रविवार, 19 जनवरी 2025

कनाडा-प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का भारत विरोधी राजनीति का पटाक्षेप

 

"कनाडा-प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का भारत विरोधी राजनीति का पटाक्षेप







अंततः कनाडा के 53 वर्षीय प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने 6 जनवरी 2025 को अपने पद से स्तीफ़ा दे दिया। वे अपनी लिबरल पार्टी के 11 साल एवं पिछले 9 (सन 2015 से) सालों से कनाडा के प्रधानमंत्री थे। विदित हो कि जस्टिन ट्रूडो के विरुद्ध कनाडा की विपक्षी पार्टीयों  का  ट्रूडो सरकार के विरोध मे 27 जनवरी को  अविश्वास प्रस्ताव लाने का कार्यक्रम था। कनाडा की गिरती अर्थव्यवस्था, अपनी ही पार्टी मे जस्टिन ट्रूडो के विरुद्ध असंतोष के चलते और भारत से अनावश्यक पंगा लेने के कारण उन्हे त्यागपत्र देने के लिये बाध्य होना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम मे अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कनाडाई आयात पर 25% शुल्क लगाने की धमकी के डर के  कारण बताते हुए न केवल उन्हे अमेरिका के 51वे राज्य का  गवर्नर कह कर उनका मखौल उड़ाया अपितु कनाडा को अमेरिका का 51वां  राज्य घोषित करते हुए कनाडा राज्य का मानचित्र भी जारी कर दिया! कनाडा जैसे एक संप्रभु राष्ट्र के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का इस तरह मखौल उड़ाना जस्टिन ट्रूडो का अपमान नहीं तो क्या है? कदाचित ही किसी राष्ट्र प्रमुख की ऐसी छीछालेदर कभी देखी या सुनी गयी हो। यह इस बात का प्रमाण हैं कि भारत के साथ अमेरिका से भी कनाडा के रिश्ते अब उतने सहज, सुगम और प्रिय नहीं हैं। पिछले ढाई साल से जस्टिन ट्रूडो न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) के समर्थन से अपनी अल्पमत की सरकार चला रहे थे।           

जस्टिन ट्रूडो के प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए जहां एक ओर ट्रूडो ने भारत विरोधी, खलिस्तान समर्थक लोगो को पराश्रय देकर भारत के आंतरिक मामलों मे सीधा हस्तक्षेप कर कनाडा के  प्रधानमंत्री जैसे सम्मानजनक पद की गरिमा, प्रतिष्ठा और गौरव को शर्मसार और लज्जित किया था वहीं दूसरी ओर  कनाडा और भारत के संबंध बद से बदत्तर हालत मे पहुंचाने का कुत्सित कृत्य किया।  हालात यहाँ तक पहुंचे कि  दोनों देशों ने एक दूसरे के राजनीयकों को अपने अपने देश से बाहर निकालने जैसे अप्रिय और कठोर कदम उठाने के लिये बाध्य होना पड़ा। अपनी सत्ता और शासन बनाये रखने के लिये जस्टिन ट्रूडो,  भारत पर झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाते हुए अभिव्यक्ति की आज़ादी की आढ़ मे भारत मे सर्वाधिक वांछित खालिस्तानी आतंकवादी गुरूपतवन्त सिंह पन्नु और अन्य खालिस्तानी समर्थकों को कनाडा मे अपनी गतिविधियों के संचालन और उनको  शरण देने मे लिप्त रहे।

यह लिखना अतिसन्योक्ति न होगी कि जस्टिन ट्रूडो के प्रधानमंत्रित्व काल मे कनाडा मे खालिस्तान समर्थक तत्वों की गतिविधियों मे वृद्धि हुई। खालिस्तानी समर्थकों ने भारतीय उच्चायोग और वाणिज्यिक दूतावास के बाहर हिंसक प्रदर्शन कर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया। इन आतंकवादियों ने भारत विरोधी नारे लगाये और भारतीय लोगो के साथ हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया। भारत ने इन घटनाओं के विरुद्ध अपना कड़ा  विरोध जताते हुए कनाडा सरकार से सख्त कार्यवाही की मांग की लेकिन अफसोस जस्टिन ट्रूडो ने अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर इन भारत विरोधी तत्वों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की अपितु उनकी गतिविधियों को पाला पोषा।  

