रविवार, 16 नवंबर 2025

"भीमा शंकर, ज्योतिर्लिंग, पुणे"

 

"भीमा शंकर, ज्योतिर्लिंग, पुणे"










बैसे तो अब तक मै देश के विभिन्न हिस्सों मे स्थित 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर चुका हूँ। हाल ही मे पिछले माह जुलाई 2025 मे भीमाशंकर और घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग के साथ पूरे बारह ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए थे। अभी हाल ही मे अक्टूबर  2025 मे बनारस मे  बाबा विश्वनाथ और देवघर मे बाबा बैजनाथ के दर्शन किए जो हिन्दू धर्म मे एक पवित्र धार्मिक यात्राओं मे से एक पुण्य कार्य समझा जाता है। इन बारह ज्योतिर्लिंगों की यात्रा के अपने अनुभव के आधार पर  बनारस के बाबा विश्वनाथ के मंदिर का प्रबंधन सर्वोत्तम रहा जहां का रखरखाब, दर्शनार्थियों की सुविधाओं की दृष्टि से सारी व्यवस्थायेँ  हर पैमाने पर अतिउत्तम थी इसके विपरीत भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के मंदिर के  प्रबंधन की व्यवस्था पूरी तरह से अव्यवस्थित थी   तथा  दर्शनार्थियों के लिये सुख सुविधाओं की दृष्टि से अति निम्नस्तरीय कहा जायेगा। लेकिन बाबा बैजनाथ धाम मे तो मंदिर प्रबंधन कहीं दूर दूर तक नज़र नहीं आता। हर तरफ मंदिर मे पंडे, पुजारियों के वर्चस्व मे अराजकता और अव्यवस्था ही नज़र आती है।  

चलिये, फिर भी  इस दक्षिण-पश्चिम  यात्रा मे मेरा इरादा पुणे के नजदीक भीमा शंकर और घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग थे। अपने समुद्र तटीय यात्रा के अगले पड़ाव के रूप मे हमारा लक्ष्य महाराष्ट्र राज्य पुणे के नजदीक सनातन धर्म के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंग मे से एक भीमा शंकर मंदिर था। बैसे मेरा लक्ष्य सह्याद्रि पर्वत शृंखला पर स्थित भीमशंकर ज्योतिर्लिंग के दर्शन पश्चात आगे की यात्रा के रूप मे  छत्रपति संभाजीनगर मे स्थित घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के  लिए बढ़ना था पर जब हमारे मित्र श्याम टंडन और उनकी पत्नी आशा ने भी हम लोगो के साथ चलने की मनसा जतलाई तो हम दोनों की भी प्रसन्नता की सीमा न रही।      

भीमा शंकर ज्योतिर्लिंग के बारे मे एक पौराणिक कथा हैं कि जब भगवान ब्रह्मा जी के बरदान से राक्षस भीमा जो कि कुंभकरण का पुत्र था देवताओं पर अत्याचार करने लगा। जब राजा सुदक्षिण ने पार्थिव शिव लिंग का निर्माण कर भगवान शिव की पूजा अर्चना की तो राक्षस भीमा ने उन्हे मारने का कुत्सित प्रयास किया। तब भगवान शिव ने प्रकट होकर अपनी क्रोधाग्नि से राक्षस भीमा का वध किया। देवताओं के अनुरोध पर तभी से ज्योतिर्लिंग के रूप मे स्थापित हो गए। सह्याद्रि पर्वत श्रंखला के बीच यह क्षेत्र वन्य जीव अभ्यारण मे स्थित होने के कारण यह क्षेत्र हरियाली, झरनों, जंगलों और वन्य जीवन के लिए जाना जाता है। 11 जुलाई 2025 को सावन मास  के प्रथम दिन  प्रातः लगभग 7 बजे हम चारों लोगों ने जब पुणे से लगभग 125 किमी दूर इसी जिले के खेड़ तालुका के भीमाशंकर गाँव मे स्थित बारह  पवित्र ज्योतिर्लिंगों मे से एक भगवान शिव के भीमाशंकर तीर्थ के लिए प्रस्थान किया तो अंदेशा तो था कि सावन महिना होने के कारण भीड़ मिलेगी पर हम जिस मंचर, फूलेगाँव, वाघोली मार्ग से  होकर जा रहे थे, वहाँ,  कहीं कोई ट्रेफिक नहीं दिखलाई दिया। लेकिन जैसे ही हम भीमाशंकर गाँव से कुछ किमी पहले पहुंचे तो वाहनों, बसों और लोगों की भीड़ देख कर हतप्रभ थे।

मुख्य मंदिर से लगभग दो किमी पहले ही पुलिस ने यातायात व्यवस्था बनाए रखने हेतु हमारी कार सहित सभी चार पहिया वाहनों को एक अस्थाई पार्किंग की ओर मोड़  दिया। पार्किंग भी ऊबड़-खाबड़, छोटे बड़े चट्टानी पत्थरों से भरी, कच्चे रास्ते मे थी और  पूरी तरह अव्यवस्थता व्याप्त थी। पार्किंग से लगभग डेढ़-दो किमी मंदिर क्षेत्र तक जाने के दो विकल्प थे या तो आप पैदल जाएँ या पीछे से आ रही महाराष्ट्र राज्य परिवहन निगम की बसों  मे चढ़ कर मंदिर क्षेत्र पहुंचे। पर अपर्याप्त बसों के कारण व्यवस्था व्यवस्था पूरी तरह तहस-नहस थी। ऊपर से बरसात  होने के कारण जैसे तैसे हम लोग भीगते हुए बस मे चढ़ कर मंदिर के प्रवेश द्वार पर पहुंचे।

