के देशों की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया परंतु प्रधानमंत्री मोदी की आपदा मे अवसर तलाशने की अपनी नीति पर चलने के कारण भारत की अर्थव्यवस्था इन सभी संकटों से अछूती रही। जिस भारतीय आर्थिक विकास को अमेरिकन राष्ट्रपति ने मृत ईकोनोमी बताया था और उनके वक्तव्य पर भारत के विपक्षी दलों ने  अपने देश के अर्थशास्त्रियों को कमतर आँकते हुए, अमेरिका के राष्ट्रपति के सुर मे सुर मिला कर अपनी सहमति जतलायी और  सरकार के अर्थशास्त्रियों की  योग्यता, श्रेष्ठता और पात्रता पर सवालिया निशान लगाये, अब अमेरिका से हुए व्यापारिक समझौते पर बगले झांक रहे है। राष्ट्रपति ट्रम्प और भारत के राहुल गांधी जिस भारतीय अर्थव्यवस्था को डैड ईकोनोमी बतला कर भारतीय अर्थव्यवस्था का मखौल उड़ा रहे थे उसी भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास की दर को विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिये 7.2% की दर से विश्व मे सर्वाधिक गति से बढ्ने वाली अर्थव्यवस्था बतलाया है। यह विश्व बैंक की पूर्व के 6.3% के अनुमान से बढ़ी बढ़ोतरी है, जो मजबूत घरेलू मांग और उपभोग को दर्शाता है।    

अमेरिका के इस टैरिफ युद्ध के संकट का आभाष भारत सरकार को था। इसलिए अमेरिका से व्यापारिक समझौते की वार्ता के समानान्तर भारत ने जापान, दक्षिण कोरिया आसियान क्षेत्र के देशों, दक्षिण सार्क देशों, मॉरिशस, संयुक्त अरब अमीरात, आस्ट्रेलिया सहित 13 अन्य देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए और हाल ही मे 27 जनवरी 2026 को भारत और यूरोपियन यूनियन के 27 देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए गये। यूरोपियन यूनियन की प्रमुख उर्सला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते को सभी व्यापार की जननी ("मदर ऑफ ऑल डील्स") कह निरूपित किया। अमेरिका और भारत से हुआ ये व्यापारिक समझौता  इस बात का उदाहरण है कि भारत अपने आत्मसम्मान और नीतियों से सम्झौता किए बिना, बगैर किसी दबाव मे समझौता  करने वाला देश है। इस आशय की खबरें  अमेरिकी समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार सितम्बर 2025 मे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की अमरीका के विदेश मंत्री मार्को रूबियों से मुलाक़ात के दौरान ये स्पष्ट संदेश दे दिया गया था कि यध्यपि भारत अमेरिका के साथ व्यापारिक कड़वाहट दूर कर दोबारा व्यापारिक ट्रेड डील पर बातचीत करने को तैयार है लेकिन भारत किसी भी दबाव मे नहीं आयेगा। यदि अमेरिका इस सबके बावजूद सख्त रुख अपनाता है तो भारत मौजूदा ट्रम्प सरकार के कार्यकाल की समाप्ति तक इंतज़ार कर सकता है। ऐसा नहीं था कि सिर्फ अमेरिका ही व्यापारिक समझौते पर टैरिफ बढ़ा रहा था भारत ने भी दालों पर 30% का शुल्क लगाकर ये दर्शा दिया कि भारत अपने हितों से कोई समझौता करने वाला नहीं है। अमेरिका द्वारा भारत पर 50% टैरिफ बढ़ाने का प्रभाव भारत के निर्यात पर तो था ही लेकिन इस टैरिफ का असर अमेरीकन नागरिकों पर भी हो रहा था क्योंकि उन्हे भी इस बढ़े हुए टैरिफ के कारण वस्तुए महंगी मिल रही थी। अमेरीकन नागरिकों मे भी ट्रम्प के इस टैरिफ के विरुद्ध अमेरिका मे असंतोष व्याप्त है।  

