रविवार, 15 दिसंबर 2024

डिजिटल अरैस्ट नहीं फ़िज़िकल अरैस्ट

 

"डिजिटल अरैस्ट नहीं फ़िज़िकल अरैस्ट"






इन दिनों साइबर क्राइम की डिजिटल अरैस्ट की घटनाएँ काफी सुनेने मे आ रहीं है। लेकिन पिछले दिनों मै स्वयं अपने ही घर मे फ़िज़िकल अरैस्ट हो अनेकों लोगो की उपस्थिति के बावजूद लूट का शिकार हो गया। उस घटना को मै आप लोगो के साथ सांझा कर रहा हूँ।

घर मे वैवाहिक समारोह जब अच्छी तरह पूर्वक सम्पन्न हो गया तो जैसा कि सारी जागह  का रिवाज और दस्तूर है कि किन्नर समाज, शुभ और खुशी के अवसरों पर अपना नेग पाने के लिए उन घरों मे आते है जहां शादी या बच्चों के जन्मादी के शुभ संस्कार होते हैं। कुछ लोक गीतों और लोक नृत्यों के पश्चात नव युगल को आशीर्वाद और कुछ रस्मों के बाद वे अपना नेग लेते हैं। मेरा भी मानना हैं कि ये उनका हक भी है ताकि समाज का हर वर्ग एक दूसरे पर निर्भर हो सामाजिक  उत्थान की ओर अग्रसर होता रहे। खुशी के इस मौके पर कुछ किन्नर शादी कार्यक्रम के बाद घर मे आ पधारे। उनके लोक गीत और लोक नृत्य की औपचारिकता के बाद नेग आदि की औपचारिकता कुछ मोल भाव के बाद पूरी हुई जो एक अच्छी राशि के रूप मे एवं  मिष्ठन आदि देकर उन्हे विदा किया। इस छोटे से कार्यक्रम मे नवयुगल, हमारे कुछ कुछ रिश्तेदार, मित्र, पड़ौसी भी शामिल थे। खुशी और हर्षोल्लास के बीच ये रस्म भी अच्छी तरह से सम्पन्न हो गयी।

