शनिवार, 28 दिसंबर 2024

"माननीय सांसदों के बीच धक्का-मुक्की !!

 

"माननीय सांसदों के बीच धक्का-मुक्की !!





19 दिसम्बर 2024 का दिन भारतीय लोकतन्त्र के लिये शर्मसार करने वाला दिन  था। पक्ष और विपक्ष के राजनैतिक मतभेद आपसी मनभेद मे बदल गये, यहीं आपसी सम्बन्धों का अधोपतन, हिंसक धक्का मुक्की और अनैतिकता की पराकाष्ठा तक जा पहुंची। इस हिंसक धक्का मुक्की मे माननीय भाजपा  सांसद प्रताप सारंगी और मुकेश राजपूत घायल हो गये। इस हिंसक धक्का मुक्की मे सारंगी जी को चोट के कारण, माथा लहू-लुहान हो गया, जिसमे 5-6 टांके लगाने पड़े और सांसद मुकेश राजपूत को बेहोशी की हालत मे दिल्ली के राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल के  आईसीयू मे भर्ती करवाना पड़ा। ये घृणित कृत्य किसी गली छाप व्यक्तियों के बीच होता तो भी समझा जा  सकता था लेकिन ऐसी धक्का मुक्की उन माननीय सांसदों के बीच हुई जिन पर देश के 140 करोड़ लोगो के प्रतिनिधित्व करने की ज़िम्मेदारी थी। दुर्भाग्य ये कि इस धक्का मुक्की का आरोप नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर लगा। राजनैतिक दृष्टि से नेता प्रतिपक्ष का कद, शासक  पक्ष के प्रधानमंत्री  के समकक्ष होता है। ये अत्यंत ही चिंताजनक और दुःखद है कि नेता प्रतिपक्ष जैसे  जिम्मेदारी और सम्मानजनक पद पर आरूढ़ राहुल गांधी पर इस हिंसक धक्का-मुक्की के आरोप लगे। इस हिंसक धक्का मुक्की के विरुद्ध, भाजपा सांसदों द्वारा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के विरुद्ध पुलिस मे प्राथमिकी दर्ज़ कराई गयी है।  यही नहीं नागालैंड की भाजपा  महिला राज्यसभा सदस्य फांगनोन कोन्याक ने भी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर  आरोप लगाया कि राहुल गांधी, मेरे सामने आ गए और ऊंची आवाज मे उनसे दुर्व्यवहार किया जिससे वे असहज महसूस कर रही थी। एक महिला सांसद से राहुल गांधी का ऐसा दुर्व्यवहार भी अप्रशंसनीय कहा जाएगा। इस आशय की शिकायत भी माननीय सांसद कोन्याक द्वारा राज्यसभा के सभापति को दे दी गयी। कॉंग्रेस ने भी क्रॉस एफ़आईआर दर्ज़ कराई गयी है।      

घटनाक्रम की पृष्ठभूमि मे गृहमंत्री अमित शाह पर कथित रूप से बाबा साहब अंबेडकर के अपमान के विरुद्ध कॉंग्रेस के सांसद प्रियंका गांधी के नेतृत्व मे इंडि गठबंधन द्वारा किये जा रहे प्रदर्शन से शुरू होती है। वही दूसरी ओर भाजपा सांसदों  द्वारा उसी समय कॉंग्रेस के विरुद्ध  संसद भवन के मकर प्रवेश द्वार के बाहर भी जॉर्ज सोरस और सोनिया गांधी की सांठगांठ के विरुद्ध प्रदर्शन का आवाहन किया गया था। कहा जाता है कि ऐसी अप्रिय स्थिति तब बनी जब इंडि गठबंधन के प्रदर्शनकारी सांसदों का मार्च, मकर प्रवेश द्वार के सामने प्रदर्शन कर रहे भाजपा सांसदों  की ओर बढ़ते हुए, उनके  ठीक सामने जा पहुंचा। दोनों ओर से 10.30 बजे से लगभग 15 मिनिट चली जबर्दस्त नारेबाजी के साथ दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की हुई।  भाजपा संसद, प्रताप सारंगी और मुकेश राजपूत ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उनको धक्का दिया जिससे वे गिर पड़े और चोटिल हो गये। कॉंग्रेस की ओर से ये बतलाया जा रहा है कि राहुल गांधी  चोटिल हुए सांसद प्रताप सारंगी को देखने पहुंचे!! नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपनी सफाई मे कहा कि, विपक्षी सांसद अंबेडकर की प्रतिमा से शांतिपूर्वक संसद भवन की ओर जा रहे थे। मगर, संसद भवन की सीढ़ियों पर भाजपा के सांसदों के हाथों मे लकड़ियाँ थी और वे विपक्षी सांसदों का रास्ता रोककर खड़े हो गये थे।            