जहां एक ओर इंडि गठबंधन अमेरिका के साथ हुई इस व्यापारिक डील पर संदेह और सवाल खड़े कर भारतीय कृषि और किसानों के लिये आत्मघाती कदम बता रहा था। राहुल गांधी ने इसे जल्दीबाजी भरा कदम बताते हुए अमेरिका के सामने मोदी का घुटने टेकने वाला कदम बताया। उन्होने कहा कि इस समझौते ने किसानों की मेहनत, खून पसीने को बेच दिया। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस डील को देश के हितों से की गई ढील बताया। आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने तो इस समझौते को भारतीय किसानों की पीठ और पेट पर छुरे से हमला बता कर कृषि और डेयरी उत्पाद के दरबाजे अमेरीकन कंपनी के हितों के लिये खोल देने के सरकार के निर्णयों की आलोचना की। वही दूसरी ओर कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्षी दलों के आरोपों को निरधार बतलाते हुए कहा कि समझौते मे खेती-बाड़ी और डेयरी सेक्टर के हितों से सम्झौता नही किया गया। मुख्य अनाज, फल, मिलेट्स डेयरी उत्पादकों के हित पूरी तरह सुरक्षित बताए।

भारत अमेरिका व्यापारिक समझौते पर अभी तमाम चीजें साफ होना बाकी है। कृषि और डेयरी सैक्टर को लेकर जो गतिरोध बना हुआ था उस का हल कैसे निकाला गया यह देखने वाली बात होगी। रूस से तेल की खरीद के कारण जो 25% पेनल्टी लगाई थी वह भी एक अहम मुद्दा है? विपक्ष भी आक्रामक तरीके से सरकार पर हमलावर है इन मुद्दों पर स्पष्टता आना बाकी है। वही वाणिज्य एवं उद्धयोग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत अमेरिका व्यापारिक समझौते के संयुक्त बयान 4-5 दिन मे आने की उम्मीद है, पहले चरण पर मध्य मार्च तक हस्ताक्षर होने की संभावना है।

विजय सहगल               

शनिवार, 14 फ़रवरी 2026

भक्तों को विभक्त करते स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

 

"भक्तों को विभक्त करते स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद"





भारतीय सनातन सांस्कृति के विकास और प्रचार प्रसार मे आदि शंकराचार्य का अति महत्वपूर्ण योगदान है जिससे सनातन धर्मावलंबियों के बीच उत्तर से दक्षिण तक, पूर्व से पश्चिम तक आपसी एकता, संघटन और समन्वय स्थापित हुआ। उनके द्वारा स्थापित भारत की चार दिशाओं मे सनातन हिन्दू धर्म के चार पवित्र तीर्थों यथा जगन्नाथ पुरी, रामेश्वरम, द्वारका एवं बद्रीनाथ  की स्थापना एक असाधारण, अद्व्तिय कार्य था जहां हर सनातनी हिन्दू, जीवन मे एक बार तीर्थ यात्रा पर जाना, दर्शन कर पूजा अर्चना करना, मन मे इच्छा रखता है। आदि शंकराचार्य का जन्म सन 507 ईस्वी पूर्व केरल के कालड़ी नामक ग्राम  मे  हुआ था। पिता शिवगुरु भट्ट, माता अयम्बा की शिवभक्ति से उत्पन्न बालक का नाम शंकर रक्खा गया। मेधावी बालक शंकर जन्म से ही प्रतिभासम्पन्न, बुद्धिमान और प्रतिभाशाली था। 6 वर्ष की अवस्था मे वेद, शास्त्रों के अध्यन के फलस्वरूप प्रकांड पंडित हुए। 8 वर्ष की अल्पायु मे संन्यास ग्रहण कर सनातन धर्म की पताका, ज्ञान, बोध और विध्या के प्रचार हेतु तत्पर हुए। आदि शंकराचार्य ने पूरे भारत के पैदल भ्रमण कर सनातन सांस्कृति और परंपरा की रक्षा हेतु  भारत के चार कोनों मे चार मठों की स्थापना की जिनका सनातन धर्म मे अति महत्वपूर्ण और हिन्दू धर्म मे एक सम्मानीय  स्थान प्राप्त है। ज्योतिषपीठ, श्रृगेरी पीठ, द्वारिका पीठ और पुरी गोवर्धन पीठ। आदि शंकराचार्य के काल से, इन चारों पीठ पर आसीन सनन्यासी को शंकरचार्य कहा जाता है। वेदों, उपनिषदों और श्रीमद्भगवत गीता सहित सनातन धर्म की अन्य अनेकों धार्मिक ग्रन्थों के भाष्य, टीका लिखने का श्रेय आदि शंकराचार्य को दिया जाता है। 32 वर्ष की अल्पायु मे संवत 475 ई॰ पूर्व मे केदारनाथ के समीप वे  शिवलोक गमन कर गये। केदार नाथ मंदिर के पास ही आदि शंकराचार्य जी की समाधि स्थित है। आदि शंकराचार्य को सनातन हिन्दू धर्म मे अद्व्तिय, अमूल्य और अतुलनीय  योगदान के कारण उन्हे भगवान शंकर के अवतार रूप मे प्रतिष्ठा प्राप्त है।

आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार पवित्र पीठों मे से एक ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) पीठ के वर्तमान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की नियुक्ति इस पीठ के पूर्व शंकराचार्य स्वरूपानन्द सरस्वती के निधन के बाद सितम्बर 2022 मे उत्तराधिकारी के रूप मे  हुई। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इस पीठ के 55वे शंकरचार्य है हालाँकि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य होने को लेकर कुछ कानूनी और संतों को लेकर विवाद बना हुआ है और मामला सुप्रीम कोर्ट मे विचारधीन है क्योंकि अन्य मठों के शंकराचार्य उनके मनोनयन से असहमति रखते हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद हमेशा से विवादों के घेरे मे रहे हैं फिर वह चाहे उत्तर प्रदेश मे सफलता पूर्वक सम्पन्न महाकुंभ हो, अयोध्या मे राम जन्मभूमि मे  प्रतिष्ठापित मंदिर हो, प्रयागराज मे माघ मेले का स्नान। अभी हल ही मे 18-19 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के दिन स्नान को लेकर उनका प्रशासन से विवाद चर्चा मे रहा। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने लाव लश्कर और रथ के साथ गंगा स्नान करना चाहते थे, प्रशासन ने भगदड़ जैसे सुरक्षा कारणों की दुहाई देकर उनसे पालकी/रथ छोड़ कर कुछ कदम पैदल चल गंगा स्नान करने  का अनुरोध किया। उन्होने इसे शंकराचार्य का अपमान बता इसे अपने अहम और अहंकार का प्रश्न बना 10 दिन तक धरना दिया और अंत मे मुख्यमंत्री योगी को नकली हिन्दू घोषित कर बुरा-भला कर अपनी राजनैतिक कुंठा का प्रदर्शन किया। प्रत्युत मे मुख्यमंत्री ने बिना उनका  नाम लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तुलना कालनेमि नामक दैत्य से कर उन पर  सनातन धर्म को कमजोर करने के कुप्रयासों मे शामिल होने का आरोप लगाया। दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है की नीति का लाभ उठाते हुए समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के पक्ष मे खड़े दिखाई दिये। ये वही अखिलेश यादव हैं जिन्होने 2015 मे इन्ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर गंगा मे मूर्ति विसर्जन के विरोध मे पुलिस से लाठी चार्ज कर पिटवाया था। प्रायः एक धर्म विशेष  की राजनीति करनेवाले समाजवादी के सांसद अफजल अंसारी और काँग्रेस सांसद इमरान मसूद का  स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के पक्ष आवाज उठाना हतप्रभ, स्तब्ध और अचांभित करने वाला था। क्या हिन्दू धर्म के सर्वोच्च पदासीन किसी धर्माचार्य को ऐसी बातें और व्यवहार शोभा देती हैं? क्या स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के  ऐसे आचार-विचार, आदि शंकराचार्य द्वारा सृजित शंकराचार्य जैसे पद की प्रतिष्ठा और उसकी गरिमा के अनुरूप है?    

13 जुलाई 2024 को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने देश के जाने माने उद्धयोगपति मुकेश अंबानी के पुत्र अनंत अंबानी के चकाचौंध भरे विलास और वैभवपूर्ण विवाह समारोह मे शामिल होकर नवदंपति को आशीर्वाद दिया। यूं तो किसी भी धर्माचार्य, साधू संत को किसी बड़े अमीर, धनी और सम्पन्न उद्धयोगपति, व्यवसायी के निजि कार्यक्रम मे शामिल होने की मनाही नहीं है लेकिन ऐसे धर्माचार्यों से ये भी अपेक्षा की जाती है कि वे एकाधि बार समाज के अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के वैवाहिक कार्यक्रमों मे भी शामिल होते या अपनी  धार्मिक यात्राओं और कार्यक्रमों  मे किसी अनुसूचित जाति के व्यक्ति का अथित्य स्वीकार करते? समाज के उस दबे-कुचले वर्ग जिनको  गाँव मे  छुआछूत और जातिगत विद्वेष और भेदभाव के कारण बारात मे घोड़ी पर चढ़ने और बारात निकालने तक  से वंचित किया जाता है। क्या स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को, सनातन धर्म मे व्याप्त ऊँचनीच, जातिपात के भेदभाव समाप्त करने और जातिगत समरसता फैलाने का कोई उदाहरण प्रस्तुत नहीं करना चाहिये? प्रायः वंचित वर्ग के व्यक्तियों को गाँव के कुएं से पीने का पानी तक लेने से रोक दिया जाता हैं, गाँव के मंदिरों और देवालयों मे अनुसूचित वर्ग के लोगो के प्रवेश पर मनाही कर उन्हे अपमानित किया जाता हैं।  क्या स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जैसे शंकराचार्य/धर्माचार्यों से ये अपेक्षा नहीं की जानी चाहिये कि ऐसी घटनाओं मे उन स्थलों का दौरा कर उन शोषित व्यक्तियों के पक्ष मे खड़े होकर तथाकथित सवर्ण लोगो को जाति उत्पीढन जैसी बुराई के विरुद्ध नसीहत देते? स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जहां उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी को नक़ली हिन्दू का प्रमाण पत्र दे रहे है, क्या उन्होने कभी देश के कुछ हिस्सों से विदेशी मिशनरियों द्वारा सनातन धर्म के वंचित  वर्ग को धन और सुविधाओं  की लालच देकर धर्म परिवर्तन का विरोध किया?  

