शनिवार, 27 दिसंबर 2025

"राग - पुत्र मोह"

 

"राग - पुत्र मोह"





हे! द्वापर के धृतराष्ट्र।  

हैं, कलियुग मे भी बंधु भ्रातृ॥

ठसक! देश आज़ाद कराया, खादी वाली टोपी ने!

कश्मीर फंसा कर देश को बांटा, स्वार्थ नीति थोपी ने॥

"देश नहीं बटनें देंगे", शपथ भुला कर बापू की,  

निजी स्वार्थ मे, देश को बांटा, ऐसे सत्ता काबू की॥   

घरबार छोड़ हुए अभागे, लाज़ लुटी अवलाएं!   

लुटे-मिटे जन, मानस-तन, सिकुड़ी मुकड़ी  सीमाएँ!!

साल, दशक युग बीते, राजतंत्र  अदले बदले।

प्रजातंत्र की नींव हिलाने, करते कुछ अमले हमले॥    

दंभ उन्हे है, नहीं चलेगा, ये देश, बिना उन्ही के।

सच तो ये है, कभी नहीं थे, ये पंथ, प्रांत किन्ही के॥

हर युग मे दुःशासन होता, पुत्र मोह मे माता। 

कुटिल कपट  को आरूढ़ करने "राजा राग" सुहाता॥

नहीं  आज हैं,  धृतराष्ट्र, गांधारी आरूढ़  है।

डटी आज भी कौरव सेना, दृश्य बड़ा  दारुण हैं।   

अस्थि विहीन हैं इनके कंधे।  

पुत्र मोह में आज भी अंधे॥

अँधियारा अब भाग चुका है॥

सत्य-सनातन जाग चुका है।

हे! भारत! आतिष्ठोत्तिष्ठ हो।

युद्ध अब, दृढ़ निश्चित हो॥  

जहाँ कृष्ण!, सा सारथ होगा।  

कौरव विहीन भारत होगा॥  

 

विजय सहगल

गुरुवार, 18 दिसंबर 2025

कोलकाता मे अराजक आयोजन की पुनरावृत्ति

 

"कोलकाता मे अराजक आयोजन की पुनरावृत्ति"





शनिवार 2025 को अर्जेंटीना के विश्व प्रसिद्ध फुटबॉल खिलाड़ी लियोनेल मेसी जिन्हे अब तक के सबसे महान खिलाड़ी अर्थात GOAT (ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम) इंडिया टूर 2025 पर अपने शनिवार, 13 दिसम्बर 2025 से शुरू, तीन दिवसीय भारत दौरे पर आने के पूर्व भारत के समाचार पत्रों मे बड़ी बड़ी  सुर्खियों मे  उनकी शान मे कसीदे पढे गए, जो उनके जैसे व्यक्तित्व और महान खिलाड़ी के खेल कौशल और योग्यता के अनुरूप था। अपने 72 घंटे के चका-चौंध भरे, विशुद्ध व्यावसायिक प्रायोजित भारत दौरे पर उन्हे देश के चार महानगर  कोलकाता, हैदराबाद, मुंबई और नई दिल्ली मे अपने प्रदर्शन करने थे, जिसकी शुरुआत कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम से लगभग 60 हजार दर्शकों के समक्ष अपने मैत्री खेल प्रदर्शन से करनी  थी। कोलकाता मे मेसी की वर्ल्ड कप ट्रॉफी हाथ मे उठाए 70 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण परोक्ष रूप से उपस्थिती के माध्यम से भी करना था। इससे पहले फुटबॉल खिलाड़ी लियोनेल मेसी 14 वर्ष पूर्व कोलकाता के खेल प्रेमियों से रुबरु हुए थे।   