पर टीवी और सोश्ल मीडिया मे वाइरल हो रहे विडियो मे राहुल गांधी के हाव-भाव, बोलचाल और शारीरिक भाषा को देखकर तो ऐसा कतई नहीं दिखता? कि वे घायल सांसद प्रताप सारंगी की मिजाजपुर्सी के लिये गए थे।  घायल बैठे प्रताप सारंगी को प्रथिमिकी उपचार दे रहे सांसद निशिकांत दुबे और हेमंग जोशी तथा अन्य सांसदों ने, बलपूर्वक हिंसक धक्का मुक्की पर राहुल गांधी पर आरोप लगते हुए उनके कृत्य को  शर्मनाक बतलाते हुए उन से प्रश्न किया कि आपने उनको (प्रताप सारंगी) को धक्का क्यों दिया? विडियो मे राहुल गांधी का इस संदर्भ मे प्रत्युत्तर कि, धक्का उन्होने (प्रताप सारंगी) ने दिया!!, आश्चर्य और हतप्रभ करने वाला था!! कैसे 70 वर्षीय सांसद सारंगी उनको धक्का दे सकते है? भारतीय संस्कृति और संस्कारों का ये तक़ाज़ा था कि धक्का-मुक्की के आरोप-प्रत्यारोप से विलग राहुल गांधी का ये नैतिक और मानवीय कर्तव्य था कि वे 70 वर्षीय लहूलुहान घायल,  वरिष्ठ सांसद प्रताप सारंगी का हाल चाल पूंछते और जाने अनजाने हुए कृत्य पर खेद प्रकट करते, तो न केवल नेता प्रतिपक्ष के पद, अपितु सांसद के साथ कॉंग्रेस मे  नेहरू-गांधी जैसे प्रतिष्ठित,  सम्मानीय  परिवार के सदस्य की पद प्रतिष्ठा मे वृद्धि होती और वे अपने पद के साथ न्याय कर पाते? और ऐसी ही अपेक्षा इस घटना मे राहुल गांधी से थी पर अफसोस, यहाँ भी राहुल गांधी, अपने अहंकार, घमंड और श्रेष्ठता के भाव से ग्रसित नज़र आये? जब उन्हे मालूम था कि भाजपा सांसद पहले से ही मकर द्वार के सामने खड़े होकर प्रदर्शन कर रहे हैं और सुरक्षा बलों ने संसद भवन मे प्रवेश हेतु,  दोनों किनारों पर से रास्ता बनाया हुआ है, तब प्रदर्शनरत  सांसदों के बीच से ही राहुल गांधी के, संसद भवन मे प्रवेश करना उनकी हठधर्मिता दर्शाता है। जानबूझ कर प्रदर्शनरत भाजपा सांसदों के बीच मे से जबर्दस्ती प्रवेश करने को राहुल गांधी की  ढिठाई, धृष्टता बेहयाई न कहा जाय तो क्या कहा जाय? उनका ताकत और बल पूर्वक सांसदों को धक्का देकर, दो सांसदों को घायल करना, उनकी मंशा पर बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा करती  है?  गाहे-बगाहे उनका ऐसा व्यवहार  आम जनता और राजनैतिक दलों मे ये धारणा बलवती करता  है कि  नेहरू गांधी परिवार का सदस्य होने के नाते वे  अपने आपको आम लोगो से श्रेष्ठ और कानून से ऊपर मानते हैं?

वहीं दूसरी ओर कॉंग्रेस  अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिख कर शिकायत की है कि मकर द्वार पर भाजपा सांसदों ने उनके साथ धक्का मुक्की की है जिससे उनका संतुलन बिगड़ने के कारण वह गिर पड़े। उन्होने जाँच की मांग की है।   

लोकसभा और राज्य सभा के सभापति और पुलिस के समक्ष  राहुल गांधी के विरुद्ध शिकायत दर्ज़ कराई गयी है। जाँच के उपरांत ही इस विषय मे आगे कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी परंतु ये आवश्यक है कि माननीय सांसदों को अपने आपसी राजनैतिक मतभेदों को मत और मतांतरों से परे एक दूसरे के विचारों का आदर करना चाहिये, ये ही लोकतन्त्र का तक़ाज़ा है।

विजय सहगल                 

             

रविवार, 22 दिसंबर 2024

"संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर मोदी ने कॉंग्रेस की बखिया उधेड़ी"

 

"संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर मोदी ने कॉंग्रेस की बखिया उधेड़ी"




संविधान की 75वी  वर्षगाँठ पर विशेष चर्चा की शुरुआत पर जहां बायनाड  से सांसद कॉंग्रेस की प्रियंका गांधी, लोकसभा मे अपने प्रथम सम्बोधन मे कोई विशेष प्रभाव नहीं छोड़ सकी। लेकिन इस अवसर पर चर्चा का जवाब देते हुए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने शांत, और संयमित शुरुआत करते हुए अपना  आक्रामक रुख अख़्तियार करते हुए कॉंग्रेस द्वारा स्वतन्त्रता के बाद से संविधान मे अनेकों संशोधनों  के साथ, छेड़-छाड़ और मन मुताविक बदलाव पर कॉंग्रेस और नेहरू परिवार की बखिया उधेड़ कर उनके कारनामों का कच्चा चिट्ठा खोल दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा मे सम्बोधन को सुनकर, जहां सत्ता पक्ष के लोगो ने मेजे थपथपाते हुए अपनी खुशी जाहिर की, वही कॉंग्रेस के सदस्यों सहित राहुल गांधी बगले झाँकते नज़र आये।