इसी बीच बरेली के सिटी मैजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के त्यागपत्र पर भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने राजनीति करने मे कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जो पुनः शंकराचार्य के पद और गरिमा के विपरीत था। लोगो का ऐसा मानना है कि इस प्रशासनिक अधिकारी ने  समाजवादी पार्टी के अपरोक्ष समर्थन से राजनीति करते हुए रैगिंग के विरुद्ध बने यूजीसी कानून 2026 के विरोध मे सवर्ण और गैर सवर्ण की कुत्सित राजनीति करते हुए स्तीफ़ा दिया साथ ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य बटुकों पर माघ मेले पर पुलिस के लाठी चार्ज और शंकराचार्य को माघ मेले मे स्नान करने से रोकने के विषय को ब्राह्मण के सम्मान से जोड़ कर  त्याग पत्र का मुद्दा बनाने की कुचेष्टा की। इस विषय मे तत्कालीन सिटी मैजिस्ट्रेट अलंकार  अग्निहोत्री के विरुद्ध तो उत्तरप्रदेश सरकार अपने प्रशासनिक नियमों, क़ानूनों और प्रावधानों के तहत कार्यवाही करेगी पर क्या सनातन धर्म की प्रमुख पवित्र ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) पीठ के प्रमुख को यूजीसी कानून 2026 की  राजनीति मे सवर्णों के पक्ष मे खड़े होने के साथ गैर सवर्ण शूद्र वर्ण पर रैगिंग के माध्यम से होने वाली हिंसक घटनाओं, अत्याचारों  के विरुद्ध उनके पक्ष मे भी नहीं आना चाहिये था? एक धर्माचार्य के पद पर पदासीन होने के कारण उन्हे इस क्षुद्र राजनीति से परे जातिगत विद्वेष पर आग लगाने के विपरीत शीतल जल डाल कर शांत करने के प्रयास नहीं करना चाहिये थे? ताकि सनातन धर्म के चारों वर्णों मे आपसी समरसता को कायम रखते हुए विभाजन को रोका जा सके? इस पर गहन विचार करने की आवश्यकता है।       

विजय सहगल              

रविवार, 8 फ़रवरी 2026

पौराणिक-भद्रकाली मंदिर, कुरुक्षेत्र

 

"पौराणिक-भद्रकाली मंदिर, कुरुक्षेत्र"