जैसी की आशंका थी शनिवार को फुटबालर मेसी के स्टेडियम मे कदम रखते ही, स्टेडियम मे बैठे  पचास हजार से ज्यादा जन साधारण दर्शक  जो लियोनेल मेसी की एक झलक पाने को आतुर और व्याकुल थे, पर व्यवस्थापकों की कुव्यवस्थाओं, कुप्रबंध और अराजकता के परिणामस्वरूप इस विश्व प्रसिद्ध फुटबाल खिलाड़ी के इस चकाचौंध भरे कार्यक्रम को कोलकाता की कुछ मशहूर हस्तियों, बंगाल के खेलमंत्री अरूप विश्वास, उनके परिवार के लोगों, रिश्तेदार, मित्रों और सुरक्षा कर्मियों की भीड़ से घिर गये। खेल मंत्री ने तो, मानो जैसे पूरे कार्यक्रम को अगवा कर लिया।  साधारण दर्शक तो फुटबॉल खिलाड़ी लियोनेल मेसी की शक्ल और सूरत देखने से पूरी तरह वंचित रहे।  पश्चिमी बंगाल के खेल मंत्री की सनक और उन्माद की  ये हालत थी  कि स्वयं अपनी, अपने परिवार के सदस्यों और अपने मित्रों की मेसी के   साथ फोटो और सेल्फी के  लिये, वे  लगभग मेसी को खींचते और धकेलते नज़र आये। उपस्थित भीड़ मे जिसकी मर्जी आयी उसने मेसी से हाथ मिलाया या अपनी जर्सी पर मेसी के हस्ताक्षर लिये। इस पूरे दृश्य मे  खेल मंत्री अरूप विश्वास क्षुद्र ढीठता देखने को मिली जिसने  मेसी जैसे विश्व प्रसिद्ध  फुटबाल खिलाड़ी को ही फुटबाल बना दिया!!  हजारों रुपए खर्च कर जो साधारण दर्शक घंटों पहले से लियोनेल मेसी  को देखने स्टेडियम मे इंतज़ार कर रहे थे, इस खबर को सुन क्रोधित हो गये कि मेसी समय से पूर्व ही अफरा-तफरी और अराजकता के चलते कार्यक्रम को छोड़ बापस चले गये। हताशा और निराशा से ग्रसित इन अनियंत्रित दर्शकों ने क्रोधावेश और रोष मे आकर स्टेडियम मे भारी तोड़-फोड़ कर दी। हजारों कुर्सियों को उखाड़ कर स्टेडियम के मैदान मे फेंक दिया। प्रायोजित कंपनियों के बैनर और पोस्टर भी फाड़ दिये गये। आवेशित दर्शकों ने मैदान के अंदर घुस कर वहाँ लगे टेंट, स्पीकर्स और अन्य कीमती सामान की तोड़ फोड़ कर दी। कहीं कहीं पर पुलिस ने डंडे और लाठी का हल्का बल प्रयोग कर कुछ दर्शकों की पिटाई से  नियंत्रित कर,  इस बात को चरितार्थ किया कि "जबरा मारे और रोने भी न दे"!    दर्शकों ने बतलाया कि उन्होने ब्लैक मे टिकिट 25-26 हजार रुपए तक मे  लिए जबकि टिकिट की कीमत दो-तीन हजार से 7 हजार रुपए तक थी। लूट खसूट के हालात ये थे कि बीस रुपए की पानी की बोतल के, 150-200 रुपए तक बसूल किए गये। नाश्ते के पैकेट की कीमत तीन सौ रुपए तक बसूल की गयी और इन सब के पीछे सत्ताधारी दल तृणमूल कॉंग्रेस  के गुर्गों का एकछत्र हाथ था। कुछ फुटबाल प्रेमी तो सिर्फ अपने चहेते खिलाड़ी मेसी को देखने नेपाल से आये थे, फुटबाल प्रेमियों की इंतहा देखिये कि कुछ लोगों ने अपने पूरे माह का वेतन टिकिट पर खर्च कर डाला था।  स्वाभाविक था कि मेसी के प्रशंसक इस सारी लूट खसूट को भूल जाते यदि वे मेसी की एक झलक देखने मे कामयाब हो जाते। पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी जिनके स्वयं कार्यक्रम मे शामिल होने की सहमति थी, ने फुटबॉल खिलाड़ी लियोनेल मेसी और उनके  प्रशंसकों को उनको न देख पाने के लिये माफी मांगी और इस अव्यवस्था, कुप्रबंधन  की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिये। इस अफरातफरी और तोडफोड के बाद कोलकाता पुलिस ने सख्त कार्यवाही करते हुए कार्यक्रम के मुख्य आयोजक शताद्रु दत्ता को गिरफ्तार कर लिया और दर्शकों के पैसे बापस करने के लिये आयोजकों को कहा है। पश्चिमी बंगाल सरकार का इतिहास इस बात का गवाह रहा है कि इस तरह की हड़पी गयी धनराशि कदाचित ही लोगों को बापस मिली हो? देखना होगा कि  कोलकाता पुलिस की टिकिट की धनराशि बापसी के आदेश पर आयोजक कैसे प्रीतिक्रिया करते हैं?