उत्साह, उमंग से भरपूर दर्शनार्थ आए श्रद्धालुओं को ज्योतिर्लिंग के दर्शन की जानकारी हेतु कहीं कोई सूचना या जानकारी नहीं दिखलाई दी। ज्ञात हुआ कि मंदिर के दर्शन हेतु लगभग सौ-सवा सौ सीढ़ियाँ उतर कर जाना पड़ेगा। बायीं तरफ बनी दो लाइनों की रेलिंग मे दर्शनार्थी लाइन मे खड़े थे। जूते चप्पल आदि रखने की कहीं कोई व्यवस्था नहीं थी। सीढ़ियों के दोनों ओर प्रसाद, नाश्ता, फल फूल आदि की दुकाने बनी हुई थी।  बरसाती पानी अपने साथ लाये कूड़ा-कचरा के साथ सीढ़ियों से बहता हुआ श्रद्धालुओं के पैरों से होकर निकल रहा था। अनेकों  लोगो की लाइन मे प्रसाधन की कहीं कोई वयवस्था न होना मंदिर और शासन की अकर्मण्यता और अदूरदर्शता को दिखला रहा था। पूरी सीढ़ियों पर  बरसाती पानी और उसके साथ आए कचरे से गंदगी का साम्राज्य नजर आ रहा था। लाइन मे खड़े लोगो को बैठने की तनिक भी कहीं-कोई व्यवस्था नहीं थी। भाजपा शासित राज्य मे सनातन धर्म के बारह पवित्र ज्योतिर्लिंग तीर्थों  मे एक इस भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मे  ऐसी अराजकता, अस्तव्यस्तता, अव्यवस्था देखना मन को दुःखी कर रहा था। जगह जगह ऐसे असामाजिक तत्वों से सावधान रहने की चेतावनी के बोर्ड लगे थे जो पैसा लेकर शीघ्र दर्शन कराने का दावा करते हों, पर  फिर भी ऐसे पंडे पुजारी, लोगो को ले  जाकर लाइन मे आगे लगाते दिखे, जो मंदिर प्रशासन की ढील-पोल की पोल खोलते दिखे। मंदिर मे ज्योतिर्लिंग के दर्शन मे पाँच घंटे से ज्यादा लगे समय के चलते, मंदिर परिसर के नजदीक आने पर ये देख मन एक बार फिर दुखी हुआ क्योंकि मंदिर परिसर को बड़े बड़े टीन शेड और टेंट से ढँक दिया गया था। लाइन मे लगे कर चलते हुए पुरातन  मंदिर के वास्तु  सौन्दर्य को देखते हुए लाइन मे चलते तो शायद लाइन का दुःख दर्द कुछ कम होता।   

5-6 घंटे की कष्टदायक, पीढ़ादायक और मंदिर की निराशजनक  व्यवस्था की लंबी यात्रा के  बाद  जैसे ही मंदिर के बड़े मंडप गृह मे  कदम रखा  तो सारे दुःख दर्द भूल गए और सधे  कदमों से चंद कदमों की दूर मंदिर के पवित्र गर्भ गृह की ओर कदम बढ़ चले। चंद मिनटों के बाद जैसे ही हम लोग मंदिर के प्रवेश द्वार को पार कर मंदिर के गर्भ गृह मे स्थापित भगवान भीमा शंकर, ज्योतिर्लिंग को स्पर्श कर वंदन, अभिनंदन कर दर्शन किये तो अपने जीवन को धन्यभागी मान, ईश्वर के प्रति कृतज्ञता  ज्ञपित की। दर्शनों के पश्चात बापस रंग मंडप मे परिक्रमा कर मंदिर परिसर के बाहर निकले। बाहर निकलने पर मंदिर के शिखर के दर्शन कर मन एक बार पुनः प्रसन्न हो गया। यहाँ पर मोबाइल से फोटो लेना सहज था इसलिए कुछ फोटो मंदिर के शिखर के लिये। मंदिर के बाहर, भगवान शिव के वाहन नंदी की अति प्राचीन जोड़ी और  एक विशाल मिश्रधातु के अति प्राचीन, (सन 1729 मे निर्मित) विशाल घंटे को देखना भी कौतूहल से कम न था। दक्षिण पश्चिम के कोंकण और महाराष्ट्र के मंदिरों  मे प्रायः एक कलात्मक दीप स्तम्भ की उपस्थिती यहाँ भी देखने को मिली। मंदिर के बाहरी दरवाजे पर एक पवित्र कुंड जिसमे शायद ज्योतिर्लिंग पर चढ़ाया गया पवित्र जल एकत्रित किया गया था।  

दर्शन उपरांत एकबार पुनः उन्ही सीढ़ियों पर चढ़ते हुए बापस अपने गंतव्य पुणे के लिए हमलोगों ने  प्रस्थान किया।   

विजय सहगल

                

 

1 टिप्पणी:

बेनामी ने कहा…

बहुत सुंदर ढंग से आपने भीमाशंकर की यात्रा का वर्णन करने के साथ आगे जाने वालो के लिए एक दिशानिर्देश का काम भी किया । भीमाशंकर में फैली अव्यवस्था वाक़ई बीजेपी जैसे राज्य में उनकी कथनी और करनी की तरफ़ स्पष्ट संकेत है। इस विषय को संबंधित लोगों तक पहुँचाना चाहिए । आपको ,भाभी जी ,श्याम जी व आशा जी को भीमाशंकर दर्शन की हार्दिक शुभकामनाएँ ।