सितम्बर 2023 मे दिल्ली मे आयोजित जी20 देशों के शिखर सम्मेलन मे आये कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो से मुलाक़ात के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा मे खालिस्तानी आतंकवादियों की गतिविधियों पर कड़ी नाराजगी जाहिर की पर दुर्भाग्य से जस्टिन ट्रूडो द्वारा कोई कार्यवाही की बजाय इसे उनके देश का आंतरिक मामला बतला कर भारत की चिंताओं को नज़रअंदाज़ कर मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया।

जून 2023 मे कनाडा स्थित खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की आपसी प्रतिद्वंदिता मे हुई हत्या को, प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कनाडाई संसद मे इस  हत्या मे भारत का हाथ बता कर भारत-कनाडा सम्बन्धों को निकृष्टम स्थिति मे ला  दिया। भारत ने प्रतिवाद करते हुए इसे आधारहीन, बेतुका और मनगढ़ंत बतला कर सबूत देने का आग्रह किया। लेकिन कनाडा की सरकार कोई भी ठोस सबूत पेश न कर सकी। इन छद्म आरोपों के चलते दोनों देशो ने एक दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित कर, जस्टिन ट्रूडो ने एक और  अप्रिय स्थिति उत्पन्न कर दी।      

कनाडा मे खालिस्तानी अलगाववादियों की लगातार भारत विरोधी गतिविधियों पर अंकुश न लगा पाने के कारण भारत ने कनाडा के साथ चल रही व्यापार बातचीत रोक दिया और भारत कनाडा व्यापार सम्झौता, अनिश्चित काल के लिये स्थगित कर दिया। भारत ने राजनयिकों की सुरक्षा के मुद्दे पर कनाडाई नागरिकों को के लिये वीजा सेवाओ को काफी सीमित या निलंबित कर दिया।

भारत कनाडा सम्बन्धों की निम्नता की पराकाष्ठा तब हुई जब कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने, न केवल भारत के हाई कमिश्नर संजय कुमार वर्मा और दूसरे वरिष्ठ राजनयिकों जासूसी के अनैतिक और अनर्गल आरोप लगाये अपितु भारत के गृह मंत्री अमित शाह पर कनाडा मे स्थित खालिस्तानी समर्थकों के सफाये का आदेश जारी करने के मनगढ़ंत आरोप लगा कर भारत-कनाडा सम्बन्धों को  गंभीर से गंभीरतम स्थिति मे ला दिया। भारत सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर कनाडा के विरुद्ध सख्त कदम उठाए।

जस्टिन ट्रूडो ने अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिये, भारत विरोधी अधम राजनीति ने, न केवल भारत मे अपितु अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी कनाडा को अलग-थलग कर दिया। कनाडा के  बिगड़ते  आर्थिक हालातों, देश मे जस्टिन ट्रूडो की गिरती छवि और उनकी अपनी, लिबरल पार्टी मे विरोध के चलते उनके राजनैतिक पतन को सुनिश्चित कर दिया। अमेरिका और भारत जैसे बड़े व्यापारिक और कूटनैतिक साझेदार के चलते अंततः कनाडा के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिये बाध्य होना पड़ा। इस तरह 2025 नववर्ष  का शुभागमन पर, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की कनाडाई राजनीति मे विदाई सुनिश्चित कर दी।  इस तरह जस्टिन ट्रूडो के  स्तीफे  ने   भारत विरोधी राजनीति का  पटाक्षेप कर दिया।     

विजय सहगल         

रविवार, 12 जनवरी 2025

पूर्व प्रधानमंत्री के निधन पर राजनीति

 

"पूर्व प्रधानमंत्री के निधन पर राजनीति"





विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह का 26 दिसम्बर 2024 को 92 वर्ष की उम्र मे दिल्ली मे दुःखद निधन हो गया। वे 22 मई 2004 से  26 मई 2014 तक दो बार भारत के प्रधानमंत्री रहे। उन्हे स्व॰ पी व्ही नरसिम्हा राव के प्रधानमंत्रित्व काल मे वित्त मंत्री के रूप मे किए गये आर्थिक उदारीकरण एवं आर्थिक  सुधारों के लिए भी श्रेय दिया जाता हैं।

उनके निधन की इस दुःखद घड़ी मे कॉंग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे और कॉंग्रेस सांसद  राहुल गांधी उनके स्मारक हेतु जमीन आवंटन कर, उस पर अंतिम संस्कार करने और यादगार स्मारक बनाने हेतु की गयी मांग पर हुई  राजनीति ने इस संकट की घड़ी मे एक असहज और अप्रिय स्थिति उत्पन्न कर दी!! सरकार द्वारा दिवंगत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की याद मे स्मारक हेतु भूमि के आवंटन का आश्वासन देने के साथ ही एक समिति के गठन की घोषणा के बावजूद राहुल गांधी का ये ब्यान आश्चर्य और चिंताजनक था कि एक दशक तक प्रधानमंत्री रहे डॉ मनमोहन सिंह का निगम बोध घाट पर अंतिम संस्कार करवा कर मोदी सरकार द्वारा उनका सरासर अपमान किया गया!! ये समझ से परे है कि दशकों से जिस निगम बोध घाट दिल्ली मे देश के सैकड़ों गणमान्य महापुरुषों, राजनैतिज्ञ हस्तियों देशभक्त नागरिकों का अंतिम संस्कार किया गया तब अपमान की बात करने का क्या औचित्य?  ऐसी मान्यता हैं कि इस शमशान घाट के स्थापना महाभारत काल मे पांडवों के सबसे बड़े भाई और इंद्रप्रस्थ के राजा युधिष्ठिर ने की थी जहां पर हिन्दू रीति रिवाज से मृतकों का दाह संस्कार किया जाता है। दिल्ली के सबसे पुराने, 1898 से स्थापित निगम बोध घाट जहां पर जनसंघ के नेता दीन दयाल उपाध्याय, पूर्व उपराष्ट्रपति कृष्णकांत, दिल्ली के मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, अरुण जेटली  जैसे दिग्गज नेताओं का अंतिम संस्कार किया गया, तब  वहाँ पर माननीय मनमोहन सिंह के  अंतिम संस्कार से उनका सरासर अपमान कैसे? जिस प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अध्यादेश को 2013 मे सार्वजनिक रूप से राहुल गांधी ने  फाड़ कर मनमोहन सिंह का अपमान किया था, आज उनके सम्मान के प्रति राहुल गांधी की व्याकुलता, बेचैनी और बेकरारी देख कर देश के लोगो को निश्चित ही प्रसन्नता हुई होगी!! 

डॉ मनमोहन सिंह जैसे विद्वान व्यक्ति जो  भारतीय राजनीति मे निःसन्देह भारत के  निर्विवाद प्रधानमंत्री थे, के देहांत पर राजनीति करना अनावश्यक और अप्रिय है। जब सरकार ने उनके निधन पर उनके स्मारक के लिये जमीन की सिद्धांतः  स्वीकारोक्ति  प्रदान करने के बावजूद  राहुल गांधी की स्व॰ मनमोहन सिंह के स्मारक के लिये भूमि की ये मांग  कि, सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों की गरिमा का आदर करते हुए उनके अंतिम संस्कार उनके अधिकृत समाधि स्थलों पर किये गये.... चौंकाने वाली हैं?