ऐसे कार्यक्रमों मे मची अफरातफरी की उच्च स्तरीय कमेटी की जांच  का क्या हश्र होता है  अनेकों बार देखा जा चुका है। सिवाय समय की बर्बादी, अपनों को बचाने की कवायद और लीपापोती के शायद ही कभी कोई ठोस नतीजे देखने को कभी मिले हों? हाल ही मे पीछे  4 जून 2025 को बेंगलुरु के चेन्ना स्वामी स्टेडियम मे, रॉयल चैलेंज क्रिकेट टीम के अभिनंदन समारोह के दौरान मची भगदड़, जिसमे 11 निरीह लोगो की जान चली गयी थी, जिसमे बैठी जांच कमेटी के निर्णयों की जानकारी शायद किसी को हो और दोषियों को कदाचित ही कोई सजा मिली हों? ईश्वर को लाख लाख शुक्र है इस अफरातफरी मे बेंगलुरु की तरह जनहानि नहीं हुई, सिर्फ देश की मानहानि ही हुई है जिसके लिये हमारे  निष्ठुर और छद्म धर्मनिरपेक्ष राजनैतिज्ञ, आदी और अभ्यस्त हैं। दोनों ही घटनाओं मे राजनैतिक हस्तक्षेप के लिये जिम्मेदार नेताओं से  परे कार्यक्रम के छुटभैये आयोजकों को गिरफ्तार कर खानापूर्ति कर ली गयी। इन दोनों घटनाओं मे,  स्पष्ट आरोपों, सत्य सबूतों के बावजूद, अफरातफरी और अव्यवस्था के लिये शायद ही किसी बड़े नेता की ज़िम्मेदारी तय की गयी हो या उसे सजा मिली हो? कोलकाता की इस घटना की जांच का भी यही हश्र होने वाला है। पश्चिमी बंगाल के राज्यपाल और तृणमूल कॉंग्रेस के विरोधी भाजपा ने कार्यक्रम मे मची भगदड़ को शर्मनाक बतलाया।      