14 दिसंबर 2024 को संविधान पर विशेष चर्चा का समापन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहां एक ओर सभी देश वासियों के लिये ही नहीं अपितु विश्व के सभी लोकतान्त्रिक नागरिकों के लिये उत्सव का दिन करार दिया। संविधान निर्माताओं के योगदान की सराहना की। एक घंटे छप्पन मिनिट के अपने भाषण मे नरेंद्र मोदी ने विभिन्न सदस्यों द्वारा अपने विचार प्रकट करने पर धन्यवाद ज्ञपित किया। देश के कोटि कोटि नागरिकों को बधाई देते हुए भारत के लोकतन्त्र को विश्व की के लोकतंत्र की जननी बताया। मोदी ने राजर्षि पुरषोत्तम दास टंडन, डॉ राधा कृष्णन, बाबा साहब अंबेडकर, जो संविधान सभा के सदस्य थे, के कथनों को  उद्धृत करते हुए कहा कि  भारत भूमि मे लोकतन्त्र हमारे संस्कार और सांस्कृति मे हजारों वर्षों से है। अपनी उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए उन्होने  महिला शक्ति के देश के हर क्षेत्र मे योगदान का उल्लेख करते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लाकर महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की, आज भारत की महिला राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु  के निर्वाचन को सुखद संयोग बतलाया। भारत को विश्व की तीसरी आर्थिक ताकत का उल्लेख करते हुए संविधान की 100वी वर्षगांठ पर भारत को विकशित राष्ट्र का संकल्प दोहराया। मोदी ने देश की विभिदता मे एकता की  मुख्य  भावना  को संविधान की मूल भावना बताया। धारा 370 एवं 35ए भारत की एकता मे मुख्य रुकावट थी जिसे समाप्त कर उनकी सरकार ने देश की एकता को अपनी प्राथमिकता बतलाया। देश के आर्थिक विकास के लिये एक देश एक टैक्स के रूप मे जीएसटी को लागू किया। एक देश एक राशन कार्ड के माध्यम से अपनी जीविका के देश के विभिन्न क्षेत्रों मे जा रहे  गरीबी रेखा के लोगो को कहीं भी राशन की सुविधा संविधान ने सुलभ कराई। इसी तरह आयुष्मान कार्ड के माध्यम से एक देश एक हेल्थ कार्ड की योजना से गरीबी रेखा के नीचे के परिवार को देश मे कहीं भी इलाज की सुविधा संविधान मे उपलब्ध हुई। मोदी ने अपनी सरकार की उपलब्धियों मे विजली के लिये एक देश एक ग्रिड, डिजिटल पेमेंट, गाँव गाँव तक ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से इंटरनेट, नयी शिक्षा नीति के माध्यम से मातृ भाषा को बढ़ावा, काशी तमिल संगमम, तेलगु संगमम के माध्यम से देश की एकता मजबूत करने के सार्थक प्रयास बतलाए।

प्रधानमंत्री मोदी ने अफसोस जताते हुए उल्लेख किया कि जब देश संविधान की 25वीं वर्षगांठ मना रहा था तब कॉंग्रेस ने 1975 मे आपातकाल लगा कर देश के संविधान का  गला घौंटने की नाकामयाब कोशिश की। संवैधानिक व्यवस्थाओं को समाप्त करने का कुत्सित प्रयास किया।  विरोधियों को गिरफ्तार कर देश को जेलखाना बनाया गया। नागरिकों के अधिकारों और प्रेस के स्वतन्त्रता को समाप्त करने के घिनौनी कोशिश इन्दिरा गांधी ने की। उन्होने कॉंग्रेस के इस पाप को उसके माथे का कलंक बतलाया जो धुलने वाला नहीं। भारत के संविधान निर्माताओं के प्रयासों को आपातकाल मे मिट्टी मे मिलाने की कोशिश की गयी। वहीं दूसरी ओर भाजपा  की अटल सरकार ने संविधान की 50वीं वर्षगांठ को सारे देश मे एकता, जनभागीदारी, सांझेदारी का संदेश दिया था। उन्होने बताया कि उनकी पार्टी ने गुजरात मे  संविधान की 60वीं सालगिरह पर देश मे पहली बार संविधान की प्रति को हाथी की पालकी मे रख स्वयं मुख्यमंत्री के नाते हाथी के बगल मे पैदल चल कर संविधान के महात्म्य को जनसाधारण के सामने प्रदर्शित किया। संविधान की शक्ति का सामर्थ्य बतलाते हुए उन्होने उन जैसे साधारण व्यक्ति को देश का सबसे बड़ा उत्तरदायित्व एक, दो बार नहीं तीसरी बार देकर उनके  स्नेह, आशीर्वाद को सराहा।

संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर आये उतार चढ़ाव का उल्लेख करते हुए मोदी ने इस यात्रा मे कॉंग्रेस के एक परिवार ने संविधान को चोट पहुंचाने मे कोई कोर कसर न छोड़ने के तथ्यों पर प्रकाश डाला ताकि नयी पीढ़ी भी इन तथ्यों से अवगत हो सके। उन्होने इन 75 वर्षों मे इस परिवार के 55 वर्षों की कुविचार, कुरीति और कुनीति की लगातार चल रही परंपरा का उल्लेख करते हुए इस परिवार द्वारा संविधान को दी गयी चुनौतियों का उल्लेख किया। 1947 से 1952 तक जब कोई निर्वाचित सरकार नहीं थी, एक अस्थाई, तदर्थ सरकार थी। नेहरू की अन्तरिम सरकार ने 1951 मे एक अधिनियम के माध्यम से अभिव्यक्ति की आजादी पर कुठराघात किया। ये संविधान निर्माताओं का अपमान था। इसी दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा कि यदि संविधान उनके रास्ते के बीच मे आ जाय तो हर हाल मे संविधान मे परिवर्तन करना चाहिये!! इतना ही नहीं तब के राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद, आचार्य कृपलानी और जय प्रकाश नारायण की इस विषय पर स्पष्ट चेतावनी को नेहरू ने दर किनार कर दिया। संविधान संशोधन का खून कॉंग्रेस के मुंह मे ऐसा लगा कि कॉंग्रेस ने अपने लगभग छह दशक के कार्यकाल मे 75 बार संविधान संशोधन किया। 1971 मे कॉंग्रेस की इन्दिरा गांधी के कार्यकाल मे संविधान मे किए संशोधन के अनुसार  कानून मे किसी भी बदलाव पर न्याय पालिका उसमे हस्तक्षेप नहीं कर सकती थी। ये न्यायपालिका के क्षेत्र मे सीधा हस्तक्षेप था जो संविधान मे प्रदत्त मौलिक अधिकारों का हनन था, मूल भावना के विरुद्ध था। 1975 मे तब की प्रधानमंत्री ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश पर उनके चुनाव को अवैध बतलाते हुए असंवैधानिक बताया तब उन्होने अपनी कुर्सी बचाने के लिये देश मे  आपात काल लगा दिया और लाखो राजनैतिक विरोधियों को जेल मे डाल दिया। 1975 मे मे ही  39वे संविधान संशोधन के माध्यम से कॉंग्रेस की तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी ने राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधान मंत्री, अध्यक्ष के पदों पर निर्वाचन के विरुद्ध किसी भी सक्षम न्यायालय मे जाने से ही रोक लगा दी, विडंवना ये थी कि इस कानून को पिछली तारीख से प्रभावी बनाया। ये इन्दिरा गांधी द्वारा अपनी सत्ता और निजी स्वार्थ के लिये संविधान का मखौल उड़ाने जैसा था। उनके लिये सरकार के प्रति वफादार न्यायपालिका की संकल्पना उनकी रीति और नीति थी। यही कारण था कि सुप्रीम कोर्ट मे इन्दिरा गांधी के विरुद्ध निर्णय देने वाले न्यायाधीश एच आर खन्ना की  वरिष्ठता को अनदेखा कर  उनसे जूनियर न्यायाधीश को सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया। मोदी यहीं नहीं रुके, उन्होने राजीव गांधी के  एक मुस्लिम तलाक़शुदा वृद्ध महिला शहबानों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश से प्राप्त हुए चंद रुपए के गुजारा भत्ता देने के निर्णय को एक अधिनियम के माध्यम से पलट कर मुस्लिम कट्टर पंथियों के सामने घुटने टेक कर वोट बैंक की खातिर तुष्टि करण नीति को बढ़ावा दिया। ये संविधान की आत्मा पर एक और घिनौनी चोट थी। श्रीमती सोनिया गांधी पर हमले के तहत अपरोक्ष रूप से उन्होने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन के उस कथन  को उद्धृत किया जिसमे उन्होने स्वीकार किया कि पार्टी अध्यक्ष सत्ता का केंद्र है, सरकार पार्टी के प्रति जबावदेह है!! ये कथन हतप्रभ करने वाला था कि कैसे पीएमओ के उपर एक गैर संवैधानिक राष्ट्रीय सलाहकार परिषद को बैठा दिया। मोदी ने नेहरू परिवार की चौथी पीढ़ी पर संविधान का मखौल उड़ाने का आरोप लगते हुए कहा कि भारत की जनता द्वारा चुनी गयी सरकार के मंत्रिपरिषद द्वारा सर्वसम्मति से लिये गए निर्णय को एक अहंकारी व्यक्ति ने मत्रिमंडल के निर्णय को पत्रकारों के सामने फाड़ कर कचरे के डिब्बे मे फेंक दिया। दुर्भाग्य ये कि मंत्रिपरिषद ने भी उस अहंकारी व्यक्ति द्वारा फाड़े गए निर्णय को बापस ले लिया। कॉंग्रेस ने सदा संविधान की अवमानना की, संविधान के महत्व को कम किया। उन्होने आरक्षण, एकसमान नागरिक संहिता पर भी प्रकाश डाला और उसके महत्व का उल्लेख किया। मोदी ने कॉंग्रेस पर आरोप लगते हुए कहा कि जो पार्टी अपने संविधान को नहीं मानती वो देश के संविधान को क्यों और कैसे मानेगी।

विजय सहगल                                       

रविवार, 15 दिसंबर 2024

डिजिटल अरैस्ट नहीं फ़िज़िकल अरैस्ट

 

"डिजिटल अरैस्ट नहीं फ़िज़िकल अरैस्ट"






इन दिनों साइबर क्राइम की डिजिटल अरैस्ट की घटनाएँ काफी सुनेने मे आ रहीं है। लेकिन पिछले दिनों मै स्वयं अपने ही घर मे फ़िज़िकल अरैस्ट हो अनेकों लोगो की उपस्थिति के बावजूद लूट का शिकार हो गया। उस घटना को मै आप लोगो के साथ सांझा कर रहा हूँ।

घर मे वैवाहिक समारोह जब अच्छी तरह पूर्वक सम्पन्न हो गया तो जैसा कि सारी जागह  का रिवाज और दस्तूर है कि किन्नर समाज, शुभ और खुशी के अवसरों पर अपना नेग पाने के लिए उन घरों मे आते है जहां शादी या बच्चों के जन्मादी के शुभ संस्कार होते हैं। कुछ लोक गीतों और लोक नृत्यों के पश्चात नव युगल को आशीर्वाद और कुछ रस्मों के बाद वे अपना नेग लेते हैं। मेरा भी मानना हैं कि ये उनका हक भी है ताकि समाज का हर वर्ग एक दूसरे पर निर्भर हो सामाजिक  उत्थान की ओर अग्रसर होता रहे। खुशी के इस मौके पर कुछ किन्नर शादी कार्यक्रम के बाद घर मे आ पधारे। उनके लोक गीत और लोक नृत्य की औपचारिकता के बाद नेग आदि की औपचारिकता कुछ मोल भाव के बाद पूरी हुई जो एक अच्छी राशि के रूप मे एवं  मिष्ठन आदि देकर उन्हे विदा किया। इस छोटे से कार्यक्रम मे नवयुगल, हमारे कुछ कुछ रिश्तेदार, मित्र, पड़ौसी भी शामिल थे। खुशी और हर्षोल्लास के बीच ये रस्म भी अच्छी तरह से सम्पन्न हो गयी।