राहुल गांधी आगे एक्स पर लिखते हैं कि सरकार को देश के इस महान पुत्र और उनकी गौरवशाली कौम के प्रति आदर दिखाना चाहिये था........!! इसमे कोई दो राय नहीं कि स्व॰ मनमोहन सिंह न केवल भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री रहे अपितु एक अर्थशास्त्री के रूप मे विश्व मे ख्याति अर्जित की जो अतुलनीय है। लेकिन सिक्ख जैसी गौरशाली कौम के प्रति राहुल गांधी और कॉंग्रेस का आदर उस समय कहाँ गया था जब 1984 मे इन्दिरा गांधी की हत्या के बाद पूरे देश मे सिक्खों का नरसंहार किया गया था? ये तो उचित ही है कि सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री  स्व॰ मनमोहन सिंह के भव्य स्मारक के लिये सिद्धांतः स्वीकृति प्रदान कर दी है और बक़ौल गृह मंत्री अमित शाह कि स्मारक के संबंध मे  शीघ्र ही कार्यवाही आगे बढ़ेगी।

विदित हो कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व॰ पी व्ही नरसिम्हा राव के निधन 23 दिसम्बर 2004 मे जब हुआ था तब इसी कॉंग्रेस पर आरोप लगे थे कि उसने नरसिम्हा राव के  अंतिम संस्कार को दिल्ली मे नहीं करने दिया था और स्मारक हेतु कोई भूमि आवंटित नहीं की गयी थी,  यही नहीं उनके पार्थिव देह को कॉंग्रेस ने अपने मुख्यालय मे अंतिम दर्शन हेतु भी रखने नहीं दिया था। अगर मान भी ले कि उनके परिवार जन उनके शव को हैदराबाद ले जाना चाहते थे तब भी पूर्व प्रधानमंत्री स्व॰ नरसिम्हा राव के  स्मारक के लिये कॉंग्रेस ने कभी क्यों मांग नहीं की? इसी तरह भारत के पूर्व प्रधानमंत्रियों स्व॰ मोरारजी देसाई (24 मार्च 1977 से 28 जुलाई 1979)  स्व॰ विश्वनाथ प्रताप सिंह (2 दिस॰ 1989 से 10 नव॰ 1990), स्व॰ चन्द्र शेखर (10 नव॰ 1990 से 21 जून 1991) के स्मारक क्यों नहीं दिल्ली मे बनवाये गये इसके विपरीत   स्व॰ संजय गांधी के निधन के बाद उनका स्मारक राजघाट और शांतिवन के नजदीक, किस हैसियत से बनवाया गया? क्या कॉंग्रेस इस पर भी कुछ प्रकाश डालेगी?

विजय सहगल

शनिवार, 4 जनवरी 2025

मध्य प्रदेश- डॉ मोहन यादव के शासन का एक वर्ष?

 

मध्य प्रदेश- डॉ मोहन यादव के शासन  का एक वर्ष?





13 दिसम्बर 2024 को  मध्य प्रदेश मे डॉ॰ मोहन यादव के मुख्यमंत्रित्व काल का एक वर्ष पूरा हो गया। पिछले वर्ष 2023 मे मध्य प्रदेश मे हुए राज्य के चुनावों मे पूर्व मुख्य मंत्री शिवराज सिंह के नेतृत्व मे मिले स्पष्ट बहुमत के बावजूद  राज्य सरकार की कमान डॉ मोहन सिंह यादव को दी गयी थी। मध्य प्रदेश मे लोक सभा चुनाव 2024  मे भी भाजपा को मिली अभूतपूर्व सफलता का श्रेय भी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और डॉ मोहन सिंह यादव  को देने की होड़ लगी रही थी, लेकिन राज्य और केंद्र के लिये हुए इन दोनों ही चुनावों मे भाजपा को मिले बेमिसाल बहुमत को, राजनैतिक पंडित  जानते हैं  कि, भाजपा को ये जीत शिवराज सिंह या डॉ मोहन सिंह के प्रयासों से नहीं मिली अपितु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकसोन्मुख   नीतियों, कार्यक्रमों  और इन सबसे बढ  के उनकी ईमानदार छवि के कारण मिली। यही कारण है कि  मध्य प्रदेश के निम्न, मध्यम और उच्च मध्यम वर्गीय आबादी द्वारा,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी  निष्ठा और प्यार का इज़हार  उनको बहुमत से चुनाव जिता कर दिया। नरेंद्र मोदी का  देश और देश के लोगों के प्रति प्यार, समर्पण, देश के साधारण मानवी के विकास के लिये अपनी वचन बद्धता, इस बात का परिचायक है, जो उन्हे उनकी ही पार्टी के लोगो से अलग रखती  है।

