शुक्रवार, 5 मई 2023

शुद्ध नीरू - (स्वच्छ जल)

 

शुद्ध नीरू - (स्वच्छ जल)









दुनियाँ सहित देश के अनेक भागों मे पानी के लिये संघर्ष की घटनाएँ आये दिन देखने और सुनने मे आती है। देश की राजधानी दिल्ली के अति  महत्वपूर्ण इलाके चाणक्य पुरी मे मैंने अपने प्रवास के दौरान और अप्रैल 2022 दिल्ली के बसंत कुंज इलाके मे पानी के विवाद पर  महिलाओं की हत्या की घटनाओं को समाचार पत्रों की सुर्खियां बनते देखा है। पानी की कमी के चलते सूखे की निर्मित हुई स्थिति की  07 अप्रैल 2013 की घटना, शायद देश के लोगो की स्मृति मे ताजा होगी, जब महाराष्ट्र के तत्कालीन उप मुख्य मंत्री अजीत पवार ने संवेदन हीनता की पराकाष्ठा को लांघते हुए  प्रदेश मे पानी की कमी के चलते सूखे की स्थिति का सामना कर रहे अनशनरत लोगो के लिये जो शर्मनाक ब्यान दिया जो पानी की कमी की भयावह स्थिति पर जिम्मेदार शासकों की असंवेदनशीलता और जड़ता का परिचायक था। उन्होने कहा था कि, "अनशन से पानी नहीं मिलेगा", बांध मे पानी नहीं है तो क्या करें?, "क्या पानी पानी करते हो", "नदी मे पानी नहीं तो क्या पेशाब करें"!!  पानी के लिये जनमत  का इतना तिरस्कार, घृणा और निरादर वो भी राज्य के एक जिम्मेदार उपमुख्यमंत्री द्वारा, कभी नहीं देखा? दुनियाँ के चिंतक और विचारक और बौद्धजीवियों की ये एकमत राय है कि अगला विश्व युद्ध निश्चित ही पानी के लिये होगा!!     

उपर्युक्त पृष्टभूमि के बीच जब  पिछले दिनो फरवरी-अप्रैल के बीच लगभग अपने दो माह के कर्नाटक प्रवास पर मैंने स्वच्छ जल (ಶುದ್ಧ ನೀರ अर्थात कन्नड मे शुद्ध नीरू) नाम की  एक योजना देखी जिसने मुझे अत्यंत प्रभावित किया। भाषा की अनिभिग्यता के चलते इन जल घरों के उपर लगे सूचना पटों पर क्या लिखा था मै जान और समझ तो न सका पर बड़ी सहजता से पानी लेने आ रहे साधारण जनों के चेहरे पर सुख और सुकून के भाव की मानो दशा को मै भली तरह से पढ़ सका। शासन द्वारा मात्र पाँच रुपए मे 15 लीटर स्वच्छ और शुद्ध आरओ पानी उपलब्ध कराना किसी आश्चर्य से कम न था। एक ओर जब पानी के लिये ऐसी आपाधापी और मारकाट मची हो, तब जन साधारण के लिये  शासकों द्वारा सस्ती दर पर  शुद्ध पेय जल उपलब्ध कराने की ये योजना आश्चर्य चकित करने वाली तो दिखलाई दी, वहीं दूसरी ओर जब साधारण मानवी को स्वास्थ्य के पैमाने की कसौटी पर भी इसे कसते है तो मन को सुकून मिलता है, क्योंकि विश्व स्वास्थय संगठन के अनुमानुसार दुनियाँ मे 80% बीमारियां अशुद्ध जल पीने के कारण होती है। पूरे विश्व सहित हमारे देश मे भी शुद्ध पीने योग्य जल की अनुपलब्धता के चलते लोग  जल जनित रोगो से ग्रस्त रहते है, ऐसे मे कर्नाटक मे शुद्ध आरओ जल को आम जनों के लिए 5 रुपए की किफ़ायती दर पर 15 लीटर शुद्ध जल उपलब्ध कराने की जितनी भी प्रशंसा की जाय कम होगी।     