मेरे सहित, हमारे मित्र, परिवार और नजदीकी रिश्तेदार भी खुश थे कि शादी का पूरा कार्यक्रम ईश्वर की असीम कृपा और आशीर्वाद  से  निर्विघ्न खुशी खुशी सम्पन्न  हो गया। पर अचानक दूसरे दिन सुबह मैंने दो ऑटो मे 6-7 किन्नरों को अपने घर की ओर आता देखा तो हैरान  हो गया। हैरानी इस बात से थी कि अभी कल ही तो 2-3 हिजड़े घर पर आए थे और अच्छी ख़ासी रकम देकर उन्हे विदा किया था अब ये पुनः मुसीबत कहाँ से आ गयी? आते ही उन्होने अपने साही अंदाज़ मे तालियाँ बजा बजा कर दूल्हा दुल्हन और परिवार को बधाई  देना शुरू कर दिया, जो सामान्य शिष्टाचार था। पर जब नेग मांगने की बारी आयी तो मैंने उन्हे बताया कि मै तो कल ही आप लोगो को नेग दे चुका!! उनमे से कुछ ने तो कहा हमे उनसे कोई मतलब नहीं हमे तो हमारा नेग चाहिए? हम ही असली किन्नर हैं। अब हमारा माथा ठनका, क्योंकि उन्हे देख कर जैसी आशंका थी कि वे तो पैसे लिये बिना नहीं जाएंगे? मैंने कहा कि हमे  तो आपका नेग और दस्तूर देने मे कोई बुराई नहीं थी और मै तो आपका दस्तूर देने के भी पक्ष मे था लेकिन जब कल हम उन्हे पैसे दे चुके उसका क्या। फिर नकली और असली की हम पहचान करें कैसे? कल को कोई तीसरा ग्रुप आ जाएगा कि हम ही असली किन्नर है तब तो हम क्या करेंगे? हमे तो ये मालूम था कि हर किन्नर समूह का एक क्षेत्र निश्चित हैं तो दूसरे क्षेत्र के किन्नर आपके इलाके  मे कैसे आ गए? ये तो अच्छा था कि आज के इस सूचना प्रधान युग मे कुछ रिशतेदारों ने उन नकली किन्नरों के  विडियो और फोटो ले लिये थे। जब उनके ग्रुप लीडर को हमने वे विडियो और फोटो दिखाये तो उन के समूह को उम्रदराज सदस्य ने उनको देख समझ लिया कि ये कुछ नकली हिजड़े क्षेत्र मे घुसपैठिए की तरह आ गये। इन किन्नरों मे से एक-दो ने कहा कि हम घर मे हुई पिछली शादी मे भी 6-7 साल पहले आप से ही नेग ले गये थे। मैंने अपनी सहमति अवश्य जताई पर उनसे कहा कि तुम लोग 6-7 साल बाद अब आए हो तो हम तुम्हें कैसे पहचाने? यदि तुम सहज भले या  होली-दिवाली आते रहते तो पहचानना संभव था, पर 6-8 साल मे कैसे पहचाने? छोटी-मोटी रकम होती तो कोई बात न थी, हजार-दो हज़ार मे कोई फर्क नहीं पड़ता पर ये तो बड़ी राशि थी। किन्नरों के समूह के उन बुजुर्गवार ने अपने गुरु को फोन लगा कर मेरी उन से बात कराई और सारा किस्सा बताने को कहा। मैंने उनके गुरु को मेरे साथ एक दिन पहले घटी, घटना को संक्षेप मे बतलाया। अब किन्नरों के उस समूह ने आपस मे बात की और अपने मोबाइल फोन पर उन नकली किन्नरों के विडियो, फोटो भेजने को कहा। बिना किसी देरी के हमने उनके नंबरों पर उन धोखेबाज हिजड़ों के फोटो भेज दिये।  आए हुए इन किन्नरों की ये भलमनसाहत थी कि उन्होने अपने गुरु से बात कर हमसे अपने नेग लेने की मांग को छोड़ दिया। वर-बधू सहित सभी को आशीर्वाद दे कर उन्होने कहा कि हम अपने जजमानों को कभी भी दुख या तकलीफ नहीं देते। हमारे क्षेत्र मे घुसे इन घुसपैठियों से तो हम निपटेंगे ही आप के यहाँ भी जल्दी-से-जल्दी आने वाली खुशियों मे बधाई गाने फिर आएंगे। इस आशय का आशीर्वाद दिया और   दुबारा बगैर किसी नेग दस्तूर आदि नहीं लिया। मुझे आश्चर्य मिश्रित खुशी थी कि यदि ये लोग अपनी जिद पर आ जाते तो हमे मजबूरी मे ही सही  धनराशि पुनः देनी पड़ती।