क्या कारण है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह अपने लगभग 15 वर्ष के कार्य काल मे अपनी वो छवि या  पहचान नहीं बना पाये जैसे नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्य मंत्री रहते हुए अर्जित की थी और बाद मे प्रधानमंत्री के अपने एक दशक के कार्यकाल मे उपार्जित  की हैं। भाजपा शासित राज्यों मे सिर्फ उत्तर प्रदेश मे योगी ही एक मात्र ऐसे मुख्यमंत्री है जो अपनी ईमानदारी और कर्मठ मुख्यमंत्री की छवि बनाने मे कामयाब हो सके जैसे कि  प्रधानमंत्री मोदी की है। वेशक मध्य प्रदेश की सड़क परिवहन, आधारभूत  अधोसंरचना, कृषि और सिंचाई, समाज के पिछड़े और  वंचित लोगो के उत्थान   आदि मे केंद्र सरकार के सहयोग से शिवराज सरकार ने कार्य किए हों पर सालों साल व्यापम जैसे बड़े घोटाले ने  प्रदेश के लाखों युवकों और बेरोजगार नौजवानों के जीवन से खिलवाड़ किया। आम जनता के जीवन से जुड़े विभागों जैसे नगर पालिका या नगर निगमों, पंचायतों, जमीन और कृषि भूमि से जुड़े तहसील कार्यालयों, शिक्षा विभाग, पंजीयन कार्यालयों, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों, शहर विकास प्राधिकारणों, मध्य प्रदेश गृह निर्माण मंडलों के कार्यालयों   मे व्याप्त  लाला फीताशाही, बेईमानी, भ्रष्टाचार पर कोई अंकुश कदाचित ही लगा पाये। मध्य  प्रदेश के इन कार्यालयों मे  जन साधारण को दिन प्रतिदिन के कार्यों जैसे खसरा खतौनी, मकान निर्माण के लिये नक्शों की अनुमति, नामांतरण, लीज पंजीकरण, लीज़ नवीनीकरण, वाहन पंजीकरण, ड्राइविंग लाइसेन्स बनवाने या नवीनीकरण, मकान की खरीद बिक्री का पंजीकरण आदि कराने  जैसे कार्यों के लिये अच्छी ख़ासी रकम रिश्वत के रूप मे देनी पड़ती है। कहने के आशय यह है कि शिवराज सिंह चौहान, अपने कार्यकाल मे सालों से पदस्थ इन बाबुओं और अफसरों के काकश पर लगाम नहीं लगा पाये। इन विभागों के अधिकारी कर्मचारी भ्रष्टाचार और रिश्वत को अपना जन्मसिद्ध अधिकार मान कर चलते हैं। ईमानदारी से अपने कार्यों को संपादित कराने वाले नागरिकों को  ये बाबू और अधिकारी परेशान और प्रताड़ित करते हैं। मध्य प्रदेश मे भ्रष्टाचार के इस सबूत को  हाल ही मे परिवहन विभाग मे साधारण कॉन्स्टेबल रहे सौरभ शर्मा के घर मे पड़ी रेड से देखा जा सकता है जिसमे देश के अब तक की सबसे बड़ी सोने, चाँदी और नगदी की बरामदगी है। उसकी एक गाड़ी मे ही 54 किलो सोना और 11 करोड़ नगदी की बरामदगी है। आये दिन समाचार पत्रों मे छोटे-छोटे कर्मचारियों के घर से करोड़ो रूपये की बरामदगी के समाचार आते रहते हैं।    

