"सही अर्थ दिवाली
आई"
कुम्हार के दिये।
कुची, रंगरेज की,
घरों पर जब चली।
जगमगा उठी, पौर,
आँगन, हर गली॥
श्रम से घर, खुशियाँ छाई।
सही अर्थ दिवाली आई॥
अपने तन को मैला करके,
करें शुद्ध जो घर, शौचालय।
होम करें खुद को हव्य मे,
बना, हमारा घर देवालय॥
देवतुल्य नमन है उनको,
जिनके चेहरे, खुशियाँ छाई।
सही अर्थ दिवाली आई॥
माली के फूलों से जब हम,
घर को खूब सजाएँगे।
कागज के फूलों से बैसी,
सुंगंध कहाँ से पाएंगे॥
"लटर बेल" बगिया मे छाई।
सही अर्थ दीवाली आई॥
विजय सहगल

3 टिप्पणियां:
अति सुंदर कविता
👍👍💐💐🌷🌷हॅप्पी दीपावली
बहुत सुंदर और सारगर्भित कविता । दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ ।
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