मंगलवार, 19 सितंबर 2023

"गणेश उत्सव, हैदराबाद"

"गणेश उत्सव, हैदराबाद"











यूं तो देवादिदेव  भगवान श्री गणेश के मंदिर देश-विदेश  मे समान रूप से मिल जाएंगे, जहां पर बड़ी संख्या मे श्रद्धालु नित्य प्रति दर्शन कर दिन की शुरुआत करते है, पर  महाराष्ट्र को गणेश उत्सव की प्रथा का जनक माना जाता है। यहाँ पर सात वाहन, चालुक्या, राष्ट्रकूट जैसे राजाओं ने गणेशोत्सव की प्रथा चलाई। पेशवाओं के शासन काल मे  गणेश उत्सव फला फूला। जिस तरह सनातन धर्म संस्कृति मे किसी भी सद कार्य के संकल्प और सम्पादन के पूर्व भूर्लोके, जंबूदीपे, भारतवर्षे.......... से शुरू होकर "ग्राम देवताभ्यो नमः", "स्थान देवताभ्यो नमः", और "वास्तु देवताभ्यो नमः" के आवाहन कर आगे बढ़ती है, कदाचित ही किसी धर्म, संप्रदाय या पंथ मे देखने को मिले? उसी तरह छत्रपति शिवाजी महाराज की माँ, "राजमाता जीजाबाई" को पुणे मे हर गाँव और कस्बे मे "कस्बा गणपति"  की स्थापना का श्रेय जाता है। उसी परंपरा पर चलते हुए स्व॰ बाल गंगाधर तिलक द्वारा स्वतन्त्रता के संघर्ष मे सार्वजनिक गनेश उत्सव को जोड़कर अपने स्वराज के आंदोलन को आम जनमानस से जोड़ा।   

मैंने लखनऊ, झाँसी, ग्वालियर, भोपाल रायपुर, सागर, दिल्ली, नोएडा और  पूना  सहित देश के अनेक स्थानों पर गणेश उसत्सव के आयोजन देखें है। लेकिन पूना के बाद हैदराबाद मे आज  गणेश चतुर्थी के आयोजन का  उत्साह, उमंग और उल्लास एक अलग रूप मे देखा और महसूस किया। एक ओर पूना मे गणेश उत्सव समितियों के सामूहिक उत्सव और अनुष्ठान देंखे। विभिन्न सांस्कृति, भेषभूषा के दर्शन, नाना प्रकार के वाद्य यंत्रों के सामूहिक प्रदर्शन, गायन-वादन के सुमधुर और सुंदर आयोजन देखे इन सभी कलाओं  की सुंदरता मे  सड़कों के चौराहों पर कलात्मक और जीवंत रंगोली ने ऊंचे और नए आयाम जोड़े जिसके दर्शन शायद ही कहीं देखने को मिले!! वहीं व्यक्तिगत और पूजा मंडलों के समूहिक गणेश स्थापना के दर्शन हैदराबाद मे हुए।

आज दिनांक 18 सितम्बर की सुबह 7 बजे  हैदराबाद के  अंबेडकर सर्कल से साइकल पार्क के पहले तक, बोटिनीकल गार्डन रोड के दोनों ओर की चहल पहल और गणेश उत्सव की तैयारियों की जैसी  बानगी देखी उसके आधार पर तो हैदराबाद मे गणेश चतुर्थी के उत्साह उमंग की कल्पना सहज ही लगाई जा सकती है। सामूहिकता और व्यक्तिगत स्तर पर लोगों का जो उत्साह यहाँ के बच्चों, नव युवकों और प्रौढ़ो मे देखा वो अद्व्तीय था।  हैदराबाद मे गणेश उत्सव की शुरुआत मे पर्यावरण के प्रति यहाँ के लोगो  की जागरूकता को मैंने देखा और महसूस किया उसको गणेश प्रतिमाओं जो चाहे छोटी हों या बड़ी, गणेश प्रतिमाओं की गढ़ाई कच्ची मिट्टी से की गयी थी। कुछ अतिरिक्त शुल्क देकर आप वहाँ उपस्थित चितेरों से अपने इच्छा अनुरूप रंगों का चयन कर आकार दे सकते हैं या यूं ही उनकी स्थापना घरों या मंडपों मे कर सकते है।