फुटबॉल खिलाड़ी लियोनेल मेसी फुटबाल के ही बादशाह नहीं अपितु आर्थिक क्षेत्र मे भी उनकी शाही रहन सहन और चकाचौंध को इस बात से समझा जा सकता है कि वह हर घंटे 13 लाख की कमाई करते है और उनकी सालाना कमाई 12 अरब है। मेसी के पास एक अरब की कीमत वाला निजी जेट विमान है।  लियोनेल मेसी की यही चकाचौंध हैदराबाद, मुंबई और नई दिल्ली मे भी देखने को मिली। शायद ये कोलकाता कार्यक्रम मे मची अफरा तफरी का ही परिणाम था कि आयोजकों ने कोलकाता से सीखे सबक से सतर्कता बरतते हुए सफल कार्यक्रम आयोजित किए, जिसमे मेसी प्रसन्न नज़र आये। चूंकि फुटबॉल खिलाड़ी लियोनेल मेसी का ये शुद्ध व्यावसायिक दौरा था जिसमे चाँद सितारों की चकाचौंध का पूरी तरह समावेश था जिसमे देश मे फुटबाल खेल के उन्नयन, उन्नति या विकास कम, सिर्फ धन, वैभव, एश्वर्य, समृद्धि और संपन्नता का प्रदर्शन ज्यादा था। यही कारण था कि हमारे देश के प्रबुद्ध राजनैतिज्ञ  राहुल गांधी, रेवंत रेड्डी, देवेंद्र फडणवीस, रेखा गुप्ता, जय शाह जैसे बड़े  राजनीतिज्ञों के अलावा सचिन तेंदुलकर सहित  फिल्मी दुनियाँ के शाहरुख खान, करीना कपूर, अजय देवगन, शिल्पा शेट्टी, टाइगर श्रॉफ अपने परिवार के साथ, मेसी से मिलने पहुंचे। हमारे  देश के इन बड़े, विशाल व्यक्तित्व लोगों का,  फुटबॉल खिलाड़ी लियोनेल मेसी से मिलने का लोभ संभरण न कर पाना, इस बात को दर्शाता है कि, लियोनेल मेसी का कद, व्यक्तित्व, पात्रता और प्रभामण्डल कितना ऊंचा, बड़ा, विशाल, श्रेष्ठ  और महान  रहा होगा। आशा की जानी चाहिये कि भविष्य मे  कोलकाता मे इस तरह के सार्वजनिक  आयोजनों मे सुव्यवस्था और सुप्रबंधन का ध्यान रखा जायेगा ताकि देश को  जनहानि, धनहानि और मानहानि से बचाया जा सके।           

विजय सहगल

शनिवार, 13 दिसंबर 2025

जस्टिस के विरुद्ध इंडि गठबंधन का महाभियोगी षड्यंत्र!!

 

"जस्टिस के विरुद्ध इंडि गठबंधन का महाभियोगी षड्यंत्र!!"






"जस्टिस के विरुद्ध इंडि गठबंधन का महाभियोगी षड्यंत्र!!"

