"कॉंग्रेस सांसद, चरणजीत चन्नी द्वारा
खालिस्तान का समर्थन!!"
दिनांक 25 जुलाई 2024 का दिन संसद के इतिहास मे बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण
दिन था जब प्रथम बार जालंधर से कॉंग्रेस के चुने गये सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री
चरणजीत सिंह चन्नी जैसे संवैधानिक पदासीन व्यक्ति द्वारा संसद मे, मोदी सरकार पर अघोषित
आपातकाल का आरोप लगते हुए, खालिस्तान अलगाववादी, पुलिस थाने/पुलिस पर हमला और देश के विरुद्ध संघर्ष छेड़ने के आरोप
मे अप्रैल 2023 से असम के डिब्रूगढ़ जेल मे राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम मे बंद
नवनिर्वाचित सांसद अमृतपाल सिंह का पक्ष लेते हुए इसे अभिव्यक्ति की
आज़ादी का हनन बताते हुए उस अतिवादी के पक्ष मे खड़े नज़र!! जिस आतंकवादी भिंडरवाले
को अपना आदर्श बताने वाला अमृतपाल सिंह के समर्थन मे खड़े कॉंग्रेस के सांसद चरणजीत
सिंह चन्नी ने एक बार फिर इतिहास को दोहराते हुए कॉंग्रेस की उस विघटन कारी नीति
की याद दिला दी जिसने अपनी स्वार्थी सत्ता को कायम रखने के लिये भिंडरवाले जैसे
आतंकवादी का पोषण कर उसको बढ़ावा देकर उसके ही विचारों के अतिवादियों
द्वारा हमारे देश की एक महान प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी की हत्या कर
उन्हे, हमसे, असमय
छीन लिया था। जिस समय चरणजीत सिंह चन्नी अलगाववादी अमृतपाल सिंह के
पक्ष मे संसद मे भाषण दे रहे थे, कॉंग्रेस के सांसद
मेजे थपथपा कर उनका उत्साह वर्धन कर रहे थे। चन्नी के लोकसभा मे वक्तव्य के दौरान
और बाद मे भी कॉंग्रेस के विपक्ष के नेता राहुल गांधी या कॉंग्रेस अध्यक्ष
मल्लिकार्जुन खडगे या श्रीमती सोनिया गांधी का ऐसा कोई ब्यान नहीं आया जिसमे
चन्नी के ब्यान की निंदा की गयी हो या उससे, असहमति
जताई हो? तब क्या ये माना जाये कि कॉंग्रेस
पार्टी एक अलगाववादी, देश विरोधी अमृतपाल सिंह के
समर्थन मे ठीक वैसे ही खड़ी है जैसे आज से चार दशक पूर्व भिंडरावाले के पक्ष
मे खड़ी थी?
चरणजीत सिंह चन्नी यहीं नहीं रुके अपितु पंजाब के तत्कालीन
मुख्यमंत्री स्वर्गीय बेअंत सिंह की सहादत पर छुद्र राजनीति करते हुए उनके पौत्र
और भारत सरकार के मंत्री रबनीत सिंह बिट्टू पर कटाक्ष करते हुए कहा कि, आपके दादाजी श्री बेअंत
सिंह शहीद हुए थे, लेकिन वे उस दिन नहीं मरे थे, वे उस दिन मरे जब आपने (बिट्टू ने) कॉंग्रेस छोड़ी थी!! आतंकवाद मे स्व॰
बेअंत सिंह के बलिदान को कॉंग्रेस से जोड़ कर बताने की उनकी अधम सोच ने न केवल देश
के लिये उनके बलिदान को तुच्छ और ओछा कर दिया अपितु अलगाववादी अमृतपाल सिंह
के साथ खड़े दिखने पर कॉंग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने, देश के लिये आत्मोसर्ग हुई पूर्व प्रधानमंत्री की शहादत को भी महत्वहीन और
छोटा करने का पाप किया हैं। देश की आतंकवाद, अलगाववाद
और अतिवाद की नीतियों के विरुद्ध इन नेताद्वय का ये सर्वोच्च बलिदान था
जिसे ये देश कभी नहीं भूल सकता। जिस कॉंग्रेस ने स्व॰ इन्दिरा गांधी, स्व॰ राजीव गांधी और सरदार बेअंत सिंह जैसे नेताओं को आतंकवाद की क्रूर और
अमानवीय हत्याओं का दंश झेला हो उसके माननीय सांसद चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा एक
अलगाव वादी की अभिव्यक्ति की आज़ादी का खुले आम समर्थन पर, कॉंग्रेस के किसी भी जिम्मेदार नेता द्वारा निंदा न करना तो दूर की बात
अपितु मौन धारण कर चुप्पी साध लेना इस बात को इंगित करता हैं कि उन्होने अपने
नेताओं की शहादत से कुछ शिक्षा ग्रहण नहीं की अन्यथा चरणजीत सिंह चन्नी के इस
शर्मनाक और गैरजिम्मेदार वक्तव्य के लिये उनके विरुद्ध समुचित कार्यवाही करते।
वर्तमान कॉंग्रेस के संगठन की नीतियों पर अब तो ये स्पष्ट सवाल उठने लगे हैं कि वे
मोदी सरकार को सत्ताच्युत करने के लिये देशद्रोहियों, अलगाववादियों और अतिवादियों के समर्थन
और साथ देकर किसी भी हद तक गिर सकते हैं जो देश के लिये बड़ा भयावह और चिंता
का विषय हैं?