किन्नरों के उस समूह ने अपना विजिटिंग कार्ड भी दिया कि यदि ये बदमाश दुबारा दिखाई पड़े तो हमे सूचित करना। परिवारजनों ने आये हुए इस नवीन किन्नरों के समूह को मिष्ठान आदि खिला कर पुनः आने के लिये आमंत्रित किया।

मुझे भी उनसे हमदर्दी थी कि समाज के इन थर्ड जेंडरों के हक पर किन्ही नकली और धोखेबाज लुटेरों ने उनके हक हकूक पर दिन दहाड़े डाका डाल दिया!! अब तक डिजिटल अरैस्ट की घटनाएँ तो आये दिन आजकल हम टीवी और  समाचार पत्रों मे देख और सुन रहे थे, पर आज फ़िज़िकल अरैस्ट की इस घटना मे खुद के साथ हुई इस लूट की घटना से ठगा महसूस कर रहे हैं। दिये गये फोटो वीडियो मे यदि ये नकली लुटेरे कहीं दिखाई दे तो हमे अवश्य सूचित करना ताकि समाज के इन वंचित किन्नरों को न्याय दिलाया जा सके।

विजय सहगल             

रविवार, 8 दिसंबर 2024

"21वीं शताब्दी की भारतीय रेल"

"21वीं शताब्दी की भारतीय रेल"






पिछले दिनों पारवारिक कार्यकर्मों के चलते पिछले दो रविवार, सोश्ल मीडिया से अवकाश पर रहा।  पर इसी दौरान  रेल विभाग के एक सुखद अनुभव से आश्चर्य चकित और अभिभूत था, जिसे मै आप सभी के साथ सांझा करना चाहूँगा।  यूं तो रेल से देश के आम आदमी का संबंध आवागमन की दृष्टि से बड़ा गहन है और इसके बिना गमनागमन की कल्पना नहीं की जा सकती, लेकिन स्वतन्त्रता के बाद से रेल सेवाओं का  ढर्रा एक तय लाल फीताशाही के रास्ते पर अनेक वर्षों तक चलता रहा। यात्री सेवाओं के मामले मे रेल विभाग के  रवैये को    दशकों तक यात्री सुविधाओं की दृष्टि से एक आदर्श पैमाने से अच्छा नहीं कहा जा सकता था। रेल आरक्षण मे आरक्षण और दलाली, टिकिट विंडो पर ज्यादा पैसे की बसूली आदि  से देश का आम नागरिक भलीभाँति परिचित है।  इन कड़वे अनुभवों के बारे मे मैंने अपने ब्लॉग हीराकुंड एक्स्प्रेस (https://sahgalvk.blogspot.com/2018/11/blog-post_15.html ) दिनांक 15 नवंबर 2018  और 30 मई 2020 को ब्लॉग शताब्दी एक्स्प्रेस (https://sahgalvk.blogspot.com/2020/05/blog-post_30.html) तथा ब्लॉग माल गाड़ी (https://sahgalvk.blogspot.com/2018/09/blog-post_44.html) दिनांक 28 सितंबर 2018 मे उल्लेख किया था। इस बात को स्वीकार करने मे कोई परिहेज नहीं कि पिछले एक दशक से रेल सेवाओं मे सकारात्मक बदलाब देखने को मिले। रेल सेवाओं मे उन्नति के साथ तकनीकि और गतिमान, वंदे भारत एक्स्प्रेस, तेजस, हमसफर जैसी नई और आधुनिक सुख सुविधाओं वाली रेल गाड़ियों देखने को मिली।

दिनांक 25 नवम्बर 2024 की अल सुबह लगभग 2.45  बजे, मै अपने हैदराबाद के मित्रो को 12723 तेलंगाना एक्ष्क्प्रेस  लेने के लिए ग्वालियर स्टेशन पहुंचा तो इस सर्द सुबह मे गाड़ी सही समय से प्लेट फ़ोर्म संख्या दो पर आने वाली थी। जैसे ही मै प्लेट फ़ोर्म नंबर एक पर पहुंचा तो देख कर चिंतित था कि प्लेट फ़ोर्म  एक से प्लेटफ़ोर्म नंबर दो पर को जोड़ने वाले  पहाड़ जैसे ऊंचे पुल पर चढ़ने वाली यांत्रिक सीढ़ियाँ (एस्क्लेटर) और लिफ्ट दोनों ही बंद थी। रेल स्टेशन की ऊंची ऊंची सीढ़ियो पर जैसे तैसे मै  चढ़ तो गया लेकिन मै हैदराबाद से आ रहे 83 बर्षीय  मेरे साथी श्री नारायण राव के लिए चिंतित था कि कैसे वे ऊंचे पुल की सीढ़ियों से उतरेंगे? मैंने तुरंत ही रेल मंत्री के ट्वीटर एकाउंट पर ट्वीट कर एस्क्लेटर न चलने की शिकायत की। गाड़ी प्लेटफ़ोर्म पर आ रही थी कि अचानक एक फोन काल आया और शिकायत के बारे मे विस्तृत जानकारी मांगी। मैंने प्लेटफ़ोर्म संख्या एक की लिफ्ट और एस्क्लेटर न चलने की शिकायत को दोहराया। अब तक ट्रेन आ चुकी थी और हम अपने चारों मेहमानों के साथ प्लेटफ़ोर्म नंबर 2 की लिफ्ट की ओर बढ़ रहे थे जो सौभाग्य से प्लेटफॉर्म संख्या दो की लिफ्ट ठीक थी। जैसे ही हम लोग प्लेटफ़ोर्म 2 की लिफ्ट से रेल ब्रिज पर चढ़े पुनः रेल विभाग के श्री हर्ष का फोन आ गया। उन्होने माफी मांगते हुए बतलाया कि लिफ्ट कल 6 बजे से खराब है और जिसकी सूचना विभाग के उच्च अधिकारियों को हैं। मैंने हैरानी जताते हुए उनसे अपनी अप्रसन्नता प्रकट की। उन्होने व्हील चेयर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया लेकिन हम लोग तो रेल पैदल पुल पर थे और व्हील चेयर प्लेटफ़ोर्म एक की लिफ्ट बंद होने के कारण अनुपयोगी थी। अब तक  रेल मदद और रेल मंत्रालय के ट्वीटर पर शिकायत ने अपना प्रभाव दिखलाना शुरू कर दिया था। प्लेटफ़ोर्म एक का एस्कलेटर चालू होकर नीचे से ऊपर यात्रियों को ला रहा था।   अब अंतिम प्रस्ताव के रूप मे रेल विभाग के अधिकारी ने रेल पुल से उतरने का जो प्रस्ताव दिया, जिसे सुन कर मै आश्चर्यचकित था। उस अधिकारी ने कहा कि आपके 83 वर्षीय साथी को पुल से नीचे उतारने के लिए एस्कलेटर को कुछ मिनटों के लिये  उल्टी दिशा मे चला कर मै आपकी सहायता कर सकता हूँ।