10 दिसम्बर 2025 को जहां एक ओर देश मे  संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन की इस घोषणा हर्ष और खुशी की लहर थी कि भारतीय सांस्कृति के पुण्य दीपोत्सव पर्व "दीपावली" को विश्व सांस्कृतिक धरोहर की सूची शामिल किया जा रहा था वही दूसरी ओर देश के 12 विपक्षी दलों का एक समूह अपने राजनैतिक हित लाभ और स्वार्थ के वशीभूत सनातन धर्म की परम्पराओं, रीति रिवाजों और प्रथाओं के विरुद्ध षड्यंत्र रच रहा था। भारतीय त्योहारों, पर्वों और मंगल उत्सवों मे दीपों का प्रज्वलन एक आवश्यक और अति महत्वपूर्ण परिपाटी है जो सदियों से सनातन धर्म का एक अभिन्न अंग रहा है।  साधारणतः आज भी ग्रामीण और शहरी घरों मे सनातनी हिन्दू धर्मावलम्बियों के घर मे तुलसी चौरा और घरों की दहलीज़ पर संध्या के समय प्रज्वलित दीपक रखने की परंपरा निभाई जाती है।  लेकिन डीएमके के टीआर बालू, कनिमोझी  कॉंग्रेस नेत्री प्रियंका बाड्रा, समाजवादी मुखिया अखिलेश यादव, असुद्दीन ओवैसी, शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले, शिवसेना उद्धव गुट  सहित इंडि गठबंधन 120 से भी ज्यादा सांसदों ने मदुरै हाई कोर्ट के जस्टिस स्वामीनाथन को उनके पद से हटाने के लिए सिर्फ इसलिये महाभियोग का नोटिस लोकसभा अध्यक्ष को दिया है क्योंकि उन्होने अभी 1 दिसम्बर 2025 को तमिलनाडू के मदुरै, पहाड़ी पर स्थित थिरुपरनकुन्द्रम सुब्रमानिस्वामी  मंदिर के  दीप स्तम्भ, कार्तिगई पर पारंपरिक दीप प्रज्वलित करने के आदेश जिला प्रशासन और मंदिर प्रशासन को दिये थे। न्यायालय का मानना था कि इस दीप स्तंभ पर दीप प्रज्वलन से  दरगाह के किसी भी अधिकारों का हनन नहीं होता।  डीएमके सरकार ने उक्त आदेश इसलिये मानने से इंकार कर दिया क्योंकि दीप स्तंभ से 15 मीटर  दूर एक दरगाह के कारण कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो सकती है?  यही नहीं इस आदेश के पालन की अवेहलना पर जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने  पुनः आवेदक रमा रविकुमार को सीआईएसएफ़ बलों की अभिरक्षा मे मंदिर मे स्वयं ही दीप प्रज्वलन के आदेश दिये और तमिलनाडू सरकार के मुख्य सचिव अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) को न्यायालय की अवमानना के लिये 17 दिसम्बर को कोर्ट मे पेश होने के आदेश दिये। इस महाभियोगी षड्यंत्र मे कॉंग्रेसी प्रियंका गांधी, समाजवादी अखिलेश यादव और डीएमके का तो समझ आता है क्योंकि ये मुस्लिम तुस्टिकरण के प्रतीक दशकों से रहे है पर उद्धव ठाकरे  की शिव सेना का क्या जो अपने अस्तित्व से ही बाला साहब ठाकरे की हिन्दू हित की नीतियों पर चलती है। आज स्वर्गीय बाला साहब की आत्मा भी स्वर्ग मे उद्धव ठाकरे की करतूतों पर आँसू बहा रही होगी जो कौरवों की सेना के साथ खड़े होकर सनातन हिंदुओं के विरुद्ध खड़ा होकर अधर्म के पक्ष मे खड़ा है।   

संविधान की धारा 61, 124 (4, 5), 217 एवं 218 के तहत हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के विरुद्ध सिद्ध कदाचार या अक्षमता के आधार पर महाभियोग चलाने का आधार है।  प्रायः न्यायालयों के आदेशों के विरुद्ध उच्चतम न्यायालयों मे अपील के माध्यम से सरकारे राहत का रास्ता खोजती हैं पर देश मे ऐसा पहली बार हुआ है कि इंडि गठबंधन के इन माननीयों ने मदुरै हाई कोर्ट बेंच के न्यायाधीश जीआर स्वामीनाथन के विरुद्ध  महाभियोग इसलिये लाया, क्योंकि उन्होने एक सनातनी हिन्दू रमा रविकुमार को अपने धार्मिक रीति रिवाजों की अनुपालना हेतु माननीय न्यायालय से दीप स्तम्भ पर दीप प्रज्वलन की परंपरा के निर्वहन का  निवेदन किया था और माननीय न्यायधीश ने आवेदक के मंदिर के दीप स्तम्भ पर दीप प्रज्वलन  के धार्मिक अधिकारों की पूर्ति हेतु शासन को आदेश दिये थे। माननीय न्यायाधीश ने उस  तमिलनाडू की पूर्वाग्रही स्टालिन सरकार और उसके मंत्री पहले  मे भी सनातन धर्म के विरुद्ध अनर्गल, अकारण और असमय टिप्पड़ी करते रहे है। लेकिन खेद और अफसोस तो ये है कि अपने आपको धर्मनिरपेक्ष दल का ढिंढोरा पीटने वाली काँग्रेस, डीएमके, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रवादी काँग्रेस (शरद पवार) जैसे दल सिर्फ अपने राजनैतिक स्वार्थ और अल्पसंख्यक तुष्टीकरण के कारण डीएमके के साथ खड़े हो रहे जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। कल के दिन यदि सरकार दूसरे धर्म संप्रदाय के दुराग्रह पर दीपावली उत्सव पर दिये जलाने की परंपरा का विरोध करेंगे तो क्या इस दीपोत्सव पर भी प्रतिबंध लगाए जाएंगे? क्या 1675 मे हिन्दू धर्म बचाने के लिये, दुष्ट औरंगजेब के आदेश पर और इस्लाम न अपनाने के कारण, नौवें सिक्ख गुरु तेग बहादुर साहब के सिर काटे जाने के बलिदान को सिर्फ इसलिए न मनाएँ क्योंकि गुरु तेग बहादुर जी का ये महान बलिदान मुगल शासक औरंगजेब की  क्रूरता, निर्दयीता और अत्याचार और अमानवीयता को दर्शाता है?                 