दिनांक 29 नवंबर 2025 को अपनी कुरक्षेत्र तीर्थ यात्रा के बाद हमारा अगला पढ़ाव प्राचीन इतिहासिक मंदिर माँ भद्राकाली मंदिर के दर्शन करना था। शहर के मुख्य बाजार मे स्थित मंदिर का प्रांगण काफी विशाल और सुंदर था। कुरुक्षेत्र मे चल रहे अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव की भीड़ भाड़ के बावजूद मंदिर के मैदान मे  वाहन आदि रखने की समुचित और अच्छी व्यवस्था थी। स्वर्णिम रंग से रंगे मंदिर भवन का शिखर दूर से ही  सूर्य की स्वर्णिम किरणों से चमक रहा था। मंदिर की छत्त के सामने की पट्टी पर घोड़ों की मूर्तियाँ सुंदर दिखलाई दे रही थी। पूरा मंदिर परिसर रंग-बिरंगी पताकाओं, फूल और पट्टियों से  से सजाया गया था।  मंदिर के गोपुरम पर भगवा ध्वज फहरा कर सनातन की यश और कीर्ति को चारों दिशाओं मे लहरा रहा था।   मुख्य मंदिर तक पहुँचने, प्रसाद लेने, पानी पीने और टॉइलेट के साथ जूते चप्पल आदि रखने और साफ सफाई की समुचित व्यवस्था थी। मंदिर के मुख्य द्वार मे प्रवेश करते ही सामने माँ भद्राकाली के देवी कूप के भव्य  दर्शन हुए। कुएं की मुडेर पर शेर पर सवार मे दुर्गा  की भव्य और दिव्य प्रतिमा के दर्शन हुए। प्रतिमा के पीछे बने कूप के उपर कमल पुष्प बना हुआ था। मंदिर की वृत्ताकार मुडेर पर सफ़ेद संगमरमर के चार-चार सुंदर घोड़े रक्खे हुए थे।  कुरुक्षेत्र स्थित भद्राकाली मंदिर एक पौराणिक और इतिहासिक महत्व का है। ऐसी मान्यता है कि पुराणों उल्लेखित 51 शक्तिपीठों मे से एक इस स्थान पर देवी सती का दाहिने  पैर का टखना गिरा था, इससे  यहाँ एक कूप बना जिसके दर्शन का सौभाग्य  आज मंदिर कूप को देख कर प्राप्त हुए। इस कूप का वर्णन ब्रह्म पुराण और वामन पुराण मे भी मिलता है।  इसलिए इसे श्री देवीकूप और  श्री सावित्री पीठ के नाम से भी जानते हैं। श्रद्धालुओं की एक छोटी सी लाइन के बाद मुझे मंदिर के गर्भ गृह मे विराजित माँ काली की शांत, सौम्य और भद्राकाली स्वरूप के  दर्शन हुए। लाल चुनरी ओढ़े, चाँदी के सुंदर छत्र के नीचे चाँदी का मुकुट  धारण किये, माँ भद्रकाली की प्रतिमा  आकर्षक आभूषणों से सुसज्जित थी जिनके एक हाथ मे असुरों का नाश करने का प्रतीक खड़ग थी। चाँदी के सिंहासन की पृष्ठभूमि पर बारीक वेलबूटे और दोनों ओर  हंस की जोड़ी को सुंदर ढंग से उकेरा गया था। सिंहासन पर भगवान शिव लिंग और भगवान गणेश की प्रीतिमाएं भी दिव्य ज्योति के पास मे ही विराजित थी।    

महाभारत युद्ध के पूर्व भगवान श्रीकृष्ण के आग्रह और प्रेरणा से अर्जुन ने महाभारत युद्ध मे विजय आशीर्वाद प्राप्त करने  हेतु  माँ भद्रकाली मंदिर मे पूजा अर्चना की थी और विजय के पश्चात अपने घोड़े माँ भद्राकाली को अर्पित करने का बचन दिया था। महाभारत युद्ध विजयी के बाद अर्जुन ने माँ के चरणों मे अपने घोड़ो का दान किया था। तभी से इस मंदिर मे भी ऐसी मान्यता है कि जिन भक्तों और श्रद्धालुओं की मनोकामनाएँ पूर्ण हो जाती है वे मंदिर मे माँ भद्रकाली मंदिर मे अपनी श्रद्धा और क्षमता अनुसार मिट्टी, चीनी मिट्टी, चाँदी और सोने के घोड़ो के स्वरूप  को मंदिर मे अर्पित करते हैं। मंदिर मे देवी माँ के कूप के चारों ओर बनी वृत्ताकार दीवार पर श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित इन घोड़ो की प्रतिमाओं को देखा जा सकता है। मंदिर के एक कक्ष मे भगवान श्रीकृष्ण-राधा, भगवान ब्रह्मा और भगवान श्रीराम-सीता की भव्य मूर्तियाँ भी रक्खी हुई थी। मंदिर मे ही एक कक्ष मे  पौराणिक मान्यता हैं कि भगवान श्रीकृष्ण और उनके अग्रज बलराम जी का भी मुंडन संस्कार यहाँ हुआ था।

मंदिर  परिसर मे ही एक अति प्राचीन वट वृक्ष के दर्शन भी कृतार्थ करने वाले थे। ऐसी मान्यता है कि उक्त वृक्ष मे महाभारत कालीन दिव्य वृक्ष है। दिव्य कूप के जल का आचमन और माँ भद्राकाली के प्रसाद का पान कर जब हम मंदिर मंडप से बाहर आए। ठीक  सामने ही शनि मंदिर मे भगवान शनि देव के दर्शन कर आगे की यात्रा के लिए श्रीमद्भगवत गीता की जन्मस्थली ज्योतिसर के दर्शनार्थ आगे बढ़ गए।        

विजय सहगल