मेरे सहित, हमारे मित्र, परिवार और नजदीकी रिश्तेदार भी खुश थे कि शादी का पूरा कार्यक्रम ईश्वर की असीम कृपा और आशीर्वाद  से  निर्विघ्न खुशी खुशी सम्पन्न  हो गया। पर अचानक दूसरे दिन सुबह मैंने दो ऑटो मे 6-7 किन्नरों को अपने घर की ओर आता देखा तो हैरान  हो गया। हैरानी इस बात से थी कि अभी कल ही तो 2-3 हिजड़े घर पर आए थे और अच्छी ख़ासी रकम देकर उन्हे विदा किया था अब ये पुनः मुसीबत कहाँ से आ गयी? आते ही उन्होने अपने साही अंदाज़ मे तालियाँ बजा बजा कर दूल्हा दुल्हन और परिवार को बधाई  देना शुरू कर दिया, जो सामान्य शिष्टाचार था। पर जब नेग मांगने की बारी आयी तो मैंने उन्हे बताया कि मै तो कल ही आप लोगो को नेग दे चुका!! उनमे से कुछ ने तो कहा हमे उनसे कोई मतलब नहीं हमे तो हमारा नेग चाहिए? हम ही असली किन्नर हैं। अब हमारा माथा ठनका, क्योंकि उन्हे देख कर जैसी आशंका थी कि वे तो पैसे लिये बिना नहीं जाएंगे? मैंने कहा कि हमे  तो आपका नेग और दस्तूर देने मे कोई बुराई नहीं थी और मै तो आपका दस्तूर देने के भी पक्ष मे था लेकिन जब कल हम उन्हे पैसे दे चुके उसका क्या। फिर नकली और असली की हम पहचान करें कैसे? कल को कोई तीसरा ग्रुप आ जाएगा कि हम ही असली किन्नर है तब तो हम क्या करेंगे? हमे तो ये मालूम था कि हर किन्नर समूह का एक क्षेत्र निश्चित हैं तो दूसरे क्षेत्र के किन्नर आपके इलाके  मे कैसे आ गए? ये तो अच्छा था कि आज के इस सूचना प्रधान युग मे कुछ रिशतेदारों ने उन नकली किन्नरों के  विडियो और फोटो ले लिये थे। जब उनके ग्रुप लीडर को हमने वे विडियो और फोटो दिखाये तो उन के समूह को उम्रदराज सदस्य ने उनको देख समझ लिया कि ये कुछ नकली हिजड़े क्षेत्र मे घुसपैठिए की तरह आ गये। इन किन्नरों मे से एक-दो ने कहा कि हम घर मे हुई पिछली शादी मे भी 6-7 साल पहले आप से ही नेग ले गये थे। मैंने अपनी सहमति अवश्य जताई पर उनसे कहा कि तुम लोग 6-7 साल बाद अब आए हो तो हम तुम्हें कैसे पहचाने? यदि तुम सहज भले या  होली-दिवाली आते रहते तो पहचानना संभव था, पर 6-8 साल मे कैसे पहचाने? छोटी-मोटी रकम होती तो कोई बात न थी, हजार-दो हज़ार मे कोई फर्क नहीं पड़ता पर ये तो बड़ी राशि थी। किन्नरों के समूह के उन बुजुर्गवार ने अपने गुरु को फोन लगा कर मेरी उन से बात कराई और सारा किस्सा बताने को कहा। मैंने उनके गुरु को मेरे साथ एक दिन पहले घटी, घटना को संक्षेप मे बतलाया। अब किन्नरों के उस समूह ने आपस मे बात की और अपने मोबाइल फोन पर उन नकली किन्नरों के विडियो, फोटो भेजने को कहा। बिना किसी देरी के हमने उनके नंबरों पर उन धोखेबाज हिजड़ों के फोटो भेज दिये।  आए हुए इन किन्नरों की ये भलमनसाहत थी कि उन्होने अपने गुरु से बात कर हमसे अपने नेग लेने की मांग को छोड़ दिया। वर-बधू सहित सभी को आशीर्वाद दे कर उन्होने कहा कि हम अपने जजमानों को कभी भी दुख या तकलीफ नहीं देते। हमारे क्षेत्र मे घुसे इन घुसपैठियों से तो हम निपटेंगे ही आप के यहाँ भी जल्दी-से-जल्दी आने वाली खुशियों मे बधाई गाने फिर आएंगे। इस आशय का आशीर्वाद दिया और   दुबारा बगैर किसी नेग दस्तूर आदि नहीं लिया। मुझे आश्चर्य मिश्रित खुशी थी कि यदि ये लोग अपनी जिद पर आ जाते तो हमे मजबूरी मे ही सही  धनराशि पुनः देनी पड़ती।

किन्नरों के उस समूह ने अपना विजिटिंग कार्ड भी दिया कि यदि ये बदमाश दुबारा दिखाई पड़े तो हमे सूचित करना। परिवारजनों ने आये हुए इस नवीन किन्नरों के समूह को मिष्ठान आदि खिला कर पुनः आने के लिये आमंत्रित किया।

मुझे भी उनसे हमदर्दी थी कि समाज के इन थर्ड जेंडरों के हक पर किन्ही नकली और धोखेबाज लुटेरों ने उनके हक हकूक पर दिन दहाड़े डाका डाल दिया!! अब तक डिजिटल अरैस्ट की घटनाएँ तो आये दिन आजकल हम टीवी और  समाचार पत्रों मे देख और सुन रहे थे, पर आज फ़िज़िकल अरैस्ट की इस घटना मे खुद के साथ हुई इस लूट की घटना से ठगा महसूस कर रहे हैं। दिये गये फोटो वीडियो मे यदि ये नकली लुटेरे कहीं दिखाई दे तो हमे अवश्य सूचित करना ताकि समाज के इन वंचित किन्नरों को न्याय दिलाया जा सके।

विजय सहगल