इंडि गठबंधन के इन रजनीतिक दलों की अपने राजनैतिक वोट बैंक की खातिर  किसी अल्पसंख्यक धर्म संप्रदाय के तुष्टीकरण की पराकाष्ठा है। आज मदुरै हाई कोर्ट की बेंच के जस्टिस जीआर स्वामीनाथन के विरुद्ध लाये जाने वाले  महाभियोग प्रस्ताव के साथ  इंडि गठबंधन के साथी दल, तमिलनाडू की स्टालिन सरकार के साथ इसलिए खड़े हैं क्योंकि आने वाले पाँच माह बाद 2026 मे तमिलनाडू मे विधान सभा के चुनाव हैं। तमिलनाडू की डीएमके सरकार जस्टिस स्वामीनाथन पर महाभियोग लाने की आढ़ मे अल्पसंख्यक तुष्टीकरण के माध्यम से वोटो का ध्रुवीकरण करना चाहती है अन्यथा क्या कारण थे कि हाई कोर्ट ने जिस  सनातन धर्मावलम्बी रमा रविकुमार के धार्मिक अधिकारों के रक्षार्थ हुए निर्णय को दरकिनार करते हुए डीएमके सरकार, कानून व्यवस्था की ओट लेकर दरगाह के अनुयायियों के पक्ष मे खड़ी हो गयी। इंडि गठबंधन के दल ये भलीभाँति जानते हैं कि अल्पसंख्यक तुष्टीकरण से जो वोट बैंक उन्हे मिलेगा कदाचित ही हिन्दू धर्मावलम्बियों से मिले?

आज श्रीमद्भगवत गीता मे उल्लेखित महाभारत के युद्ध मे, अर्जुन के उस दृष्टांत को याद रखने की जिसमे वह भगवान श्री कृष्ण से निवेदन करते हैं-

हृषीकेशं तदा वाक्यमिदमाह महीपते।
सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत।।(अध्याय 1, श्लोक 21)   अर्थात

हे! अच्युत! दोनों सेनाओं के मध्य में मेरे रथ को आप तब तक खड़ा कीजिये जब तक मैं युद्धक्षेत्र मे खड़े हुए इन युद्ध की इच्छावालों को देख न लूं कि युद्धरूप व्यापार मे मुझे किन-किन के साथ युद्ध करना योग्य है।     

तमिलनाडू राज्य मे रामेश्वरम, कन्या कुमारी और मदुरै सहित अन्य अनेक स्थान हैं जहां पर सनातन हिन्दू सभ्यता और सांस्कृति सदियों से फली फूली।  आज महाभारत के अर्जुन की तरह ही आवश्यकता है देश के एक सौ चालीस करोड़ लोगों को इन राजनैतिक दलों के छद्म धर्मनिरपेक्ष नेताओं के विरूपित, विकृत और बिगड़ी सोच और मानसिकता के चेहरों को देखने और याद रखने की, कि कैसे सदियों से चली आ रही सनातन हिन्दू परंपरा मे दीप दान, दीपोत्साव और दीप प्रज्वलन से फैलने वाले सत्य के उज्ज्वल प्रकाश की प्रथा के संतुष्टिकरण के विरुद्ध जो   किसी वर्ग विशेष के असत्य के अंधकार, फैलाये रखने की कुत्सित तुष्टीकरण के पक्ष मे खड़े हैं। आज अपेक्षा  है सत्ता के लिये इन राजनैतिक युद्ध अभिलाषी लोभी, लालची और लोलुप नेताओं को पहचानने की, ताकि आने वाले चुनावी रण मे इनके कुटिल इरादों पर पानी फेरा जा सके।