यहाँ के लोगो ने गणेश पूजा मे प्रयुक्त होने सैकड़ों तरह की सामग्री यथा पत्र, पुष्प, फल आदि को देख अधिकार पूर्वक कह सकता हूँ कि हमारे पवित्र वेदों आदि मे उल्लेखित प्राकृतिक साधनों को अपनी पूजा पद्धति के  विधि विधान से जोड़ा है वह प्रशंसनीय है। पीपल, बरगद, अमलतास, इमली, दूर्वा, अकौआ, सेज्वंती आदि विभिन्न प्रकार की पत्तीयां, गेंदा, गुलाब, जुही, हरश्रंगार के प्रचलित पुष्पों के अतरिक्त अन्य पुष्प जिन्हे मै नहीं पहचान सका  तथा फलों मे सीताफल, अमरूद, कैथा, मकई (भुट्टा), बेर, इमली, वेल्पत्र, पेठा और न जाने अंगिनित नाना प्रकार के फलों को लोग  उसी भावना से अपने ईष्ट भगवान श्री गणेश को अर्पित करते है जैसे श्रीमद्भगवत गीता के अध्याय 9 के श्लोक संख्या 26 मे भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि :-

पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति।
तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः।।9.26।।    अर्थात

जो कोई भक्त, मेरे लिये प्रेम से पत्र, पुष्प, फल, जल आदि अर्पण करता है, उस शुद्ध बुद्धि निष्काम प्रेमी भक्त का प्रेमपूर्वक अर्पण किया वह पत्र-पुष्पादि मैं सगुण रूप से प्रकट होकर प्रीति सहित खाता हूँ।

अनेक जगहों पर चार आड़ी और चार खड़ी लकड़ी की पट्टियों से एक नौ खानों की एक वर्गाकार आकृति का निर्माण किया गया था जिसे वे तेलगु मे शायद "पल्लवी" पुकार रहे थे। जब मैंने इसके उपयोग के बारे मे पूंछा तो उन्होने बताया कि इस आकृति को गणेश भगवान के उपर छत्र के रूप मे लटकाकर इसके नौ वर्गाकार खानों मे लाएँ गए विभिन्न फलों को धागे की सहायता से लटकाते है। यह घर मे धन्य-धान का शुभ प्रतीक है अर्थात विघ्नहरता गणेश घर मे धन-संपत्ति, वैभव और खद्ध्यान्नों से  भरपूर रक्ख अपनी शुभ दृष्टि बनाए रक्खे।   

मै समझ गया था कि गणेश उत्सव के आने वाले 10 दिन हैदराबाद नगर मे  गणेश चतुर्थी के उत्साह के रंग मे रंगे होने वाले है और जिसका उल्लेख मैं आने वाले दिनों मे करूंगा।

इसी बीच भगवान श्री गणेश आप सब पर स्वास्थ,  सुख, समृद्धि और शांति का आशीर्वाद बनाएँ रक्खे।

श्री गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनायें एवं बधाई।  

विजय सहगल     


3 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

I left Hyderabad in 1969 after working there for a couple of years. There was hardly anything noticeable about this festival those days. But things have changed since then. Banjara hill was all green very few houses. I was shocked to see it 3 years back it’s over crowded with no greenery left now.
Rajendr Singh, Noida

बेनामी ने कहा…

*आपके धार्मिक,सांस्कृतिक,ऐतिहासिक,सामाजिक व कभी कभी राजनीतिक विश्लेषण से ओतप्रोत आलेखों से इतना तो स्पष्ट है कि जो भी विषय वस्तु लेकर आप मुखातिब होते हैं उसके पीछे आपकी जिज्ञासु प्रवृत्ति व विधिवत् अनुसंधान होता है अर्थात आपका शारीरिक व मानसिक श्रम होता है।*
*हम तो अब तक यही समझते थे कि हैदराबाद मुस्लिम बाहुल्य है और हिन्दु त्यौहारों का उल्लास व उमंग उत्तर या पश्चिम भारत की तरह अपने शबाब पर नहीं होता होगा।इस प्रकार आपके ब्लाग से हमारा भ्रम दूर हुआ।अपने कालेज के शैक्षणिक टूर में हमें भी हैदराबाद जाने का अवसर मिला था।कुल मिलाकर ऐसे विश्लेषण कभी कभी दिल तक छू जाते हैं।बहुत बहुत साधुवाद व अभिनंदन।*
*ऋषि पंचमी की अनेकानेक शुभकामनाऐं सभी वरिष्ठ साथियों को।*
सुरेंद्र सिंह कुशवाहा, ग्वालियर

बेनामी ने कहा…

श्री गणेश विग्रह स्थापना की तैयारियों का अतिसुन्दर भावमयी आँखों देखा वर्णन।
🙏🙏🙏🙏🙏
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राजेन्द्र सिंह, ग्वालियर