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 13 दिसम्बर 2023 मे राज्य शासन  की बागडोर डॉ मोहन सिंह यादव के हाथ मे सौंपे जाने पर ऐसा लगता था कि इन विभागों के कार्य प्रणाली मे अमूल चूल परिवर्तन नज़र आएंगे? पर दुर्भाग्य से डॉ मोहन यादव के एक वर्ष के कार्यकाल मे रंच मात्र भी परिवर्तन नज़र नहीं आता? जब केंद्र सरकार के आयकर, रेल विभाग और अन्य विभागों मे  कम्प्युटर की सहायता से भ्रष्टाचार समाप्त किया जा सकता है तो उसी सूचना प्रौध्योगिकी के उपयोग से मध्य प्रदेश  राज्य सरकार के इन विभागों से बेईमानी और भ्रष्टाचार क्यों समाप्त नहीं किया  जा सकता? राज्य के सामान्य मानवी को मध्य प्रदेश के इन विभागों के दीर्घ सूत्री और भ्रष्ट बाबुओं और अफसरों के अत्याचारों  से छुटकारा कब मिलेगा, भगवान जाने!! छोटे छोटे कार्यों के लिये, जन साधारण को बेईमान बाबुओं और अधिकारियों से कब  निजात मिलेगी?, ऊपर वाला जाने!! परंतु दुर्भाग्य से ये दस्तूर आज भी जारी हैं। कॉंग्रेस शासन से चली आ रही  भ्रष्ट कार्य प्रणाली, बदस्तूर आज भी जारी हैं। राज्य शासन द्वारा अपने विभागों मे आधा  अधूरा कम्प्युटरिकरण प्रदेश के नागरिकों का न  केवल आर्थिक शोषण कर रहा है अपितु छोटे छोटे  कामों पर अनावश्यक बिलंब कर  रहा है। ई-रजिस्ट्री इस बात का जीवंत उदाहरण हैं। किसी भी दस्तावेज़ का पंजीकरण कराने के लिये सेवा प्रदाताओं अर्थात दलालों के रूप मे नियुक्ति को  पंजीकरण कार्यालयों मे चारों ओर देखा जा सकता हैं। किसी भी कार्यालय मे बगैर दलालों के कोई भी कार्य असंभव हैं। क्यों नहीं राज्य शासन के मंत्रीगण आम नागरिकों द्वारा इन विभागों मे होने वाले भ्रष्टाचार से अनिभिज्ञ हैं। क्यों ऐसे कदम राज्य सरकार नहीं उठाती ताकि सामान्य नागरिकों के जीवन मे भ्रष्टाचार रहित जीवन जिया जा सके।

इन आम चुनावों मे सनातन के नाम से भी राज्य और केंद्र सरकार ने, सबका साथ सबका विकास का नारा दिया। बटेंगे-तो कटेंगे, एक हैं तो सेफ हैं जैसे नारों ने सरकार मे नई ऊर्जा और स्फूर्ति दी परन्तु खेद और अफसोस हैं कि राज्य के उपर्युक्त विभागों मे पदस्थ सनातनी बाबुओं और सनातनी अफसरों ने ही प्रदेश के सीधे-सच्चे सनातनी नागरिकों ही,  भ्रष्टाचार और बेईमानी के रूप मे रिश्वत और घूस  से पीढ़ित हैं!! इन भ्रष्ट बाबुओं और अफसरों के दिल मे क्यों सरकार सनातनी भाव, भ्रातृत्व पैदा नहीं कर सकी? ये घूसखोर, विधर्मी सनातनी बाबू  और अधिकारी प्रदेश के  सनातनियों को बंटेंगे तो कटेंगे की तर्ज़ पर,  कूट भी रहे और लूट भी रहे!! आखिर कब डॉ मोहन सिंह यादव प्रदेश के बाबुओं और अधिकारियों के भ्रष्टाचार, कदाचार और अनाचार पर अंकुश लगाएगी? कब तक राज्य सरकार  मोदी के नाम की कमाई खाएँगी? एक न एक दिन तो  उन्हे अपनी पहचान बनानी ही पड़ेगी? अन्यथा  किसी शायर ने सच ही लिखा हैं:-

न समझोगे तो मिट जाओगे ऐ हिन्दोस्ताँ वालो

तुम्हारी दास्ताँ तक भी न होगी दास्तानों में

 

विजय सहगल