विजय सहगल       


रविवार, 7 दिसंबर 2025

Happy Birthday-Sh॰ Narayan Rao

 

"जन्मदिन पर हार्दिक बधाई-नारायण राव गारु"

"Happy Birthday-ShNarayan Rao"


























मैंने जीवन मे कभी कल्पना नहीं की थी कि एक जगह, एक समय और एक समान सोच  के दक्षिण भारतीयों के एक बड़े बुद्धिजीवि, खुले और उदार विचार, विशाल हृदय वाले लोगों से समूह से यूं  अनायास जुड़ पाऊँगा। सारी उम्र मध्य प्रदेश या उत्तर भारत मे सेवारत रहने के कारण अंगुलियों पर गिने जाने वाले बैंक के चंद दक्षिण भारतियों मित्रों तक ही मेरा परिचय सीमित था जिनमें आंध्रा से श्री राजेश्वर राव जी पेरी, गुंटूर के श्री जी॰बी॰वी॰टी शर्मा, श्री एनवीआर मूर्ति और यहीं हैदराबाद के श्री एन राजू।  लेकिन मेरा सौभाग्य देखिये कि अपने बेटे के पास हैदराबाद प्रवास के दौरान ऐसे ही एक पार्क मे श्री एस पी गुप्ता जी से अक्टूबर 2023 मे अकस्मात भेंट हुई और उनके माध्यम से जेजे ग्रुप के संपर्क मे आया, जहाँ पर इस ग्रुप के नारायण राव साहब, मूर्ति जी, जंग बहादुर, भान साहब, शास्त्री जी, धनुका जी, रवि जी, गणेश जी, डॉ श्रीनिवास, ललित जी, दलजीत जी, केडिया जी, हनुमंत जी, जयवंत जी, मुराहरी जी, मण्डल जी, रामेश्वर जी, रवि जी, देव राजन जी  जैसे 60-70 साथियों से  मुलाक़ात हुई। सभी एक से बढ़ कर एक, सरकारी और गैर सरकारी उपक्रमों मे उच्च पदों से सेवानिवृत व्यवहार कुशल, बुद्धिजीवियों से एक साथ भेंट मेरे लिए परम सौभाग्य का विषय था।        

आज हमारे बड़े भाई तुल्य श्री नारायण राव साहब के 83वें जन्मदिन पर उन्हे हार्दिक शुभकामनायें प्रेषित करते हुए अपार खुशी और प्रसन्नता महसूस कर रहा हूँ। निश्चित ही आज हैदराबाद के गौतमी पार्क मे आज 8 दिसम्बर 2025 को  शाम 6.30 बजे उनके जन्मदिन पर मै उपस्थित नहीं रहूँगा पर होने वाले जन्मदिन पार्टी की कल्पना मै बड़े ही सहज और सरल ढंग से कर सकता हूँ क्योंकि JJ Group की पार्टियों मे, मै अक्सर शामिल होता रहा हूँ। जिस तरीके से इस वरिष्ठ नागरिकों के समूह द्वारा उनके सदस्यों के जन्मदिन, विवाह की सालगिरह, खुशी के पलों  या अन्य बिना किसी कारण के पार्टी आयोजित कर, गीत संगीत से सजी गानों की महफिल सजाई जाती है वह अद्व्तिय है। ये कहना अतिसन्योक्ति न होगी कि बेनागा और बिना चूके गौतमी एंक्लेव मे  हर रोज,  होने वाली जेजे ग्रुप द्वारा आयोजित संगीत की महफिल और विशेष आयोजनों का श्रेय अगर किन्ही व्यक्तियों को दिया जाये तो राव साहब के साथ श्री गंतिमूर्ति जी और जंग बहादुर की त्रिमूर्ति को दिया जाता है। ग्रुप के लोगो का मानना है कि जहां एक ओर राव साहब, मूर्ति जी और जंग बहादुर इन आयोजनों के निर्माता निर्देशक है लेकिन इन आयोजनों की सफलता की गारंटी के रूप मे ब्रहमानंदम जी,  रवि जी जैसे कर्मठ और समर्पित सहयोगी हैं। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी और असम से लेकर गुजरात तक के फूलों की खुशबू जेजे ग्रुप के इस गुलदस्ते मे हर रोज महसूस की जा सकती है।  