कर्नाटक के प्रत्येक गाँव, कस्बों और शहरों मे इस योजना के अंतर्गत एक जल घर का निर्माण कराया गया है जिसमे शुद्ध आरओ पानी को 5 रुपए की किफ़ायती दर पर 15 लीटर पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रायः गर्मी और वर्षा ऋतु के समय इन जल जनित बीमारियों के कारण निर्बल वर्ग के साथ मध्यम वर्गीय परिवार को शुद्ध जल की उनुपलब्धता के कारण प्रति वर्ष इन बीमारियों के इलाज़ के लिये बड़ी मात्रा मे धनराशि व्यय करनी पड़ती है। ऐसे मे बिना किसी वर्ग भेद के इच्छुक व्यक्ति जैसे ही इन जलघरों की मशीन मे पाँच रुपए का सिक्का डालता है स्वचालित मशीन के पास ही लगे नल से 15 सेकंड के लिए जल की अविरल धारा शुरू हो जाती है और लोग पानी के जार को नल के नीचे लगा कर 15 लीटर शुद्ध आरओ  जल को एकत्रित कर लेते है।

मैंने प्रातः भ्रमण के दौरान बेंगलुरु के  एमसी हल्ली, मातन हल्ली, थिन्द्लु,  सरजापुर क्षेत्रों मे इन स्वचालित मशीनों की कार्य प्रणाली को नजदीक से देखा। छोटे ग्रामों मे साँय 6 से 8-9 बजे तक और बड़े कस्बों जैसे सरजापुर मे 24 घंटे इन जलघरों से साधारण जन को स्वचालित मशीनों की सहायता से जल उपलब्ध कराते देखा है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों मे जल घरों से पानी लेना ग्रामीण परिवारों के जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुका है। शाम होती ही आसपास के लोग पैदल ही पानी के खाली जारों को हाथ मे लिये जल घरों की ओर जाते दिखाई देते है जबकि दूर दराज से आने वाले ग्रामीण जन अपने दुपहिया वाहनों से आते दिखाई पड़ जाते है। ऐसा नहीं है कि एक निश्चित समय होने के कारण पानी के लिये धक्का-मुक्की और भीड़-भाड़ नज़र आती हो!! चूंकि जल घरों मे लगी मशीन द्वारा पानी को स्वच्छ करने की गति इतनी तेज है और शुद्ध जल के भंडारण के लिये पाँच-पाँच हजार लीटर की बड़ी-बड़ी टंकियाँ लगाई गयी है कि एक व्यक्ति को 15 लीटर की आपूर्ति मे बमुश्किल 18-20 सेकंड का समय लगता है। कहने का तात्पर्य यह है कि मांग और पूर्ति का अंतराल न्यूनतम होने के कारण काला बाजारी और भ्रष्टाचार से ये योजना पूरी तरह से अछूती है। कभी कभी विधुत अवरोध या अन्य तकनीकि कारणों से जल की आपूर्ति बाधित हो जाती है और मशीन से तय सुदा पानी की मात्रा  नहीं आ पाती, पर पाँच रुपए की नगण्य धनराशि के लिये लोगो को सरकार और व्यवस्था को कोसते और पाँच रुपए के नुकसान के लिये रोते-कलपते नहीं देखा।  

इन दिनों देश के राजनैतिक पटल पर  राजनीति का केंद्र कर्नाटक है। कर्नाटक की राजनीति का  ऊंट किस करवट बैठता है इसका निर्णय आने वाले 13 मई 2023 को हो जाएगा। निर्णय जो भी हो मुझे इस से कोई बहुत ज्यादा सरोकार तो नहीं है पर हर घर जल योजना के साथ कदाचित कर्नाटक शासन की ये शुद्ध नीरू योजना देश के यदि अन्य प्रान्तों मे भी लागू की जाय तो पीने के पानी की सुनिश्चित आपूर्ति ही नहीं साधारण जन मानस के स्वास्थ्य के लिये मील का एक पत्थर साबित होगी और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसरों का भी  सृजन होगा।

विजय सहगल   

1 टिप्पणी:

दयाराम वर्मा ने कहा…

शुद्ध जल या पेयजल न केवल वर्तमान की बल्की भावी जगत की एक बहुत बड़ी समस्या के रूप में उभरकर सामने आ रही है। ऐसे में इस तरह के प्रयास बेहद अनुकरणीय हैं । आपने कर्नाटक का भ्रमण किया और इस महत्वपूर्ण पहल या जागरूकता को आलेख बद्ध किया, इस हेतु बहुत-बहुत साधुवाद।