चरणजीत सिंह चन्नी, पंजाब के वही तत्कालीन मुख्यमंत्री हैं
जिन्होने 5 जनवरी 2022 भटिंडा से फिरोजपुर जा रहे प्रधानमंत्री के काफिले की
सुरक्षा मे भारी चूक की थी जब पंजाब मे आंदोलन कारी किसानों ने एक फ़्लाइ ओवर पर
उनका रास्ता रोक दिया था। उस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जान का खतरा
उत्पन्न हो गया था और जिसकी ज़िम्मेदारी लेना तो दूर उल्टा पीएमओ कार्यालय को दोषी
ठहराते हुए अपनी ढिठाई प्रदर्शित करते हुए चोरी और सीनाजोरी की थी। राजनैतिक
जानकारों का ये मानना हैं कि चरणजीत सिंह चन्नी के विरुद्ध अलगाववादी, अमृतपाल सिंह के पक्ष मे की गयी टिप्पड़ी पर कॉंग्रेस कोई कार्यवाही नहीं
करेगी, क्योंकि राहुल गांधी, श्रीमती सोनिया गांधी से उनकी निकटता इसी से जगजाहिर होती हैं कि पंजाब के
तत्कालीन वरिष्ठ कॉंग्रेस मुख्यमंत्री कैपटन अंमरिंदर सिंह को हटाकर चरणजीत
सिंह चन्नी की पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप मे ताजपोशी की गयी थी।
इस विषय मे राहुल गांधी का 18वी लोकसभा के प्रथम सत्र मे विपक्ष के
नेता के रूप मे जो रवैया देखने को मिला वह इस बात की पुष्टि करता हैं कि लोकसभा
चुनाव 2024 मे कॉंग्रेस और उसके सहयोगी दलों को अपनी स्पष्ट पराजय और मोदी सरकार
और उसके सहयोगियों को साफ जनादेश को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पचा
नहीं पाये हैं अन्यथा संसद मे प्रधानमंत्री के धन्यवाद प्रस्ताव का उत्तर
देते समय उनके पूरे भाषण के दौरान विपक्ष के माननीय, संसद के गलियारे लगातार हल्ला गुल्ला
कर उनके भाषण मे व्यवधान उत्पन्न न करते। यहीं तक होता तब भी ठीक था लेकिन राहुल
गांधी ने जिस तरह, कानाफूसी कर असम के सांसद
गोगोई के माध्यम से मणिपुर और अन्य साथी माननिय सांसदों को हाथ पकड़-पकड़ कर
जबर्दस्ती लोकसभा के गलियारे मे प्रधानमंत्री के भाषण मे व्यवधान उत्पन्न करने के
लिये खीचते नज़र आये, जो राहुल गांधी का नेता
प्रतिपक्ष की भूमिका और उसके आचरण के सर्वथा विपरीत था, निंदनीय और निरर्थक और अनैतिक भी था। लोक सभा मे नेता प्रतिपक्ष राहुल
गांधी के इस दुराचरण पर लोक सभा के सभापति द्वारा जिन शब्दों और भावों के
माध्यम से उनके आचरण के विरुद्ध झिड़का और निंदा की वह किसी भी माननीय पुरुष के
स्वाभिमान और सम्मान के मानमर्दन की पराकाष्ठा थी। काश! राहुल गांधी को अपने
अपयश, अपकीर्ति और अनादर का रंच मात्र भी भान होता? यूं तो राहुल गांधी अपने आप को श्रीमद्भगवत गीता का ज्ञानी परिभाषित करते
हैं, तो उन्हे श्रीमद्भगवत गीता के अध्याय 2 के श्लोक 44 का सार अच्छी तरह से मालूम होगा जिसके अनुसार
अकीर्तिं चापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम्।
संभावितस्य
चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते।।2.34।। अर्थात
सब लोग तेरी बहुत कालतक रहने वाली अपकीर्ति का
भी कथन करेंगे और माननीय पुरुष के लिये अपकीर्ति मरण से (भी) बढ़कर हैं।
लेकिन खेद और अफसोस हुआ कि माननीय नेता प्रतिपक्ष को अपने किये गये
दुराचरण के लिये उनके कान पर जूँ तक नहीं रेंगी!!
विजय सहगल