जब से मै जेजे ग्रुप से जुड़ा, हैदराबाद की शायद ही कोई शाम रही हो जब मै इस ग्रुप के दैनिक कार्यक्रम मे शामिल न हुआ हूँ। हैदराबाद प्रवास के दौरान राव साहब से प्रायः प्रातः भ्रमण और सायंकाल गीत संगीत की बैठक मे मिलना होता रहा। होली जैसे पवित्र त्योहार, जेजे ग्रुप के साथ मनाने का सौभाग्य 2024 मे मिला। क्या शानदार नज़ारा था। होली के बाद पार्क के सामने ही स्थित फ्लैट मे राव साहब के घर हुई पार्टी लाजबाव थी। राव साहब से घनिष्ठता और निकटता का शायद एक कारण यह भी रहा हो कि वे भी मेरी तरह एक बैंकर रहे। उन्होने एक कृषि अधिकारी के रूप मे अपनी सेवाएँ भारतीय स्टेट बैंक मे दी हैं। राव साहब जैसी लंबी कदकाठी और प्रभावशाली व्यक्तित्व के कारण मै तो उन्हे अपने आदर्श के रूप मे देखता था। अस्सी की वय के लोगों का परिवार  कदाचित ही इस उम्र मे यात्रा, भ्रमण और पर्यटन पर जाने की अनुमति किसी को  देता  हों, पर राव साहब की दृढ़ इच्छा शक्ति और मजबूत मनोबल और सुरक्षित संकल्प का ही परिणाम था कि हमारे आग्रह पर वे हनुमंत रेड्डी जी, गणेश सुब्रह्मण्यम्, और दामोदर रेड्डी जी के साथ मेरे बेटे की शादी मे ग्वालियर पधारे। इस अल्पावधि के दौरान न केवल वे शादी के सभी समारोह  मे शामिल हुए अपितु ग्वालियर और उसके आसपास के सभी धार्मिक और पर्यटक स्थलों का भ्रमण कर सभी साथियों के साथ भरपूर आनंद उठाया। उनकी इस जीवट, साहस और दिलेरी को देख हमारे परिवार के सभी सदस्य भी उनके कायल हो गये। एक अग्रज और बड़े भाई की भूमिका के कारण, उनकी  इस मिलनसारता, सरल प्रकृति और मृदु व्यवहार के कारण हैदराबाद मे भी अनेक बार उनका आदर स्नेह हमारे परिवार को मिला।

आपके साथ विताई हुई स्वर्णिम स्मृतियों को अपने हृदय मे सँजोएँ, आज श्री नारायण राव जी के 83वें जन्मदिन पर मै अपने और अपने परिवार की ओर से उन्हे अनेकानेक शुभकामनायें एवं बधाई प्रेषित करता हूँ। वे ऐसे ही स्वस्थ, सुखी हों और जेजे ग्रुप मे ऐसे ही सक्रिय भूमिका निभाते हुए ग्रुप का मार्ग निर्देशन करते रहें।

 

विजय सहगल,

ग्वालियर, गुरुग्राम, बेंगलोर