अब क्या था "अंधे को क्या चाहिये? दो आंखे"!! मैंने अधिकारी के फोन पर मिले इस प्रस्ताव को तुरंत अपनी सहमति दे दी। अब  हम सभी साथी पुल के ऊपरी सिरे पर खड़े होकर एस्कलेटर का विपरीत दिशा अर्थात ऊपर से नीचे की दिशा मे चलने का इंतज़ार करने लगे। अचानक एस्कलेटर जो अब तक नीचे से ऊपर की दिशा मे चल रहा था, रुका और टों-टों के दो तीन आवाज करने के बाद ऊपर से नीचे की ओर चलने लगा। मै देख कर बहुत खुश हुआ और एस्कलेटर की सीढ़ियों पर सवार होकर अपने साथी राव साहब के साथ पांचों मित्रों के साथ नीचे आ गया।

रेल विभाग के इस सुखद शिकायत समाधान मेरे लिये किसी दोहरे  आश्चर्य से कम न था। पहला तो, हो सकता है आप मे से बहुत से लोग जानते हों कि एस्कलेटर को उल्टा भी चलाया जा सकता है, लेकिन मुझे  ऐसी जानकारी  नहीं थी  कि ऐसा भी संभव है? दूसरा रेल विभाग द्वारा बमुश्किल 15 मिनिट मे एक साधारण यात्री की शिकायत का इतना सुखद और प्रशंसनीय समाधान रेल विभाग देगा मुझे दूर-दूर तक उम्मीद न थी। रेल बिभाग की यह घटना प्रमाणित  करने के लिये काफी है कि 21वी सदी की नया भारत बदला हुआ भारत है।

यात्रियों की शिकायत को तत्परता से समाधान हेतु धन्यवाद रेल मंत्रालय !!, धन्यवाद रेल मदद !! धन्यवाद संबन्धित अधिकारीगण !!         

विजय सहगल


शनिवार, 16 नवंबर 2024

मल्लिकार्जुन खड़गे का भगवा से पूर्वाग्रह

 

"मल्लिकार्जुन खड़गे का भगवा से पूर्वाग्रह"



पिछले दिनों कॉंग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे,  मुंबई की एक चुनावी रैली मे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ का नाम लिये बिना उनके भगवा वस्त्रो पर अशोभिनीय टिप्पड़ी  कर विवादों के घेरे मे आ गये। उन्होने कहा कि कई नेता साधू वेश मे रहते हैं और अच्छे राजनैतिज्ञ बन गये हैं और उनके सिर पर बाल भी नहीं हैं,  अब राजनेता बन गये है। कुछ तो मुख्य मंत्री भी बन गये। उन्होने आगे भाजपा को संबोधित करते हुए कहा या तो उनके नेता सफ़ेद कपड़े पहने या अगर वे सन्यासी हैं तो गेरुए कपड़े पहने, और राजनीति से बाहर हो जाए!! उसकी पवित्रता क्या रह गयी!! कॉंग्रेस का सनातन, भगवा या हिंदुओं पर दुराग्रह कोई नई बात नहीं है, इसके पूर्व भी उनके पुत्र सहित इंडि गठबंधन  के तमाम नेताओं ने, समय कुसमय  सनातन के विरुद्ध  कड़ुवे शब्दों मे विष वमन किया  है। बैसे तो राजनैतिक तौर पर भारतीय लोकतन्त्र मे किसी भी धर्म, भाषा, सांस्कृति या पहनावे को राजनीति मे हिस्सा लेने पर प्रतिबंध नहीं है तब  मल्लिकार्जुन खड़गे का उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी को राजनीति से बाहर हो जाने वाला  उक्त ब्यान गैर जरूरी और बेतुका है। अब देश के सबसे पुराने राजनैतिक दल के मुखिया मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा सनातन धर्माचार्य के वस्त्रों पर किए गये कमेंट पर विचार मंथन आवश्यक हो गया है।

