देश मे सबसे
प्रसिद्ध जन जन के प्रिय पूर्व प्रधानमंत्री श्री
अटल बिहारी बाजपेयी का निधन हो गया। प्रसिद्ध कवि, ओजस्वी वक्ता, राजनीति मे ईमानदार छवि और आम लोगो मे
लोकप्रिय ऐसे श्री अटल बिहारी बाजपेयी का निधन देश के लिये एक अपूर्णीय क्षति है।
हमे याद है जब मेरी ग्वालियर मे पोस्टिंग के समय झाँसी से ग्वालियर प्रति दिन अपने
मित्र विजय नीखरा के साथ उप-डाउन करते थे। हम लोग प्रातः ग्वालियर 9.30 बजे लगभग
पहुँच जाते थे। एक बार अटल जी भी सुबह ग्वालियर स्टेशन पर अपना छोटा बैग खुद उठाए
प्लेटफॉर्म पर नज़र आये हम कुछ दैनिक यात्रियो ने बैग उठाने मे सहायता करने के
उद्देशय से पूंछा कोई लेने नहीं आया? उन्होने कहा शायद सूचना नहीं मिली होगी और
अपना समान खुद ही लेकर प्लेटफॉर्म से बाहर निकल गये। उस समय वह देश के पूर्व विदेश
मंत्री थे। उनका प्रायः ग्वालियर आना जाना लगा रहता था। एक बार मै विजय गुप्ता के साथ ग्वालियर से दिल्ली
शताब्दी ट्रेन से ट्रेनिंग के लिये जा रहा था उस ट्रेन से पता चला बाजपेयी जी भी दिल्ली जा रहे है और जिस डिब्बे मे
उनका रिज़र्वेशन था उस का ए.सी. ठीक से काम नही कर
रहा था। लोगो ने उनसे डिब्बा चेंज करने का आग्रह किया पर उन्होने अपनी यात्रा उसी
डिब्बे मे की। ये दोनो घटनाये 1984 से 1987 के बीच की है जब वह प्रधान मंत्री नहीं
थे। उनकी सादगी एवं साधारण रहन सहन से ग्वालियर वासी भलीभाँति परिचित हैं। 1984 मे
मे उनका चुनावी जुलूस नया बाज़ार ग्वालियर शाखा के
सामने से निकला था तब उनके पैर मे फैकचर के कारण प्लास्टर चढ़ा था और बे एक छोटी गाड़ी
की छत्त पर बैठे थे। ग्वालियर के लोग उनके प्रति काफी आदर और सम्मान का भाव रखते
थे किन्तु मै आजतक नहीं समझ पाया कि श्रीमती इंद्रा गांधी के निधन के बाद हुए 1984
लोकसभा चुनाव मे उन्हे ग्वालियर से पराजय का मुख
क्यों देखना पड़ा !!!! शायद इसकी बड़ी बजह उनके विरुद्ध चुनाव लड़ रहे ग्वालियर के
महाराज श्री माधव राव सिंधिया का होना रहा हो। ऐसे जन जन मे लोकप्रिय भारत के पूर्व
प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी को हमारी भावभीनि विनम्र श्रद्धांजलि।
विजय सहगल
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