काश स्वतन्त्रता के बाद देश मे सफ़ेद कपड़े (खादी) पहनने वाले कोंग्रेसी नेताओं ने सफ़ेद अर्थात खादी के कपड़ों की पवित्रता बनाई होती तो देश के मतदाताओं ने धर्माचार्यों को कदाचित ही राजनीति मे आने के लिए चुनाव किया होता। देश की स्वतन्त्रता के बाद, कॉंग्रेस के लगभग 65 सालों के शासन मे यदि कॉंग्रेस ने  घोटाले, भ्रष्टाचार, भाई भतीजा बाद के मामले न किए  होते   तो योगी आदित्य नाथ जैसे भगवधारी योगीयों को शायद ही देश की जनता ने  राजनीति मे आने के लिए चुना होता। आज आवश्यकता, मल्लिकार्जुन खड़गे को कॉंग्रेस के इतिहास पर दृष्टिपात करने की है कि, क्या श्वेतांबर धारी कॉंग्रेस के नेताओं ने योगी के भगवा वस्त्रों मे उनके कार्यकाल मे भ्रष्टाचार, परिवारवाद और भाई भतीजा वाद  जैसा कहीं कोई दाग खोजा? क्या काँग्रेस और मल्लिकार्जुन खडगे ने योगी के कार्यकाल मे मनसा वाचा कर्मणा के आधार पर कोई ऐसा कृत्य देखा, जो आम नागरिकों, समाज, राष्ट्र को अहित पहुंचाने वाला हो? जो कॉंग्रेस  परिवारवाद के चलते,  नेहरू खानदान की चौथी-पाँचवी  पीढ़ी को देश मे  स्थापित करने के लिये प्रयासरत है और स्वयं श्री मल्लिकार्जुन खड़गे भी परिवारवाद की राजनीति के चलते, कर्नाटक मे अपने मंत्री पुत्र, मोह से अछूते नहीं हैं, क्या उस कॉंग्रेस ने, योगी जी के कार्यकाल मे उनके  माता-पिता, भाई-बहिनों या अपने परिवार के अन्य रिशतेदारों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई आर्थिक लाभ या  राजनैतिक संरक्षण  पहुंचाने की कोई भी उदाहरण देखा? तब मल्लिकार्जुन जी का योगी पर राजनीति मे पवित्रता बनाये रखने  का  आरोप, क्या स्वयं कॉंग्रेस पर सवालिया निशान नहीं है?    

जिस कॉंग्रेस के शासन काल मे स्वतन्त्रता के बाद हुए साइकिल घोटाला (1951), मुंधा मैस घोटाला (1958), तेजा ऋण घोटाला (1960), मारुति कार, पनडुब्बी दलाली (1987), बोफोर्स तोप (1987), हर्षद मेहता कांड( (1992), इंडियन बैंक घोटाला (1992), तहलका कांड, केतन पारेख का स्टॉक मार्केट कांड, अब्दुल करीम तेलगी का स्टम्प पेपर घोटाला, सत्यम कम्प्युटर कांड जैसे अनेक घोटाले हुए। 2010 मे कॉमनवैल्थ गेम घोटाला, 2जी घोटाला, आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाला, कोयला घोटाला, नोट फॉर वोट, शारदा चिट फ़ंड, अगास्ता वेस्टलेंड हेलीकाप्टर घोटाले   जैसे अन्य अनेक  घोटालों को भी लोग भूले नहीं है। राहुल और सोनिया  गांधी पर नेशनल हेराल्ड कांड अभी न्यायालय मे विचारधीन ही  है। अपने सफ़ेद कपड़ों के दामन मे इतने काले दाग समेटे कॉंग्रेस, योगी के मुख्यमंत्री के रूप चल  रहे, दूसरे कार्यकाल मे क्या उनके भगवा वस्त्रों पर अब तक कोई काला धब्बा खोज पायी? ये तो भला हो योगी जी का कि अपने निष्कलंक मुख्यमंत्रित्व काल मे न केवल काजल की कोठरी मे अब तक बेदाग रह रहे है अपितु प्रदेश मे गुंडे, अपराधियों, माफियायों एवं असामाजिक तत्वों पर लगाम लगाई।  बहुतों का  तो समूल उखाड़ फेंक उनके अस्तित्व को  ही समाप्त कर दिया और अपराधियों को "मिट्टी मे मिला देने वाले" अपने  ब्यान के माध्यम से अपने स्पष्ट और दृढ़ इरादों को एक बार फिर जतला दिया। भगवा वस्त्र  की उजली चमक को, श्रीमद्भगवत गीता के उस कथन को फिर एकबार  पुनर्स्थापित किया जिसमे भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि-:

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे।। (अध्याय 4 श्लोक 8)

               

सनातन पर अनावश्यक टिप्पड़ी करने वाले जिन मल्लिकार्जुन खड़गे जी  को अन्य धर्म और धर्मावलंबियों पर टिप्पड़ियों पर तो मानों साँप सूंघ जाता हो उनके  उक्त दृष्टांतों के आधार पर मल्लिकार्जुन खड़गे के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी के भगवा वस्त्रों पर की गयी आधारहीन टिप्पड़ियों से तो, ये निर्णय निकालना सहज और सरल  है कि वर्तमान समय मे देश को सफ़ेदपोश भ्रष्ट, परिवार वादियों, चारित्रिक रूप से पतित नेताओं की अपेक्षा भगवधारी साधुओं की ही आवश्यकता है, जिनेक लिये देश के एक सौ चालीस करोड़ जनमानस ही उनका परिवार हैं। देश हित ही उनके लिये सर्वोपरि है।  

विजय सहगल